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‘ज्ञानु और जानू’ वीडियो को लेकर विवादों में घिरे अमित जोगी, FIR दर्ज होने के बाद बोले- 'मैं भगोड़ा नहीं हूं'

अमित जोगी ‘ज्ञानु और जानू’ वीडियो को लेकर विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में अमित जोगी ने खुद को भगोड़ा मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैं भगोड़ा नहीं हूं, आज भी गुजरात पुलिस की सुरक्षा में हूं।

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी - India TV Hindi
Image Source : ANI/FILE जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी

रायपुरः जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी ने उनके आवास पर भेजे गए पुलिस नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह नोटिस एक विवादित व्यंग्यात्मक वीडियो को लेकर दर्ज की गई FIR के सिलसिले में भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे पहने लोग दिखाई दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अमित जोगी ने इन दावों को खारिज कर दिया कि वह अधिकारियों से बच रहे हैं। साथ ही, उन्होंने नोटिस देने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। यह विवाद अमित जोगी द्वारा बनाए गए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे दिखने वाले मुखौटे पहने लोग एक प्रतीकात्मक शादी और हनीमून के दृश्य में नजर आते हैं।

अमित जोगी ने कही ये बातें

अमित जोगी के अनुसार, इस वीडियो का मकसद राजनीतिक व्यंग्य के जरिए चुनाव प्रक्रिया और वोटों में कथित हेरफेर को लेकर चिंताएं जताना था। हालांकि, रायपुर जिला भाजपा अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर और पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक राजेश मूणत की शिकायतों के आधार पर सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 196, 352, 353(2) और 356(2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस ने जारी किया नोटिस

इसके बाद पुलिस ने 4 नवंबर को नोटिस नंबर 569/2026 जारी किया और अमित जोगी की पत्नी और उनकी मां को इसकी प्रतियां देने के बाद, नोटिस को उनके आवास पर चस्पा कर दिया। जोगी ने तर्क दिया कि पुलिस को अच्छी तरह पता था कि जब नोटिस दिया गया, तब वह न तो घर पर थे और न ही छत्तीसगढ़ में। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय ने 30 अक्टूबर को ही पुलिस महानिदेशक (DGP) और रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को सूचित कर दिया था कि वह 2 नवंबर से 8 नवंबर के बीच गुजरात की पूर्व-निर्धारित यात्रा पर रहेंगे। जोगी के मुताबिक, यह यात्रा दोस्तों के निमंत्रण पर की गई है और इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें गुजरात पुलिस की सुरक्षा मिल रही है।

यहां देखें वीडियो

FIR दर्ज होने पर भड़के अमित जोगी

इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए, जोगी ने आरोप लगाया कि यह नोटिस और FIR न केवल उन्हें, बल्कि उनके परिवार को भी परेशान करने के इरादे से की गई है। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि शिकायत करने वाले दोनों व्यक्ति प्रमुख भाजपा नेता हैं, और छत्तीसगढ़ में भाजपा ही सत्ताधारी पार्टी है। उनके अनुसार, यह मामला किसी वैध कानूनी शिकायत के बजाय विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक उत्पीड़न को दर्शाता है। अपनी आपत्तियों के बावजूद, जोगी ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और राज्य लौटने के बाद अधिकारियों के सामने पेश होंगे। उन्होंने कहा, "मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि नकाबपोश राजनीतिक किरदारों वाले एक व्यंग्यात्मक वीडियो को सांप्रदायिक अपराध कैसे माना जा सकता है।

उन्होंने पूछा कि अधिकारियों को इस सामग्री में कौन सा धार्मिक या जातीय पहलू दिखा? उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक व्यंग्य पर एक बहुत ही बढ़ा-चढ़ाकर दी गई प्रतिक्रिया है। अपने खिलाफ लगाए गए कानूनी प्रावधानों पर बात करते हुए जोगी ने कहा कि इनमें से कोई भी आरोप उन पर लागू नहीं होता। BNS की धारा 196 (जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित है) पर उन्होंने तर्क दिया कि वीडियो में किसी धर्म, जाति या समुदाय का न तो जिक्र है और न ही उन्हें निशाना बनाया गया है।

BNS की धारा 352 (जो शांति भंग करने के इरादे से किए गए अपमान से संबंधित है) के बारे में उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यंग्य को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी प्राप्त है और यह किसी व्यक्ति विशेष के बजाय सार्वजनिक आचरण पर केंद्रित होता है। BNS की धारा 353(2) (जो सार्वजनिक अशांति पैदा कर सकने वाले बयानों से संबंधित है) पर जोगी ने कहा कि इस सामग्री को स्पष्ट रूप से व्यंग्य और कॉमेडी के रूप में पेश किया गया था, इसलिए इसे किसी तथ्य या दावे के रूप में नहीं देखा जा सकता।

अपने बचाव में कही ये बातें

मानहानि से जुड़ी BNS की धारा 356(2) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो में कोई तथ्यात्मक आरोप नहीं हैं, बल्कि यह केवल किरदारों और प्रतीकों के माध्यम से की गई एक राजनीतिक टिप्पणी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत लगे आरोपों पर जोगी ने कहा कि वीडियो में न तो कोई नग्नता है, न ही कोई यौन गतिविधि या अश्लीलता। उन्होंने कहा कि व्यंग्य के लिए 'हनीमून' के माहौल का इस्तेमाल करना कानून की नजर में अश्लील नहीं माना जा सकता। जोगी ने राजनीतिक व्यंग्य को अपराध की श्रेणी में डालने को लोकतांत्रिक मूल्यों और असहमति जताने के अधिकार पर हमला बताया।

प्राचीन ग्रीस की व्यंग्य परंपराओं और भरत मुनि के 'नाट्यशास्त्र' में मौजूद 'विदूषक' परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक हास्य लंबे समय से सार्वजनिक टिप्पणी का एक वैध रूप रहा है। उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो समकालीन राजनीतिक चिंताओं को एक ऐसी भाषा में व्यक्त करने का प्रयास था, जो आज की युवा पीढ़ी से जुड़ सके। बता दें कि अमित जोगी, छत्तीसगढ़ के दिवंगत मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं। 

(रिपोर्टः सिकंदर खान और IANS इनपुट के साथ)

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