पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से शिक्षक दिवस के जश्न के दौरान एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां झांटीपहाड़ी इलाके में ट्यूशन टीचर जगदीश दंडपाठ के घर पर छात्र शिक्षक दिवस मना रहे थे। कार्यक्रम के दौरान छात्र स्नो स्प्रे और सेलिब्रेशन ब्लास्टर चलाकर उत्साह मना रहे थे। इसी दौरान एक छात्र ने शिक्षक के सिर पर स्नो स्प्रे कर दिया। आरोप है कि इस बात से नाराज होकर शिक्षक ने अपना आपा खो दिया और छात्र को पकड़कर उसकी जमकर पिटाई कर दी। घटना का वीडियो किसी छात्र ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, पुलिस ने कराया समझौता
वीडियो सामने आते ही छात्रों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश फैल गया। विरोध जताने के लिए बड़ी संख्या में लोग और छात्र शिक्षक के घर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए झांटीपहाड़ी फांड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बाद में फांड़ी में शिक्षक, छात्रों और अभिभावकों के साथ बैठक की गई। बातचीत के जरिए मामले का समाधान कर लिया गया है और फिलहाल किसी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हालांकि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और शिक्षक और छात्र के व्यवहार को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
गुरु-शिष्य के रिश्ते की अनूठी मिसाल
शिक्षक दिवस पर पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के भेदिया उच्च विद्यालय के शिक्षकों ने मानवता और गुरु-शिष्य के रिश्ते की एक मिसाल पेश की। जन्म से दोनों आंखों की रोशनी से वंचित आठवीं कक्षा के छात्र रामकृष्ण टुडू की आंखों में जटिल ऑपरेशन के बाद रोशनी लौट आई। इस पूरी पहल में विद्यालय के शिक्षकों के साथ प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जानिए क्या है पूरा मामला।
शिक्षक दिवस के मौके पर जहां गुरु-शिष्य की इस तरह की घटना वाली खबर सामने आई है। वहीं दूसरी तरफ बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के भेदिया उच्च विद्यालय के शिक्षकों ने मानवता और गुरु-शिष्य के रिश्ते की एक मिसाल पेश की है। आठवीं कक्षा का छात्र रामकृष्ण टुडू जन्म से ही दोनों आंखों से देख नहीं पाता था। 13 वर्षों से लगातार इलाज और लाखों रुपये खर्च के बाद भी सफलता नहीं मिली।
रामकृष्ण के भेदिया उच्च विद्यालय में दाखिला लेने के बाद शिक्षकों को उसकी समस्या के बारे में पता चला। तब करीब एक वर्ष तक विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपने स्तर पर प्रयास करते रहे कि किसी तरह छात्र का इलाज कराकर उसकी आंखों की रोशनी वापस लाई जा सके।
फिर विद्यालय के प्रभारी प्रधान शिक्षक नवकुमार घोष ने कोलकाता के एक निजी नर्सिंग होम में रामकृष्ण के इलाज का इंतजाम किया।ऑपरेशन के बाद फिलहाल रामकृष्ण एक आंख से देख पा रहा है। लंबे समय के अंधेरे के बाद आंखों में रोशनी लौटने से छात्र के साथ उसका परिवार और विद्यालय के शिक्षक भी बेहद खुश हैं। प्रधान शिक्षक और विद्यालय के शिक्षकों की इस मानवीय पहल की खबर सामने आने के बाद इलाके के लोगों ने जमकर सराहना की।
(रिपोर्ट-अमिताभ दास)
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