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कचरे वाली गाड़ी में बैठकर घर-घर पहुंचे यूपी सरकार के मंत्री, खुद बताया क्यों किया ऐसा काम

यूपी सरकार में मंत्री असीम अरुण कचरा गाड़ी में बैठकर घर-घर पहुंचे। उन्होंने गैंबा वॉक का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वह कामगारों के साथ बातचीत करते हुए जरूरी सुधार का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने जरूरी सुझाव भी दिए।

कचरे वाली गाड़ी में बैठकर घर-घर पहुंचे असीम अरुण।- India TV Hindi
Image Source : ASIM_ARUN/X कचरे वाली गाड़ी में बैठकर घर-घर पहुंचे असीम अरुण।

उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण को कचरे की गाड़ी में बैठकर घर-घर जाते हुए देखा गया। हालांकि उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई है। एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि वह लोगों के बीच जाकर और उनसे बातचीत करके उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने अपनी पोस्ट में राज्य स्तर से लेकर पालिका स्तर पर किए जाने वाले जरूरी उपायों से जुड़ा सुझाव भी दिया है। वहीं उन्होंने नागरिकों के लिए भी कुछ जरूरी बातें सुझाव के रूप में बताई।

क्या होता है गैंबा वॉक?

दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर मंत्री असीम अरुण ने गेंबा वॉक का जिक्र किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "जापान में एक मेनेजमेंट प्रक्रिया विकसित की गई जिसे वे बोलते हैं- 'गेंबा वॉक'। मतलब, ऐसे लोग जो मैनेजमेंट में हैं और ये फैक्ट्री फ्लोर पर जाकर कामगारों के साथ खड़े होते हैं, बातचीत करते हैं और सुधार के रास्ते खोलते हैं। पुलिस जीवन में कई बार ऐसा मैंने करके देखा और कई दिनों के प्रशिक्षण की तुलना में दो घंटे में समस्याओं और उनके उपाय का बोध हो गया।"

घर-घर जाकर काम को समझा

असीम अरुण ने आगे लिखा, "इस रविवार मैंने सोचा कि कन्नौज में अपने जो साथी डोर टू डोर कूड़ा उठाने का काम करते हैं, उनके काम को गहराई से समझा जाए उनके साथ ‘गेंबा वॉक’ की जाए। गौतम जी और विकास जी के साथ कुछ पहचान छुपाते हुए सुबह की शिफ्ट में कन्नौज के मोहल्लों में घूमना और अध्ययन करना अच्छा लगा। चार पन्ने भर गए नोट्स लेते-लेते। कुछ सबक जो मुझे मिले आपसे भी शेयर कर रहा हूं। निश्चित रूप से आपका भी इस संबंध में अपना अनुभव होगा और कुछ विचार भी। अपने सुझाव जरूर भेजें।"

असीम अरुण द्वारा दिए गए प्रदेश स्तर के सुझाव

  • बिजली वाले ट्रक लगाना अच्छा होगा, क्योंकि इनकी गति कम रहती है।
  • वाहनों में जीपीएस लगाना चाहिए।
  • नीला और हरा बॉक्स बराबर साइज का है, लेकिन हरा कूड़ा बहुत ज्यादा मिलता है। नीला बॉक्स छोटा होना चाहिए।

पालिका स्तर पर किए जाने वाले उपाय

  • श्रम कानूनों का अक्षरशः पालन।
  • साप्ताहिक अवकाश मिले।
  • न्यूनतम मजदूरी दर का पालन हो।
  • सामाजिक सुरक्षा का इंतजाम हो।
  • ईपीएफ, ईएसआई का पालन हो।
  • वाहनों को साफ, चमचमाता रखा जाए।
  • वाहन के लाउड स्पीकर को बेहतर करना होगा।
  • एक वाहन पर दो कर्मी (+चालक) लगाने से काम तेज होगा।
  • स्थाई कूड़ेदान चोरी हो जा रहे हैं।

नागरिकों को क्या करना चाहिए?

  • कूड़े से कंचन में थोड़ी समस्या है, लोग काम का कूड़ा स्वयं बेचना पसंद करते हैं।
  • कुछ लोग अभी भी कूड़े की छंटाई नहीं कर रहे हैं।
  • पालिका क्षेत्र में गोबर और कंडे पाथने की व्यवस्था को ठीक करना होगा।