मुजफ्फरपुर: ब्रह्मपुरा के प्रसाद हॉस्पिटल में आग, 5 मरीजों की मौत, CM सम्राट चौधरी ने मुआवजे का ऐलान किया
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा में प्रसाद हॉस्पिटल में आग लगने से कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। आग तड़के 3.40 बजे लगी। इस दौरान ICU में धुआं भरने से 5 लोगों की मौत हो गई।

बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रसाद अस्पताल में गुरुवार तड़के 3.40 बजे आग लग गई। इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई। कई अन्य मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दमकल की 12 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि आईसीयू में अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज हुई और वहां रखे वेंटिलेटर उपकरणों में आग लग गई। देखते ही देखते पूरे आईसीयू वार्ड में घना काला धुआं भर गया। घटना के समय आईसीयू में 15 से अधिक गंभीर मरीज भर्ती थे, जो पिछले करीब एक हफ्ते से वहां उपचाराधीन थे। धुआं भर जाने के कारण वेंटिलेटर पर मौजूद मरीज और उनके परिजन तड़पने और चिल्लाने लगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है। बिहार सीएम ने एक्स पर लिखा, "मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है। शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें। मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है तथा घायलों के उपचार हेतु सदर अस्पतालों में समुचित व्यवस्था की गई है।"
घटना की जानकारी मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आईसीयू वार्ड में आग लगी थी। यह वार्ड अस्पताल की पांचवे मंजिल पर है। मृतकों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल बना हुआ है। एसएसपी, डीएम समेत कई अधिकारी मौके पहुंचे। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में जानकारी ली और अस्पताल में मरीज के परिजनों से बात की।
कर्मचारियों का गायब होना
परिजनों का आरोप है कि घटना के वक्त आईसीयू में कोई भी अटेंडेंट या जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं था। आग भड़कने के बाद मरीजों को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आया, जिसके बाद परिजन खुद अपने अपनों को बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर आगे बढ़े। अस्पताल में लगा फायर हाइड्रेंट सिस्टम मौके पर काम नहीं कर पाया। हालांकि, वहां कुछ फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) जरूर मौजूद थे, लेकिन उन्हें ऑपरेट करने वाला (चलाने वाला) कोई भी प्रशिक्षित स्टाफ वहां मौजूद नहीं था।
मरीजों को लेकर भागे परिजन
परिजनों ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल सिस्टम काम नहीं कर रहा है। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। मरीज और उनके परिजन जान बचाकर किसी तरह अस्पताल से बाहर निकले। हालांकि, आईसीयू वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए यह हादसा काफी भयावह साबित हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दम घुटने से कई मरीजों की मौत हो गई।
धुएं से भर गया आईसीयू वार्ड
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आग की शुरुआत आईसीयू वार्ड में शॉर्ट सर्किट से हुई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे आईसीयू में धुआं भर गया। आसपास के लोगों की सूचना पर फायर ब्रिगेड की आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। अग्निशमन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। कई मरीजों को पास के अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया। घटनास्थल पर चारों तरफ चीख-पुकार और भय का माहौल था। मरीजों के परिजन अपनों के बारे में पता नहीं चलने पर बेहद परेशान थे।
प्रशासन ने शुरू की जांच
अग्नि शमन विभाग के अधिकारी राम निवास पांडेय ने बताया कि पूरी स्थिति का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "फिलहाल दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन मरने वालों की सही संख्या बताना अभी मुश्किल है। आग के कारण आईसीयू में दम घुटने से कई मरीजों की जान जा सकती है। हम कोशिश कर रहे हैं कि सभी विवरण जल्द से जल्द एकत्र किए जाएं।" अस्पताल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि वे प्रशासन के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और दुर्घटना की जांच कराई जा रही है। इस घटना से पूरे शहर में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं होता है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं होती हैं।
(मुजफ्फरपुर से संजीव कुमार की रिपोर्ट)
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