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ममता बनर्जी के घर तक पहुंच गई CID की टीम, अभिषेक बनर्जी से जुड़े केस में बड़ा एक्शन

पश्चिम बंगाल में कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच तेज हो गई है। CID ने ममता बनर्जी के आवास से जुड़े TMC कार्यालय और अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की। कई विधायकों ने हस्ताक्षरों पर सवाल उठाए हैं। मामले में SIT जांच कर रही है और रिकॉर्ड की पड़ताल जारी है।

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Image Source : INDIA TV ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की एक के बाद एक मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी से जुड़े कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच तेज हो गई है। सोमवार को राज्य की CID की टीम तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित घर के कंपाउंड में पहुंची। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, CID अधिकारी ममता बनर्जी के घर के परिसर के अंदर पहुंचे और जांच की। ममता बनर्जी इस समय नई दिल्ली में हैं, जहां उन्होंने रविवार को I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लिया था।

ममता बनर्जी के आवास से सटे TMC कार्यालय में जांच

सीआईडी की एक बड़ी टीम ममता बनर्जी के आवास से सटे टीएमसी के पार्टी कार्यालय, 30बी हरीश चटर्जी स्ट्रीट, पहुंची। अधिकारियों ने वहां दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुरू की। इसी मामले में सीआईडी की एक अन्य टीम कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय भी पहुंची। मामला TMC विधायकों के कथित हस्ताक्षर जालसाजी से जुड़ा है। इस मामले की जांच के लिए राज्य CID ने 5 सदस्यीय SIT का गठन किया है। जांच की निगरानी पश्चिम बंगाल पुलिस के एक DIG स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।

विधायकों ने हस्ताक्षर करने की बात से किया इनकार

CID ने अब तक 13 TMC विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। जांच के दौरान 3 विधायकों ने दावा किया कि 6 मई की बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर (मीटिंग रेजोल्यूशन बुक) में मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। वहीं कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के एक विधायक ने कहा कि वह 6 मई को कोलकाता में आयोजित उस बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे। जांच के तहत CID ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी के मूल प्रस्ताव दस्तावेज और मीटिंग रेजोल्यूशन बुक पेश करने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने अपने कानूनी सलाहकार के माध्यम से एजेंसी को एक औपचारिक पत्र भेजकर जवाब दिया है।

6 मई की बैठक में 70 विधायकों के होने का दावा

दरअसल, 9 मई को अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया था कि तृणमूल कांग्रेस की विधायक दल की बैठक में पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 18 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी को पत्र लिखकर बैठक की कार्यवाही, प्रस्ताव की प्रति और बैठक में मौजूद विधायकों के हस्ताक्षर उपलब्ध कराने को कहा था। 20 मई को अभिषेक बनर्जी ने मीटिंग रेजोल्यूशन बुक की एक प्रति जमा कराई, जिसमें उपस्थिति से जुड़ा रिकॉर्ड भी शामिल था। इसमें दावा किया गया था कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे।

2 विधायकों की शिकायत के बाद बढ़ गया विवाद

27 मई को  TMC के 2 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की कि 6 मई की बैठक में विपक्ष के नेता (LoP) के चयन को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने बैठक रजिस्टर पर हस्ताक्षर 19 मई को किए थे, न कि 6 मई को। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 6 मई का प्रस्ताव बाद में तैयार किया गया और उसमें कई हस्ताक्षर संदिग्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि कम से कम 14 हस्ताक्षर कैपिटल लेटर्स में किए गए हैं, जिससे दस्तावेज की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। इन आरोपों के बाद TMC ने दोनों विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया।

पुलिस केस के बाद CID ने संभाली जांच

विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के आधार पर 27 मई को हेयर स्ट्रीट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया था। अगले ही दिन यानी 28 मई को इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई। अब CID दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों की जांच, बैठक के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों व नेताओं की भूमिका की पड़ताल कर रही है। सोमवार को ममता बनर्जी के आवास से जुड़े TMC कार्यालय और अभिषेक बनर्जी के कार्यालय में पहुंची जांच टीम को इसी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।