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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: मानिकतला सीट पर BJP, टीएमसी, सीपीआई और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच कांटे की टक्कर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मानिकतला सीट पर चार कैंडिडेट्स के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। पिछले 2 चुनावों में यहां से टीएमसी को जीत मिली है।

Maniktala- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मानिकतला सीट

मानिकतला: कोलकाता के विधानसभा चुनाव में मानिकतला सीट पर 4 कैंडिडेट्स के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। यहां मुख्य मुकाबला तापस रॉय (बीजेपी) बनाम श्रेया पांडे (टीएमसी) बनाम मौसमी घोष (सीपीआई) बनाम सुगातो रॉय चौधरी (कांग्रेस) हो सकता है। 

बता दें कि मानिकतला सीट साल 1951 में बनी थी और तब से इस सीट पर 18 विधानसभा चुनाव और 2024 में उपचुनाव हुए हैं। इस सीट पर लेफ्ट पार्टियों ने 12 बार जीत हासिल की है, ऐसे में इस सीट पर लेफ्ट पार्टियों का दबदबा माना जाता है। यहां सीपीआई ने 10 बार और CPI(M) ने दो बार जीत दर्ज की है।

हालांकि साल 2011 से लगातार चार बार समेत कुल पांच बार यहां से तृणमूल कांग्रेस जीती है। दरअसल टीएमसी ने सबसे पहली बार यहां जीत साल 2001 में हासिल की थी। 

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था?

साल 2021 के चुनाव में यहां से तृणमूल कांग्रेस के साधन पांडे ने जीत हासिल की थी। उन्हें 67,577 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर बीजेपी के कल्याण चौबे रहे थे। उन्हें 47,339 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर CPI(M) की रूपा बागची रही थीं। उन्हें 13,513 वोट मिले थे। 

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था?

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भी यहां से तृणमूल कांग्रेस के साधन पांडे ने जीत हासिल की थी। उन्हें 73,157 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर CPI(M) के राजीब मजूमदार रहे थे। उन्हें 47,846 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बीजेपी के सुनील रॉय रहे थे। उन्हें 18,149 वोट मिले थे।

पश्चिम बंगाल में चुनाव कब है?

पश्चिम बंगाल में 2 चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को वोटिंग होगी और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। नतीजे 4 मई को आएंगे। बता दें कि पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा। यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस समेत सीपीआई के बीच हो सकता है। जहां एक तरफ बीजेपी के लिए ये पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन की तलाश पूरी करने का मौका होगा, वहीं टीएमसी के लिए ये अपनी सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती होगी।