अजीम हाशिम प्रेमजी के एनजीओ का नाम अजीम प्रेमजी फाउंडेशन है जो मानवता और शिक्षा से जुड़े काम करता है। फोर्ब्स मैग्जीन ने उन्हें भारत का बिल गेट्स का खिताब दिया है। भले ही कॉलेज से डॉपआउट होने के बावजूद भी वे भारत में एक वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी खोलने का प्रयास कर रहे है जिसके लिए उन्होंने 450 करोड़ रुपए का दान दिया था।
यही नहीं गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च के लिए प्रेमजी ने 9000 करोड़ रुपए का दान दिया था। दरअसर, साल 1966 में अजीम प्रेमजी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी गए थे, लेकिन इसी साल उनके पिता का देहांत हो गया। इसीलिए उन्हें अपने फैमिली बिजनेस संभानले के लिए घर लौटना पड़ा। उस वक्त अजीम प्रेमजी की उम्र 21 साल थी। अपनी मेहनत और लगन से साबुन और तेल बेचने वाली कंपनी विप्रो को दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में शामिल कर दिया। आज दौलत उनके कदम चूमती है। दुनिया भर में जाने कितने मंचों पर उनका सम्मान हो चुका है, लेकिन एक बात उन्हें हमेशा कचोटती है कि वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। शायद इसीलिए बात शिक्षा की हो, तो इसके लिए अजीम प्रेमजी दिल खोलकर दान देते हैं।