पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। पार्टी के सांसद बगावत पर उतर आए हैं। पहले रिताब्रता बनर्जी ने ूाही 58 नेताओं के समर्थन से विपक्ष के नेता के तौर पर अपना दावा पेश किया और अब एक और सांसद, काकोली घोष, कई समर्थकों के साथ अलग होने के संकेत दे रही हैं। इसके साथ ही TMC की लोकसभा यूनिट एक बड़े मोड़ पर आ गई है। ममता की TMC के एक औऱ मुस्लिम राज्यसभा सांसद नदीमुल हक़ बीजेपी के सम्पर्क में हैं।
काकोली घोष ने कहा, 'सिर कटेगा, झुकेगा नहीं'
बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जिन्होंने पिछले महीने के आखिर में TMC के सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था, उन्होंने कहा कि बागी गुट ने नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) का समर्थन करने का फ़ैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगभग 19 सांसदों का समर्थन हासिल है। दल-बदल विरोधी कार्रवाई से बचने के लिए बागियों को TMC के 28 लोकसभा सदस्यों में से कम से कम 19, यानी पार्टी के कुल सांसदों का 2/3 हिस्से की ज़रूरत है।
ममता बनर्जी को झटके पर झटका
इससे पहले सोमवार को कम से कम 14 सांसदों ने दिल्ली में मुलाकात की और पार्टी से अलग होने पर चर्चा की। यह चर्चा बंगाल के नेता और सीएम शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई। पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद क्षेत्रीय पार्टी के लिए यह एक और बड़ा झटका है।
जहां एक तरफ सोमवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (INDIA) की बैठक में शामिल हो रही थीं। वहीं उससे लगभग तीन किलोमीटर दूर, बागी TMC सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में केंद्रीय मंत्री और बंगाल चुनावों के लिए BJP के ऑब्जर्वर भूपेंद्र यादव के घर पर दो घंटे तक बैठक की। शाम को इस ग्रुप ने बीरभूम से चार बार की सांसद शताब्दी रॉय के घर पर फिर से मुलाकात की थी।
कीर्ति आजाद ने किया ट्वीट
यह फ़र्ज़ी और मनगढ़ंत लिस्ट BJP ने जारी की है।
इनमें से छह लोगों ने साफ़ तौर पर किसी भी दस्तावेज़ या कागज़ पर दस्तख़त करने से इनकार किया है।
ऑपरेशन लोटस नाकाम हो गया है।
अमित शाह नाकाम रहे हैं।
TMC का अलग गुट
NDA का समर्थन करेगा।
सांसद ने क्या कहा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी बागी TMC सांसदों की दोनों बैठकों में मौजूद थे। एक सांसद ने कहा, "पहली बैठक में CM ने तंज कसते हुए कहा कि आप सभी सीनियर सांसद हैं, लेकिन TMC के बड़े नेताओं ने आपके साथ बुरा बर्ताव किया है।" यह घटनाक्रम TMC के सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने के कुछ घंटों बाद हुआ। उन्होंने पार्टी में "बेहिसाब भ्रष्टाचार" और "अराजक शासन" का आरोप लगाया था।