मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है। मुजफ्फरपुर में CO महेंद्र कुमार शुक्ला को निलंबित कर दिया गया है। भू-माफियाओं से सांठ-गांठ और घोर लापरवाही को लेकर उन पर गाज गिरी है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रशासनिक लापरवाही, कर्तव्यों में घोर अनियमितता और भू-माफियाओं के साथ सांठ-गांठ के गंभीर आरोपों में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी अंचल में पदस्थापित अंचल अधिकारी (सीओ) महेंद्र कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह सख्त दंडात्मक कार्रवाई मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस संबंध में विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है।
140 दिनों तक लंबित रखे नामांतरण आवेदन
जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में सीओ पर लगाए गए कई गंभीर आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। जांच के अनुसार, सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला ने नामांतरण (म्यूटेशन) के आवेदनों को बिना किसी ठोस कारण के करीब 140 दिनों तक जानबूझकर लंबित रखा। सबसे चौंकाने वाला मामला दाखिल-खारिज वाद संख्या-5451/2024-2025 में सामने आया, जहां एक मृत महिला मालती देवी के नाम से फर्जी आपत्ति स्वीकार की गई और दस्तावेजों में हेरफेर कर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया।
इसके अलावा, आरटीआई के तहत समय पर जानकारी न देने, विभागीय जांच में सहयोग न करने और नियमित राजस्व रिपोर्ट न भेजने के आरोप भी सिद्ध हुए हैं।
विशेष शाखा की रिपोर्ट से खुला भू-माफिया कनेक्शन
आदेश पत्र के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक (विशेष शाखा) की रिपोर्ट के आधार पर हुई जांच में यह खुलासा हुआ कि सीओ फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के जरिए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करते थे। वह भू-माफियाओं से मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे थे।
साथ ही, 'परिमार्जन प्लस', 'ऑनलाइन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र', 'अभियान बसेरा-2' और 'आधार सीडिंग' जैसी सरकार की प्राथमिकता वाली जनहितकारी योजनाओं में भी उनकी ओर से भारी शिथिलता बरती गई।
निलंबन अवधि में सारण प्रमंडल रहेगा मुख्यालय
राज्य सरकार ने मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9(1) के तहत यह कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के दौरान महेंद्र कुमार शुक्ला का मुख्यालय प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, सारण प्रमंडल (छपरा) तय किया गया है। इस दौरान उन्हें केवल जीवन-निर्वाह भत्ता ही मिलेगा।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप, पुराने मामलों की भी होगी जांच
सीओ के निलंबन और भू-माफिया सिंडिकेट के खुलासे के बाद जिले के राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी की रिपोर्ट से साफ संदेश दिया गया है कि भ्रष्टाचार और जनहित के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। पुलिस और प्रशासन अब उनके कार्यकाल के दौरान निष्पादित किए गए अन्य संदिग्ध दाखिल-खारिज मामलों की भी गहराई से पड़ताल करने में जुट गया है। डीएम की जांच रिपोर्ट और विशेष शाखा के रिपोर्ट के आधार पर हुई इस कार्रवाई से मुसहरी अंचल समेत जिले के राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है अब उनके कार्यकाल में हुए संदिग्ध दाखिल खारिज और भूमि संबंधी मामले के भी जांच की संभावना बढ़ गई है।
इससे पहले एक खबर ये भी सामने आई थी कि कटिहार में सरकारी दफ्तर अखाड़ा बना, सीओ और प्रधान लिपिक आपस में भिड़े, CCTV में दंगल कैद हुआ। (रिपोर्ट- संजीव कुमार)
ये भी पढ़ें-
उधर कहां भाग रहे हैं सीओ साहब, इधर आइए, बेगूसराय में बाढ़ पीड़ितों की आपबीती सुन भड़के पूर्व मंत्री सुरेंद्र मेहता