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निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों का पारिश्रमिक किया दोगुना, जानें अब कितना मिलेगा

निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना कर दिया है। पिछली बार ऐसा संशोधन वर्ष 2015 में किया गया था।

निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना किया- India TV Hindi
Image Source : PTI (FILE) निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना किया

बिहार में इस साल के आखिर तक विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बीच निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अधिकारियों का पारिश्रमिक दोगुना कर दिया है। BLO पर्यवेक्षकों के पारिश्रमिक में वृ‌द्धि की गई है। साथ ही आयोग ने EROs और AEROs को मानदेय देने का भी फैसला किया। बता दें कि पिछली बार ऐसा संशोधन वर्ष 2015 में किया गया था। इसके अलावा, आयोग ने बिहार से शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए BLOs हेतु 6,000 रुपये के विशेष प्रोत्साहन को भी मंजूरी दी थी। 

पदनाम 2015 से विद्यमान अब संशोधित
बूथ लेवल अधिकारी 6000 रुपये 12000 रुपये
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए बीएलओ को प्रोत्साहन राशि 1000 रुपये 2000 रुपये
बीएलओ पर्यवेक्षक 12000 रुपये 1800 रुपये
AERO शून्य 25000 रुपये
ERO शून्य 30000 रुपये

पीडीएफ

बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग द्वारा इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 243 सीटों के लिए ड्रॉफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। चुनाव आयोग द्वारा हर जिले का भी आंकड़ा जारी किया जा चुका है। किस जिले में पहले कितने वोटर थे और कितने मतदाता हैं, इसकी लिस्ट भी जारी की गई है। SIR के बाद चुनाव आयोग का कहना है कि पूर्वी चंपारण, मधुबनी और गोपालगंज के 3 लाख मतदाताओं को बिहार मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है।

इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, पटना के 14 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में निर्वाचकों की संख्या 46 लाख 51 हजार 694 है। इसके पहले निर्वाचन लिस्ट में 50 लाख 47 हजार 194 वोटर थे। निर्वाचकों में से 92.16% वोटर्स का नाम यानी 46, 51,694 निर्वाचकों का नाम मतदाता सूची में आ गया है। बचे हुए 3,95,500 मतदाता अलग-अलग कारण मृत्यु, अनुपस्थित या स्थाई रूप से स्थानांतरण के कारण सूची में शामिल नहीं किया गया है।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिपोर्ट?

इलक्शन कमीशन ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन करने का निर्णय किया है। इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में शामिल सभी लोगों का वेरिफिकेशन किया जाता है। इससे मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों को कम करने में मदद मिलती है। जिन लोगों का निधन हो चुका है या जो लोग स्थायी तौर पर किसी दूसरी जगह पलायन कर चुके हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से हट जाते हैं।