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बहराइच में ड्यूटी के दौरान 33 साल के सर्जन की मौत, पेट दर्द और उल्टी जैसा महसूस हुआ, फिर हुए बेहोश

यूपी के बहराइच में एक सर्जन की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। वह महज 33 साल के थे।

Bahraich- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सर्जन की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई

बहराइच: यूपी के बहराइच में एक डॉक्टर की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। डॉक्टर की उम्र महज 33 साल थी और वह ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे थे। मिली जानकारी के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान उन्हें पेट दर्द, गैस और उल्टी जैसा महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें पैंटोप (Pantop) इंजेक्शन दिया गया और उनकी हालत में सुधार होता दिखा। हालांकि कुछ देर बाद वह बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई।

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों का कहना है कि महाराजा सुहेलदेव ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में 33 साल के एक ऑर्थोपेडिक सर्जन की मंगलवार को ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस मामले में चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एस.के. वर्मा का बयान भी सामने आया है।

डॉक्टर एस के वर्मा ने बताया है कि डॉक्टर विनोद कुमार उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर के रहने वाले थे। वह पिछले चार साल से मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर काम कर रहे थे। वह हमेशा की तरह सुबह हॉस्पिटल आए और ओपीडी में मरीजों को देखा और फिर भर्ती मरीजों की जांच की। इसके बाद उन्होंने दिनभर के सर्जरी के शेड्यूल को देखा।

डॉक्टर एस के वर्मा ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्हें पेट दर्द, गैस और उल्टी जैसा महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें पैंटोप का इंजेक्शन दिया गया। इससे उनकी हालत में सुधार दिखा। वर्मा ने बताया कि डॉक्टर को शायद अंदरूनी तौर पर कुछ तकलीफ हो रही हो, लेकिन शायद उन्होंने इसे गंभीर नहीं समझा।

 मरीज की सर्जरी के लिए योजना बनाते समय हुए बेहोश

डॉक्टर वर्मा के मुताबिक, मरीजों को देखने के बाद डॉक्टर विनोद कुमार अपने चैंबर में आ गए और एक मरीज की सर्जरी के लिए योजना बनाने लगे। इसी दौरान वह बेहोश हो गए। डॉक्टरों ने उन्हें कृत्रिम सांस और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। शाम 4:40 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय खत्री का भी बयान सामने आ चुका है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर के परिवार वाले बहराइच के लिए निकल चुके हैं। देर रात उनका पोस्टमार्टम किया जाएगा। देर रात जारी एक प्रेस बयान में, मेडिकल कॉलेज ने डॉ. कुमार को एक समर्पित, मेहनती और कुशल डॉक्टर बताया, जिन्होंने मरीजों की देखभाल में अहम योगदान दिया था। (इनपुट: भाषा)

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