शिक्षक दिवस पर पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के भेदिया उच्च विद्यालय के शिक्षकों ने मानवता और गुरु-शिष्य के रिश्ते की एक मिसाल पेश की। जन्म से दोनों आंखों की रोशनी से वंचित आठवीं कक्षा के छात्र रामकृष्ण टुडू की आंखों में जटिल ऑपरेशन के बाद रोशनी लौट आई। इस पूरी पहल में विद्यालय के शिक्षकों के साथ प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जानिए क्या है पूरा मामला।
जन्म से ही नहीं देख पाता था छात्र
आउशग्राम-1 ब्लॉक की उक्ता पंचायत के सुंदरपुर गांव निवासी रामकृष्ण टुडू जन्म से ही दोनों आंखों से देख नहीं पाता था। बेटे की आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए उसके पिता गोपाल टुडू पिछले 13 वर्षों से लगातार इलाज करा रहे थे। इस दौरान उन्होंने लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। रामकृष्ण के भेदिया उच्च विद्यालय में दाखिला लेने के बाद शिक्षकों को उसकी समस्या के बारे में पता चला। करीब एक वर्ष तक विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने स्तर पर यह प्रयास करते रहे कि किस तरह छात्र का इलाज कराकर उसकी आंखों की रोशनी वापस लाई जा सके।
इलाज में 1.50 लाख रुपये का आया खर्च
इसके बाद विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने पहल की। कोलकाता के एक निजी नर्सिंग होम में रामकृष्ण के इलाज की व्यवस्था की गई। पिछले सोमवार को उसकी आंख में जटिल सर्जरी की गई। इलाज में करीब 1 लाख 50 हजार रुपये का खर्च आया, जिसे प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने अपनी बचत की राशि से वहन किया। ऑपरेशन के बाद फिलहाल रामकृष्ण एक आंख से देख पा रहा है। लंबे समय के अंधेरे के बाद आंखों में रोशनी लौटने से छात्र के साथ उसका परिवार और विद्यालय के शिक्षक भी बेहद खुश हैं।
शिक्षक दिवस पर छात्र के पिता हुए भावुक
शनिवार को भेदिया उच्च विद्यालय में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में रामकृष्ण के पिता गोपाल टुडू भी मौजूद थे। इस दौरान विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने उन्हें मंच पर सम्मानित किया। अपने बेटे की आंखों की रोशनी लौटाने में शिक्षक की भूमिका का जिक्र करते हुए गोपाल टुडू भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने शिक्षक के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त किया।
गोपाल टुडू ने कहा कि लंबे समय तक बेटे के इलाज के लिए प्रयास करने के बावजूद जब कोई रास्ता नहीं मिल रहा था, तब विद्यालय के शिक्षक उनके साथ खड़े हुए। प्रधान शिक्षक ने अपनी बचत की राशि खर्च कर बेटे के इलाज की व्यवस्था की, जिसके लिए वह हमेशा उनके आभारी रहेंगे।
इस नेक काम की जमकर हो रही सराहना
प्रधान शिक्षक और विद्यालय के शिक्षकों की इस मानवीय पहल की खबर सामने आने के बाद इलाके के लोगों ने जमकर सराहना की। विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने शिक्षकों के इस प्रयास को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। शिक्षक दिवस पर सामने आई यह घटना साबित करती है कि शिक्षक की भूमिका केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह अपने विद्यार्थियों के जीवन में उम्मीद की रोशनी भी जगा सकता है।
(रिपोर्ट- बिज्जू मंडल)
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