पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई, जब सायोनी घोष का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में वह चुनाव प्रचार के दौरान एक नात गाती हुई नजर आईं, जिसमें "दिल में काबा, आंखों में मदीना" जैसे शब्द शामिल थे। नात-ए-शरीफ इस्लामी परंपरा का अहम हिस्सा है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद की शान में कविताएं और गीत गाए जाते हैं। इन्हें खास तौर पर रबी-उल-अव्वल, रमजान और अन्य धार्मिक मौकों पर अदब के साथ पेश किया जाता है।
'जय श्री राम के नारे से ममता को चिढ़'
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बंगाल को "घुसपैठियों या काबा की धरती" नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह भूमि मां काली और मां दुर्गा की आस्था से जुड़ी है। उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें "जय श्रीराम" के उद्घोष से चिढ़ है और वह हिंदू भावनाओं की अनदेखी करती हैं।
CAA पर समूचे विपक्ष को घेरा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए Citizenship Amendment Act का उद्देश्य पड़ोसी देशों में प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन और अन्य समुदायों को भारत में नागरिकता और सम्मानजनक जीवन देना है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में हजारों परिवारों को नागरिकता और जमीन के अधिकार दिए गए हैं, जबकि टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों ने इस कानून का विरोध किया।
TMC पर "तुष्टिकरण की राजनीति" का आरोप
योगी आदित्यनाथ ने टीएमसी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल में अन्य समुदायों की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां धार्मिक नारों और त्योहारों पर पाबंदियां लगाई जाती हैं और दुर्गापूजा जैसे आयोजनों में बाधाएं खड़ी की जाती हैं। उन्होंने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में भी ऐसी ही स्थिति थी, लेकिन अब "नो कर्फ्यू, नो दंगा" का माहौल है और कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है।
योगी का बंगाल में यूपी मॉडल का जिक्र
सीएम योगी ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के "डबल इंजन सरकार" मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में अब दंगाइयों और माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होती है। उन्होंने दावा किया कि अब सड़क पर नमाज या अव्यवस्था जैसी स्थितियां नहीं बनतीं और कानून का सख्ती से पालन कराया जाता है।
बंगाल के लिए 'अंतिम अवसर' का संदेश
योगी ने कहा कि बंगाल के पास अब "अंतिम अवसर" है और राज्य को "मौलवियों के फतवों" या "घुसपैठियों" की जमीन बनने से रोकना होगा। उन्होंने इसे मां काली, मां दुर्गा और सांस्कृतिक विरासत की भूमि के रूप में स्थापित करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों जैसे कांवड़ यात्रा और दुर्गापूजा को बिना किसी बाधा के आयोजित किया जाता है और यही मॉडल बंगाल में भी लागू किया जा सकता है।