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समय से पहले पहुंचने वाले मानसून पर अलनीनो का बड़ा खतरा

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यत: 1 जून तक केरल पहुंचता, लेकिन इस बार मौसम विभाग का अनुमान है कि यह दो दिन पहले यानी 30 मई को केरल के तट पर दस्तक देगा। इस बार

क्या है अलनीनो-  

प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका तथा पेरू के पास के इलाकों में विषुवत रेखा के आसपास जब समुद्र की सतह एकदम से गर्म होना शुरू होती है तो अल नीनो प्रभाव उत्पन्न होता है। इस तपन से व्यापारिक पवनें (ट्रेड विंड) कमजोर हो जाती हैं और मानसूनी हवाओं के रुप में भारत की तरफ पहुंच जाती है। किसी सूरत में अगर समुद्र के तापमान में होने वाली बढो़तरी 0.5 डिग्री से 2.5 डिग्री के बीच होती है तो यह भारत के मानसून पर तेजी से असर डालती हैं।

क्या होती है ट्रेड विंड-

दक्षिणी अक्षांश के हिस्सों, यानी उपोष्ण उच्च वायुदाब कटिबंधों से भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब कटिबंध की ओर दोनों गोलार्धों में साल भर लगातार बहने वाली पवनों को व्यापारिक पवन यानी ट्रेड विंड कहते हैं।

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