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पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच PM मोदी पर सीधा हमला कांग्रेस को पड़ेगा भारी! जानिए कब-कब उलटा साबित हुआ ये दांव

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर सीधा हमला बोला है। इस खबर में जानिए कि प्रधानमंत्री पर आक्रामक अटैक करना कांग्रेस को कब-कब भारी पड़ा है।

Mallikarjun Kharge Controversial Statement Row: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना आतंकवादी से कर दी थी, जिसके बाद बीजेपी ने इसे देश का अपमान बताया तो वहीं कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया। अब उनके इस बयान पर बवाल शुरू हो गया है। भारतीय राजनीति में चुनावी विमर्श अक्सर नीतियों, विकास और शासन के मुद्दों पर केंद्रित होने की उम्मीद की जाती है, लेकिन वास्तविकता में व्यक्तिगत टिप्पणियां और तीखे बयान भी बड़ा असर डालते हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार ऐसे हमले अपने लक्ष्य को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे और मजबूत कर देते हैं। पिछले दो दशकों में BJP, खासकर Narendra Modi के नेतृत्व में, इस तरह की परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने की रणनीति में काफी सफल रही है।

2007: “मौत का सौदागर” और गुजरात की राजनीति

साल 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में Sonia Gandhi ने नरेंद्र मोदी को “मौत का सौदागर” कहा। यह बयान 2002 Gujarat riots के संदर्भ में दिया गया था। BJP ने इस टिप्पणी को तुरंत एक बड़े नैरेटिव में बदल दिया। इसे केवल मोदी पर हमला नहीं, बल्कि पूरे गुजरात के सम्मान पर चोट बताया गया। नतीजा यह हुआ कि BJP ने चुनाव में आसान जीत दर्ज की। यह पहला बड़ा उदाहरण था जब व्यक्तिगत आलोचना को “अपमान बनाम गौरव” की राजनीति में बदला गया।

2014: “चायवाला” से जननेता तक

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले Mani Shankar Aiyar और अन्य विपक्षी नेताओं ने मोदी को “चायवाला” बोलकर उनके अतीत पर तंज कसा था। BJP ने इसे तुरंत “साधारण बनाम अभिजात्य” संघर्ष के रूप में पेश किया। मोदी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया जो आम जनता से आया है और दिल्ली के सत्ता प्रतिष्ठान से अलग है। पीएम मोदी ने खुद इस तंज को हाथों-हाथ लिया और खुद को चायवाला बताया। इस नैरेटिव ने व्यापक जनसमर्थन जुटाया और BJP ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया।

2017: “नीच आदमी” पर फिर फंसी कांग्रेस

गुजरात चुनाव 2017 में फिर Mani Shankar Aiyar की “नीच आदमी” टिप्पणी सामने आई। BJP ने इसे केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि गरीब और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों का अपमान बताया। इसने चुनावी माहौल में वर्गीय विभाजन को और स्पष्ट किया और BJP ने एक बार फिर गुजरात राज्य में सत्ता बनाए रखी।

2019: “चौकीदार चोर है” बनाम “मैं भी चौकीदार”

2019 के आम चुनाव में Rahul Gandhi ने “चौकीदार चोर है” का नारा दिया, जो सीधे भ्रष्टाचार के आरोपों पर आधारित था। BJP ने इस हमले की नकारात्मकता में फंसने देने के बजाय उसे पलट दिया। “मैं भी चौकीदार” अभियान के जरिए इसे एक सामूहिक पहचान में बदल दिया गया, जिसमें लाखों लोगों ने खुद को “चौकीदार” के रूप में जोड़ा। इस रणनीति ने विपक्ष के आरोपों को कमजोर कर दिया और BJP ने अबतक की सबसे बड़ी जीत इस लोकसभा चुनाव में हासिल की।

2023: “पनौती” और भावनात्मक प्रतिक्रिया

2023 में Rahul Gandhi द्वारा “पनौती” शब्द के इस्तेमाल को BJP ने असंवेदनशील और अपमानजनक बताकर व्यापक रूप से प्रचारित किया। इसे नेतृत्व के प्रति अनादर के रूप में पेश किया गया, जिससे समर्थकों में भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई। इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में BJP ने मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में जीत दर्ज की।

2024: “परिवार” पर टिप्पणी और नया नैरेटिव

2024 के आम चुनाव में Lalu Prasad Yadav ने नरेंद्र मोदी के परिवार न होने पर टिप्पणी की। इस बार भी BJP ने इसे अपने पक्ष में मोड़ा। मोदी ने जवाब दिया कि “140 करोड़ देशवासी ही मेरा परिवार हैं,” और “मोदी का परिवार” अभियान शुरू हुआ। यह एक भावनात्मक और व्यापक पहचान का निर्माण था, जिसने मतदाताओं के साथ जुड़ाव को और मजबूत किया। चुनाव में BJP और उसके सहयोगियों ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई।

इन सभी घटनाओं से एक स्पष्ट पैटर्न सामने आता है। BJP ने बार-बार यह दिखाया है कि पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले हुए तो वो इसे बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदलने में सक्षम रही है।