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जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन में ट्रैफिक डायवर्जन लागू, 3 से 5 सितंबर तक नो एंट्री, श्रद्धालुओं के लिए QR कोड जारी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए मथुरा और वृंदावन में 3 से 5 सितंबर तक यातायात डायवर्जन प्लान लागू रहेगा। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रमुख मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

Krishna Janm Bhumi Mathura- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT कृष्ण जन्म भूमि मथुरा

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और लीला भूमि वृंदावन में जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के ब्रज पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष प्लान तैयार किया है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए 3 सितंबर से 5 सितंबर तक मथुरा-वृंदावन शहर में विशेष ट्रैफिक डायवर्जन और नो-एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी।

प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को ब्रज के प्रमुख मंदिरों, धार्मिक स्थलों और यातायात व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए QR कोड भी जारी किया गया है। श्रद्धालु QR कोड के माध्यम से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही प्रमुख मंदिरों के दर्शन समय, धार्मिक महत्व और जन्माष्टमी से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी भी साझा की गई है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ब्रज यात्रा के दौरान निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। किसी सूचना की पुष्टि के लिए केवल प्रशासन और पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की गई है।

Image Source : Reporter InputQR कोड

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर जन्माष्टमी का भव्य आयोजन

उत्तर प्रदेश के मथुरा में जन्माष्टमी का सबसे प्रमुख आकर्षण श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर होने वाला जन्मोत्सव होता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

जन्माष्टमी की रात जैसे-जैसे घड़ी मध्यरात्रि की ओर बढ़ती है, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती का आयोजन किया जाता है। भगवान का पंचामृत और पवित्र जल से अभिषेक कर उनका भव्य श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद उन्हें आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया जाता है।

मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को फूलों, रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनके जीवन से जुड़ी विभिन्न लीलाओं को दर्शाती झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

झांकियों और रासलीला से जीवंत होगा ब्रज

जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियां सजाई जाती हैं। इनमें कृष्ण जन्म, बाल लीला, गोवर्धन पूजा, कालिया नाग मर्दन, माखन चोरी और रासलीला जैसे प्रसंगों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।

कई स्थानों पर रासलीला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। ब्रज की पारंपरिक संस्कृति, संगीत और भक्ति का अनूठा संगम इस दौरान देखने को मिलता है। मंदिरों में दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।

विश्राम घाट पर यमुना आरती बनेगी आकर्षण

जन्माष्टमी के दौरान मथुरा के विश्राम घाट पर होने वाली यमुना आरती भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। शाम के समय यमुना के तट पर दीपों की रोशनी और आरती का दृश्य भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर विश्राम किया था। इसी वजह से विश्राम घाट का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और यमुना आरती में शामिल होते हैं।

वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर का विशेष आकर्षण

भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन में भी जन्माष्टमी का पर्व बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है। यहां ठाकुर बांके बिहारी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहता है। बांके बिहारी मंदिर की जन्माष्टमी की सबसे विशेष परंपराओं में से एक मंगला आरती है। वर्ष में सामान्यतः विशेष अवसर पर होने वाली इस आरती का जन्माष्टमी की रात विशेष महत्व रहता है।

मध्यरात्रि के आसपास होने वाली इस आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भगवान बांके बिहारी के विशेष श्रृंगार और दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।

जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव की धूम

जन्माष्टमी के अगले दिन ब्रज क्षेत्र में नंदोत्सव मनाया जाता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में नंद बाबा के घर आयोजित उत्सव की परंपरा से जोड़ा जाता है। नंदोत्सव के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। भक्त और पुजारी एक-दूसरे पर मिठाइयां, फल और अन्य प्रसाद लुटाकर खुशी मनाते हैं। ढोल, मंजीरे और भजन-कीर्तन के बीच पूरा ब्रज उत्सव के रंग में डूब जाता है।

प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भी विशेष आयोजन

वृंदावन के प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष सजावट की जाती है। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से सजाया जाता है। इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के दौरान भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है। वहीं प्रेम मंदिर की भव्य सजावट और रोशनी देखने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील

जन्माष्टमी के दौरान मथुरा और वृंदावन में भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए 3 से 5 सितंबर तक विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर में वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने और भीड़ वाले क्षेत्रों में जाम की स्थिति रोकने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया जाएगा।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपने वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करें और प्रतिबंधित मार्गों पर वाहन लेकर जाने से बचें। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले यातायात व्यवस्था और रूट डायवर्जन की जानकारी जरूर देख लें।

QR कोड से मिलेगी जरूरी जानकारी

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जारी QR कोड इस बार यात्रा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रमुख मंदिरों के दर्शन समय, धार्मिक स्थलों की जानकारी और यातायात से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को ब्रज में किसी तरह की परेशानी न हो और वे व्यवस्थित तरीके से मंदिरों के दर्शन कर सकें।

अफवाहों से बचने की अपील

जन्माष्टमी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी अपुष्ट सूचना पर भरोसा न करने और उसे आगे प्रसारित न करने की सलाह दी गई है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि यातायात, मंदिरों की व्यवस्था, प्रवेश, पार्किंग या सुरक्षा से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचना को ही सही माना जाए।

कुल मिलाकर इस बार मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव धार्मिक आस्था, ब्रज की परंपरा और आधुनिक यातायात व्यवस्था के समन्वय के साथ मनाने की तैयारी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मध्यरात्रि का जन्मोत्सव हो या वृंदावन में बांके बिहारी की मंगला आरती, विश्राम घाट की यमुना आरती हो या नंदोत्सव की उमंग—जन्माष्टमी के इन दिनों में पूरा ब्रज ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंजता नजर आएगा।

मथुरा से मोहन श्याम शर्मा की रिपोर्ट

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