बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाला है। उससे पहले यहां की सियासत में इन दिनों 'माई-बहिन योजना' को लेकर हलचल तेज है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे और हसनपुर से विधायक तेजप्रताप यादव ने इसे लेकर निशाना साधा। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी तरह का फॉर्म नहीं भरवा रहे हैं और न ही किसी से पैसे ले रहे हैं।
"फॉर्म के चक्कर में मत पड़िए"
मोहिउद्दीननगर में उन्होंने कहा, "हम कोई फॉर्म नहीं भरवा रहे हैं, कोई पैसा नहीं ले रहे हैं। हमको गरीब की मदद करनी है तो हम करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "दूसरे दल के लोगों ने फार्म निकलवाया। पीला झंडा वाला भी फॉर्म निकलवाया है। पहले जिस दल में हम थे वो भी फॉर्म निकलवाया है। फॉर्म के चक्कर में मत पड़िए। फॉर्म भरवाएगा आपसे पैसा लेने लगेगा, सरकार बनेगी, नहीं बनेगी, उसके बाद लूटना चालू कर देगा।"
'माई-बहिन योजना' चर्चा में क्यों?
बिहार में 'माई-बहिन योजना' एक प्रस्तावित योजना है, जिसे मुख्य रूप से कांग्रेस और RJD जैसी पार्टियों ने बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू करने का वादा किया है।
इस योजना के तहत यदि महागठबंधन की सरकार बनती है, तो बिहार की प्रत्येक जरूरतमंद महिला को उनके बैंक खाते में हर महीने 2500 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। इस योजना के लिए पंजीकरण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिसमें महिलाओं से गारंटी फॉर्म भरवाए जा रहे हैं।
यह योजना बिहार विधानसभा चुनावों में एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गई है। कांग्रेस और RJD इसे एक गारंटी के रूप में पेश कर रहे हैं, जैसा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस ने किया है। वहीं, नीतीश कुमार की सरकार ने भी महिलाओं के लिए रोजगार और अन्य योजनाओं की घोषणा की है।
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