पश्चिम बंगाल के मालदा (पांडुआ) स्थित 650 साल पुरानी अदीना मस्जिद को 'आदिनाथ शिव मंदिर' बताए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई है। राज्य सभा के सदस्य और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्जी ने द्वारा संसद में मुद्दा उठाने के बाद हिंदू संगठनों ने मंदिर वापसी की मांग तेज कर दी है। इस मांग को लेकर तनाव और बढ़ गया है। 'हिंदू सुरक्षा समिति' नाम के संगठन ने सावन महीने के सोमवार के दिन विवादित मस्जिद से कुछ दूरी पर भगवान शिव के रुद्राभिषेक और विशेष पूजा का आह्वान किया है। इसके बाद से ही पूरे इलाके में संवेदनशीलता बढ़ गई है।
राज्यसभा में उठा था मुद्दा
हाल ही में पश्चिम बंगाल से राज्य सभा के सदस्य और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्जी ने राज्य सभा में ये बात को सामने लाया था। इसके बाद इस मामले पर हिंदू संगठन और भी जोरो से मंदिर वापस करने का मांग कर रहे हैं।
छावनी में बदला इलाका, 300 पुलिसकर्मी और ड्रोन तैनात
हिंदू सुरक्षा समिति नाम के एक संगठन ने आज मस्जिद के बाहर शिव पूजा का आह्वान किया है। लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए पूरे इलाके में पुलिस पेट्रोलिंग कर रही है। मालदा जिले के SP अनुपम सिंह ने कहा कि सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। 300 पुलिस वाले तैनात किए गए हैं। सेंट्रल फोर्स भी तैनात की गई हैं। ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। यह पूरा विवाद फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिया है।
संरचना में मौजूद गणेश जी की मूर्ति और शिवलिंग
हिंदू संगठन का मानना है बंगाल सल्तनत के दौरान 1364 और 1374 ई। के बीच निर्मित, इस मस्जिद को बंगाल में टेराकोटा सजावट वाली पहली इस्लामी संरचना माना जाता है। मुख्य रूप से जली हुई मिट्टी की ईंटों से निर्मित, जिसमें चूना और ईंट की धूल मिश्रित मोर्टार है, मस्जिद मध्य एशियाई स्थापत्य विशेषताओं को स्थानीय कलात्मक परंपराओं के साथ जोड़ती है। सजावट में गुलाब की पंखुड़ियां, ज्यामितीय डिजाइन, लटकते लैंप और बांसुरी के रूपांकन शामिल हैं। इसके अलावा, पाल-सेना काल के तत्व हैं जैसे चैत्य खिड़कियां, जंजीरों की पंक्तियाँ, मंदिर की घंटी के डिजाइन और कमल की पंखुड़ियां। इसके अलावा गणेश जी की मूर्ति, शिवलिंग भी है।
ASI संरक्षित स्थल और 1991 का कानून
बता दें कि अदीना मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित एक मस्जिद है। 1991 के 'प्लेसेज ऑफ़ वर्शिप एक्ट' के तहत किसी भी धार्मिक स्थल के धार्मिक स्वरूप (कैरेक्टर) में बदलाव नहीं किया जा सकता।
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