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कुंभकर्ण से भी सोने में 'उस्ताद' है ये प्राणी! 3 साल तक ले सकता है नींद, जानें कैसे

Snail Survival Adaptation: घोंघा, जिंदा रहने के लिए अनुकूलन की मिसाल कायम करते हैं। उनकी कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो 3 साल तक निष्क्रिय हो सकते हैं।

snail sleep- India TV Hindi
Image Source : PEXELS घोंघे के बारे में अजीबोगरीब तथ्य जानिए।

Snail Sleep For Years Fact: दुनिया में कई ऐसे प्राणी हैं जिनकी आदतें मनुष्य के लिए हैरान करने वाली हैं। ऐसा ही एक जीव है Snail, जो सोने के मामले में ‘कुंभकर्ण’ से कम नहीं है। कुंभकर्ण तो 6 महीने तक ही सोता था और जग जाता था लेकिन यह जीव कई वर्षों तक सो सकता है। वह अधिकतम 3 साल तक नींद ले सकता है। भले ही सुनने में यह अजीबोगरीब लगे, लेकिन घोंघे की कुछ खास प्रजाति ऐसी हैं जो 3 साल या उससे भी ज्यादा वक्त तक निष्क्रिय अवस्था में जा सकते हैं।

निष्क्रिय होने के लिए क्या करते हैं घोंघे?

बता दें कि घोंघे की निष्क्रिय अवस्था, सामान्य नींद से थोड़ी अलग होती है। यह एक खास जैविक प्रक्रिया होती है जिसे Estivation कहा जाता है। दरअसल, जब वातावरण काफी गर्म और सूखा हो जाता है, तब घोंघे निष्क्रिय अवस्था में जाने के लिए अपने खोल के अंदर चले जाते हैं। इसके बाद, वह खोल के मुंह को सूखे म्यूकस की लेयर से बंद कर लेते हैं। यह लेयर घोंघे को बाहरी गर्मी और पानी की अभाव से बचाती है।

शरीर की गतिविधियां कर देते हैं बेहद धीमा

इस दौरान, घोंघे की बॉडी की एक्टिविटीज बेहद स्लो हो जाती हैं। उनका मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और एनर्जी की खपत मिनिमम लेवल पर आ जाती है, जिससे वे बिना खाना-पानी के लंबे वक्त तक जिंदा रह सकते हैं। इसमें खास बात ये है कि जैसे ही घोंघे के लिए वातावरण दोबारा अनुकूल होता है- जैसे आसमान से पानी बरसता है या Moisture बढ़ता है- ये घोंघे फिर से एक्टिव हो जाते हैं। अपने खोल से बाहर आ जाते हैं।

सही वक्त का इंतजार करना सिखाता है घोंघा

उनकी यह अनूठी क्षमता दिखाती है कि नेचर में जिंदा रहने के बहुत सारे तरीके होते हैं। जहां एक तरफ सक्रियता और तेज रफ्तार को महत्वपूर्ण माना जाता है, वहीं यह छोटा सा प्राणी सिखाता है कि कभी-कभी सही वक्त का इंतजार और धैर्य ही सबसे बड़ी ताकत होती है।