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पश्चिम बर्दवान के अंडाल में जमीन धंसने से तबाही, रातों-रात बेघर हुए 1000 लोग, ECL की लापरवाही पर फूटा गुस्सा!

मंगलवार दोपहर पश्चिम बर्दवान में अंडाल के बिश्वेश्वरी इलाके का धोबा पाड़ा लगभग एक तबाह बस्ती में बदल गया। लगभग एक हजार लोग रातों-रात बेघर हो गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह आपदा कोई अचानक हुई प्राकृतिक घटना नहीं है, यह लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है।

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Image Source : REPORTER INPUT पश्चिम बर्दवान के अंडाल में जमीन धंसने से तबाही

पश्चिम बंगाल के अंडाल शहर में लैंडस्लाइड से प्रभावित इलाके का माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। कहीं जमीन में चौड़ी दरारें हैं, कहीं आंगन गिर रहा है, कहीं घरों की दीवारें झुक गई हैं। प्रशासन और ECL ने पूरे इलाके को घेर लिया है। लेकिन यहां रहने वाले अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी, जरूरी कागजात और घरों में पड़े अपने सामान को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग बहुत जोखिम उठाकर अपने घरों में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया जा रहा है। इस घटना से स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा अनिश्चित हालत में हैं। कुछ स्टूडेंट्स डॉरमेट्री के एक कोने में अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी के मन में ये सवाल है कि आखिर उनकी नॉर्मल जिंदगी कब तक वापस आएगी, फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

गुस्से में हैं स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों ने बताया, जब यह घटना हुई तब पहले एक जोरदार आवाज आई। फिर जमीन में एक लंबी दरार आ गई। कुछ ही पलों में एक के बाद एक घर गिरने लगे। अपनी आंखों के सामने अपने घरों को जमीन में धंसता देख लोग जान बचाने के लिए भागे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह आपदा कोई अचानक हुई प्राकृतिक घटना नहीं है, यह लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है। बंद पड़ी खदान पर बसे इस शहर में जब भी बारिश होती है, तब-तब लैंडस्लाइड का खतरा रहता है। बार-बार शिकायतें करने के बाद भी कोई पक्का हल नहीं निकला। 

रानीगंज के MLA पार्थ घोष ने लगाया आरोप

घटना के बाद रानीगंज के MLA पार्थ घोष और पांडवेश्वर के पूर्व CPI(M) MLA गौरांग चटर्जी इलाके में गए। दोनों ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। पार्थ घोष ने दावा किया कि यह आपदा ECL के बकोला इलाके में संबंधित कोलियरी अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई। कई बार चेतावनी देने के बावजूद कोई असरदार कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए तुरंत सुरक्षित पुनर्वास और मुआवजे की मांग की। यही आरोप लगाते हुए गौरांग चटर्जी ने कहा कि ECL द्वारा माइनिंग इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहने के कारण आज आम लोगों को लापता होना पड़ा।

दहशत में लोग

मंगलवार की रात दहशत और अनिश्चितता में बीती। कुछ लोगों ने स्थानीय धर्मशालाओं में शरण ली, जबकि अन्य लोग खुले आसमान के नीचे रह रहे थे। एडमिनिस्ट्रेशन ने बुधवार से प्रभावित लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया है। लेकिन क्या सिर्फ दो या तीन बार खाना खाने से समस्या हल हो जाएगी? रहने वाले सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, बैंक डॉक्यूमेंट और दूसरे जरूरी सरकारी डॉक्यूमेंट घरों के अंदर फंसे हुए हैं। अगर उन्हें नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में उन्हें और बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

(पश्चिम बर्दवान से अनिर्बान की रिपोर्ट)

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