अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को अहम बैठक की थी। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। दोनों राम मंदिर का काम नहीं देखेंगे। इस बीच, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने इंडिया पर एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि SoP का कड़ाई से पालन नहीं हुआ, इसलिए चोरी हुई।
उन्होंने कहा, "कोषाध्यक्ष के तौर पर मेरी ड्यूटी कोष में जमा राशि की रक्षा करना है । मेरा काम कोष में जमा राशि का आय व्यय देखना है। चढ़ावे की निगरानी का जिम्मा हमारे पास नहीं है। चढ़ावे की निगरानी का जिम्मा मंदिर में रहने वाले लोगों की थी। चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी अनिल मिश्रा की थी। गोपाल राव ना ट्रस्ट में थे और ना ही ट्रस्टी थे। चढ़ावे की निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी अनिल मिश्रा की थी। कर्मचारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी SBI की थी। ट्रस्ट ने सबकुछ SBI के भरोसे छोड़ दिया था। SBI की ढील की वजह से चढ़ावे में चोरी हुई। चढ़ावे में कमी के बारे में ध्यानाकर्षित नहीं किया गया। अगर मुझे ये बताया गया होता तो मैं तुरंत इस पर कार्रवाई करता। हर दिन या हर महीने का हिसाब मैं नहीं देखता हूं। हमने अपने साथियों पर विश्वास किया।"
"चंपत राय पर आज भी विश्वास"
गोविंद देव गिरि ने आगे कहा, "इस समय हमारे पास 2 हजार 370 करोड़ व्यय किए गए हैं। हमारे पास कुल 3 हजार 264 करोड़ रुपये की राशि आई थी। 30 जून तक 1800 करोड़ राशि हमारे पास शेष हैं। इस साल 20 करोड़ 16 लाख 7 हजार 50 रुपये की जमीन खरीदी है। चंपत राय जी पर आज भी हमें विश्वास है। चंपत राय जी ने कोई गबन नहीं किया है। चंपत राय से गलती सिर्फ ये हुई की निगरानी नहीं की। चंपत राय ने जिन लोगों पर भरोसा किया उन्होंने चोरी की। अति निर्भरता के भाव की वजह से उनसे गलतियां हुईं।"
"SBI के कारण हमने विश्वास कर लिया"
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष देव गिरि ने कहा, "SoP को लेकर कभी ट्रस्ट में चर्चा नहीं हुई। ट्रस्ट को कहा गया कि SBI पूरा ऑपरेशन देख रही है। SBI का नाम होने के कारण हमने विश्वास कर लिया। अनिल मिश्रा की सिफारिश पर हो सकता है नियुक्ति हुई होगी। अगर SBI ने अनिल मिश्रा की सिफारिश को लागू किया तो उसने गलत किया। हमारे साथ जो 4 IAS अफसर ट्रस्टी के तौर पर हैं। उन IAS अफसरों को भी इसकी जांच करनी चाहिए थी। ट्रस्ट में शामिल IAS अफसरों की ओर से भी ढिलाई दी गई। वित्तीय अनुशासन के लिए IAS अफसरों की नियुक्ति हुई थी। IAS अफसरों को ट्रस्ट को इसके बारे में बताना चाहिए था। ट्रस्ट में शामिल IAS अफसर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं।"
"चंपत राय को 32 वर्षों से जानता हूं"
उन्होंने कहा, "चंपत राय ट्रस्ट से मुक्त हैं। चंपत राय न्यासी पद से भी मुक्त हैं। अभी चंपत राय कोई भूमिका नहीं निभाएंगे। चंपत राय अभी भी अयोध्या में ही हैं। चंपत राय निर्मल व्यक्ति हैं। चंपत राय सत्य के अन्वेषी हैं। चंपत राय निष्कलंक हैं। चंपत राय को 32 वर्षों से जानता हूं। चंपत राय समर्पित प्रचारक के तौर पर काम करते रहे। चंपत राय का त्याग, समर्पण को कम कर नहीं आंका नहीं जा सकता। चंपत राय के लिए हमें बड़ा आदर है। चंपत राय की सज्जनता पर हमें कोई शक नहीं है। कभी-कभी सज्जन व्यक्ति भी गलती कर जाता है।"
कोषाध्यक्ष ने कहा, "ट्रस्ट अपना पुराना विश्वास लौटाएगा। हमने तीन लोगों को नियुक्ति पर चर्चा करेंगे। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेद, उद्योगपति और शिरडी साईं संस्थान के प्रमुख सुरेश हावरे, ये तीन लोग जिन लोगों का नाम सुझाएंगे उनकी नियुक्ति होगी। चंपत राय जी भी साधु हैं, इसलिए ये गड़बड़ी हुई। साधु-संत तो भजन कीर्तन करते हैं। मुझे तो SIT की जांच पर पूरा भरोसा है। विपक्ष हिंदू समाज को तोड़ना चाहता है। कारसेवकों पर गोली चलाने वाले आज रामभक्त कैसे हो गए। अफवाहों पर विश्वास मत कीजिए। हम रामराज्य लाने के लिए कटिबद्ध हैं।"
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