लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी ने गुरुवार को लखनऊ में 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाने और पुलिसकर्मियों के सम्मान समारोह में पिछली सरकारों पर निशाना साधा। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने मौजूदा सरकार पर ही कानून-व्यवस्था खराब होने का आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने अपने-अपने दावों के समर्थन में अलग-अलग मुद्दे उठाए।
'अच्छा काम करने के लिए रीढ़ सीधी और मन साफ जरूरी'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी अच्छा काम तभी किया जा सकता है, जब रीढ़ की हड्डी सीधी हो और मन साफ हो। उन्होंने 2017 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय नेतृत्व की रीढ़ टेढ़ी थी और नीयत में भी खोट था। योगी के मुताबिक, इसी वजह से प्रदेश में माफिया का प्रभाव था और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व में फैसले लेने का संकल्प नहीं हो तो पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाता है।
‘पहले माफिया की तूती बोलती थी, अब यूपी बदल गया’
योगी ने कहा कि करीब दस साल पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता का माहौल था और माफिया का दबदबा था। उनके अनुसार, बड़े अधिकारियों को न तो काम करने की पूरी आजादी थी और न ही अपनी बात कहने की। उन्होंने दावा किया कि अब स्थिति बदल चुकी है और ‘जंगलराज का काला साया’ छंट गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। गुरुवार को इसी कार्यक्रम में 87 अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहनों को रवाना किया गया और साहसी पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया।
अखिलेश का पलटवार, 'यूपी में कानून का राज नहीं, जंगलराज'
योगी के बयान पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज नहीं है, बल्कि जंगलराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर के जरिए लोगों को डराया जा रहा है और बेगुनाह लोगों के एनकाउंटर किए जा रहे हैं। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग ‘बुलडोजर वाली सरकार’ से परेशान हो चुके हैं और इसी वजह से राज्य में बदलाव तय है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बदलने के बाद बुलडोजर वाली स्थिति खत्म होगी।
आपातकाल का जिक्र, महंगाई-बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार और महंगाई चरम पर थी और इन्हीं मुद्दों ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा,
'आज भी महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी चरम पर हैं। हम लोकतंत्र बचाएंगे, संविधान बचाएंगे।'
अखिलेश ने आगे दावा किया कि मौजूदा स्थिति पिछले आपातकाल से भी ज्यादा खतरनाक है और देश बीजेपी की ओर से थोपे गए ‘आपातकाल’ का सामना कर रहा है।
‘भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाएंगे तो लोकतंत्र बचेगा’
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर बीजेपी को सत्ता से हटा दिया जाएगा तो लोकतंत्र बच जाएगा। उन्होंने सरकार पर सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं। वहीं, भाजपा और योगी सरकार कानून-व्यवस्था में सुधार और पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण को अपनी सरकार की उपलब्धियों के तौर पर पेश करती रही है। गुरुवार के कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री ने पुलिस सुधार, तकनीक और कानून-व्यवस्था में बदलाव को प्रमुखता से रखा।
जयवीर सिंह बोले, अखिलेश ने समाजवाद की एक भी क्लास नहीं ली
यूपी के मंत्री जयवीर सिंह ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश पिछले कई दिनों से लोगों को समाजवाद का पाठ पढ़ा रहे हैं, लेकिन खुद उन्होंने इसकी एक भी क्लास नहीं ली। जयवीर सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अखिलेश समाजवाद के एक-दो अध्याय पढ़ लेते तो अच्छा होता और उत्तर प्रदेश को परिवारवाद से मुक्ति मिल जाती। उन्होंने दावा किया कि राज्य से माफिया खत्म हो चुके हैं और अखिलेश इसी वजह से नाराज हैं। जयवीर सिंह ने कहा कि जनता उनकी असलियत जानती है।
राज्यसभा चुनाव पर राजभर का हमला, मुस्लिम वोट बैंक का उठाया मुद्दा
यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। नाथवानी के नाम ने खासा राजनीतिक ध्यान खींचा है। राजभर ने इसी फैसले को लेकर अखिलेश पर मुस्लिम समुदाय के साथ ‘दगाबाजी’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस वोट बैंक के सहारे समाजवादी पार्टी चार बार उत्तर प्रदेश में सरकार बना चुकी है, आज उसी को अखिलेश ने किनारे कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव से पहले यूपी की सियासत गरम
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की सीटों को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव के साथ धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है और राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को होने हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था, बुलडोजर कार्रवाई, महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों के साथ राज्यसभा चुनाव भी यूपी की सियासत में चर्चा के केंद्र में हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे अपने-अपने दावों और आरोपों के जरिए जनता के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं।
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