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'कोलकाता नगर निगम के बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए?' मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद सरकार ने पूछा

पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता नगर निगम से पूछा है कि उसके बोर्ड को क्यों न भंग किया जाए, खासकर मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद प्रशासनिक अनिश्चितता के चलते। नोटिस में जवाब मांगा गया है, जबकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मेयर के इस्तीफे से बोर्ड भंग नहीं हो सकता।

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Image Source : PTI इस्तीफा देने के बाद नगर निगम की बिल्डिंग से बाहर निकलते फिरहाद हकीम।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच राज्य सरकार ने कोलकाता नगर निगम से यह साफ करने को कहा है कि उसके बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। यह कदम उस समय उठाया गया है जब तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद नगर प्रशासन में अनिश्चितता बढ़ गई है। शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग ने कोलकाता नगर निगम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत भेजा गया है। इसमें निगम को 3 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

'मैं सिर्फ कुर्सी पर बैठकर उसे अपमानित नहीं करना चाहता'

सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह जांचना जरूरी है कि क्या नगर निगम अब भी अपने संवैधानिक और कानूनी दायित्वों को ठीक से निभाने में सक्षम है या नहीं। नोटिस की प्रतियां नगर आयुक्त, नगर सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई हैं। यह कार्रवाई पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के शुक्रवार को इस्तीफे के 24 घंटे से भी कम समय बाद हुई है। अपने इस्तीफे में हकीम ने कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में वे प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रहे थे और केवल पद पर बने रहना उनके लिए उचित नहीं था। उन्होंने कहा, 'मैं सम्मान और अधिकार के साथ काम करता आया हूं, लेकिन अब यह संभव नहीं है। मैं सिर्फ कुर्सी पर बैठकर उसे अपमानित नहीं करना चाहता।'

'मेयर के इस्तीफे के आधार पर बोर्ड को भंग नहीं कर सकते'

सरकारी नोटिस में कहा गया है कि यदि नगर निगम अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है, लगातार जिम्मेदारियों का पालन नहीं करता या अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है, तो सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार है। इस संदर्भ में पश्चिम बंगाल नगर निगम अधिनियम की धारा 117 का हवाला दिया गया है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि केवल मेयर के इस्तीफे के आधार पर बोर्ड को भंग नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व कोलकाता मेयर बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार नगर निगम से उसकी कार्यप्रणाली पर जवाब मांग सकती है, लेकिन केवल इस्तीफे के कारण निर्वाचित बोर्ड को भंग करने का अधिकार सीमित है।

'शहर के नागरिकों को आवश्यक सेवाएं देना हो प्राथमिकता'

वहीं तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नगरपालिका बोर्ड अध्यक्ष सच्चिदानंद बंद्योपाध्याय ने कहा कि पहले भी ऐसे हालात में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि नागरिकों को आवश्यक सेवाएं लगातार मिलती रहें। कानून के अनुसार, यदि नगर निगम भंग किया जाता है तो मेयर, पार्षद और मेयर-इन-काउंसिल के सभी पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे और प्रशासन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों के हाथ में चला जाएगा।

ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में शामिल हैं फिरहाद हकीम

फिरहाद हकीम का इस्तीफा टीएमसी के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में से एक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं। उनका इस्तीफा पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल का संकेत माना जा रहा है। पार्टी और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में नगर निकायों में अस्थिरता बढ़ी है। कई पार्षदों ने इस्तीफा दिया है या सक्रिय भूमिका से दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि राज्य भर में करीब 100 टीएमसी पार्षद या तो इस्तीफा दे चुके हैं या सक्रिय राजनीति से पीछे हट गए हैं।