पटनाः मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने वैश्विक संकट को देखते हुए बड़े प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण संबंधी फैसले लिए हैं। सरकारी आदेश के अनुसार अगले 6 महीने तक सरकारी खर्च पर किसी भी पदाधिकारी की विदेश यात्रा पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। सभी विभागों में आवश्यक बैठकों को अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही आयोजित करने का निर्देश दिया गया है ताकि अनावश्यक यात्राओं को रोका जा सके।
सरकारी स्तर पर कारपूलिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया है। ऊर्जा बचत सुनिश्चित करने के लिए हर विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो बिजली, एसी और अन्य संसाधनों के दुरुपयोग पर निगरानी रखेगा।
अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए प्रोत्साहित करेगी सरकार
वहीं, बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि बिहार में सरकारी कर्मियों को अब हर 3 महीने में पर्यटन और भ्रमण करना होगा। अब 2 दिन सपरिवार पर्यटन स्थल पर अधिकारी रहेंगे। शुक्रवार-शनिवार को अधिकारियों का प्रवास होगा। सभी को तीन पर्यटक स्थलों का भ्रमण करना होगा। सरकार का यह फैसला पर्यटन बढ़ाने के लिए लिया गया है। प्रवास अवधि को ड्यूटी माना जाएगा। भ्रमण के बाद फोटो और रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपनी होगी। सरकारी दौरे में समीक्षा बैठक और निरीक्षण पर रोक रहेगी।
अधिकारियों को अपने परिवारों के साथ राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर जाने और शुक्रवार और शनिवार को वहां रात बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इन अधिकारियों से कहा जाएगा कि वे बिहार के भीतर किसी भी पर्यटन स्थल को चुनें और हर तीन महीने में एक बार अपने परिवार के साथ उस जगह पर जाएं। TA/DA राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा, जबकि अतिरिक्त खर्च (परिवार के सदस्यों/रिश्तेदारों का) संबंधित अधिकारी खुद उठाएगा।
इससे तीन मकसद होंगे पूरे
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस कदम को 'वोकल फॉर लोकल' की तर्ज पर 'लोकल फॉर वोकल' कहा है और वे घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ फिजूलखर्ची में भी कटौती करना चाहते हैं। इससे तीन मकसद पूरे होंगे। पहला, वे पर्यटन स्थल जो सालों से अनदेखे रहे हैं, उन्हें पर्यटन के नक्शे पर लाया जाएगा और इससे घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दूसरा, इन अधिकारियों को सोशल मीडिया पर तस्वीरें और टिप्पणियां अपलोड करनी होंगी। यदि किसी सुविधा की कमी है, तो राज्य सरकार उस कमी को दूर करेगी। तीसरा, बिहार के लोग इन अधिकारियों से प्रेरित होकर अपने ही राज्य में यात्रा करेंगे और अपना पैसा यहीं खर्च करेंगे, जिसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा और यदि स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, तो इससे कई लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। राज्य सरकार जल्द ही नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर सकती है, ताकि वे होमस्टे और इको-टूरिज्म की योजना बनाने और उसे बढ़ावा देने में मदद कर सकें।