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पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कार्रवाई, दो बैच की छात्राएं हॉस्टल से निष्कासित, जूनियर बैच पर भी गिरी गाज

पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है. 2023 और 2024 बैच की छात्राओं को अगले आदेश तक हॉस्टल से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया और 2025 बैच की छात्राओं को तीन महीने के लिए कक्षाओं से निष्कासित किया गया

पटना नालंदा मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामला- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV पटना नालंदा मेडिकल कॉलेज रैगिंग मामला

बिहार की राजधानी पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से जुड़ी शिकायतों के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इस मामले की शिकायत में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग(NMC), एंटी रैगिंग सेल और बिहार के लोक शिकायत अधिकारी से की गई है। शिकायत के बाद कॉलेज के प्राचार्य से जवाब मांगा गया है। साथ ही, रैगिंग से संबंधित शिकायतों की जांच, छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संस्थान को रैगिंग मुक्त बनाए रखने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं।

छात्राओं की सुरक्षा को लेकर हुई चर्चा

जानकारी के अनुसार, कॉलेज में एंटी रैगिंग सेल कमेटी की बैठक 26 अक्टूबर को प्राचार्य डॉक्टर उषा कुमारी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में रैगिंग से जुड़ी शिकायतों की जांच, छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल में अनुशासन बनाए रखने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कमेटी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और संबंधित विभागों को सतर्क रहने का निर्देश दिया।

हॉस्टल से किया गया निष्कासित

कमेटी के निर्णय के अनुसार, वर्ष 2023 और 2024 बैच की छात्राएं, जो कॉलेज परिसर स्थित छात्रावास में रह रही हैं, उन्हें अगले आदेश तक हॉस्टल से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, वर्ष 2025 बैच की सभी छात्राओं को तीन महीने के लिए कक्षाओं से निष्कासित करने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही 2025 बैच की छात्राओं को 24 घंटे के भीतर छात्रावास खाली कर अपने-अपने निवास स्थान पर रहने का निर्देश दिया गया है।

हॉस्टल वार्डन को सतर्क रहने का निर्देश

बैठक में वर्ष 2026 बैच की सभी छात्र-छात्राओं से रैगिंग नहीं करने संबंधी स्वघोषणा पत्र भी प्राप्त किया गया। इसके अलावा हॉस्टल वार्डन को छात्रावास की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।

छात्राओं की निगरानी के लिए कई शिक्षकों को सौंपी गई जिम्मेदारी

छात्राओं की निगरानी के लिए विभिन्न विभागों के शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पैथोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ.  सुनील कुमार, छात्रावास के वार्डन और पीआरएसएम विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमित सिन्हा के साथ माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. संजय कुमार को हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया गया है। प्राचार्य डॉ. उषा कुमारी ने स्पष्ट किया कि एनएमसी की रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति लागू है।

संस्थान को रैगिंग मुक्त बनाए रखने के लिए यह नीति जारी रहेगी। रैगिंग की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई करने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने का फैसला किया है। हालांकि, मामले में शिकायतों की प्रकृति, जांच के अंतिम निष्कर्ष और संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पटना से बिट्टू कुमार की रिपोर्ट

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