1. Hindi News
  2. छत्तीसगढ़
  3. बीमारी से हुई मौत, रिपोर्ट में लिखा 'सांप ने काटा', सरकारी खजाने से ऐसे उड़ाए 64 लाख रुपये

बीमारी से हुई मौत, रिपोर्ट में लिखा 'सांप ने काटा', सरकारी खजाने से ऐसे उड़ाए 64 लाख रुपये

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सांप के काटने से मौत के फर्जी दावे कर 64 लाख रुपये सरकारी मुआवजा हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने डॉक्टर, वकील, होमगार्ड और सरकारी कर्मचारियों समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Bilaspur Fraud Case, Snake Bite Compensation Scam, Chhattisgarh Police- India TV Hindi
Image Source : PEXELS REPRESENTATIONAL सांप के काटने का फर्जी दावा कर सरकारी खजाने से 64 लाख रुपये का मुआवजा हड़पने का मामला सामने आया है।

Highlights

  • फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाकर सरकारी मुआवजे के 64 लाख रुपये हड़पने का आरोप।
  • डॉक्टर, होमगार्ड, वकील और सरकारी कर्मचारी समेत 19 आरोपी पुलिस गिरफ्त में।
  • बीमारी और आत्महत्या की मौतों को भी सांप काटने का मामला बताकर फर्जी दावा किया।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सांप के काटने से मौत का फर्जी दावा कर सरकारी मुआवजा हड़पने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक डॉक्टर, 2 होमगार्ड, एक वकील और कई सरकारी कर्मचारियों समेत कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि गिरोह ने फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सरकारी दस्तावेज तैयार कर करीब 64 लाख रुपये के सरकारी मुआवजे की धोखाधड़ी की। पुलिस ने इस केस में  फर्जी सरकारी मुहरें, नकली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य तमाम चीजें बरामद की हैं।

नवंबर 2019 से फरवरी 2024 के बीच हुआ खेल

बिलासपुर के SSP रजनेश सिंह ने बताया कि गिरोह ने राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 योजना के तहत प्राकृतिक और अन्य कारणों से होने वाली मौतों पर मिलने वाले सरकारी मुआवजे का फर्जी तरीके से लाभ उठाया। इसके लिए मेडिकल और राजस्व विभाग के दस्तावेजों में हेराफेरी कर सांप के काटने से मौत दिखाई गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि नवंबर 2019 से फरवरी 2024 के बीच गिरोह के हर सदस्य ने अलग-अलग भूमिका निभाकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। मामले में अब तक बिलासपुर के सरकंडा, सिविल लाइंस, कोनी, सिटी कोतवाली, सिरगिट्टी और तोरवा थानों में 16 FIR दर्ज की गई हैं। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

CIMS की डॉक्टर प्रियंका सोनी भी गिरफ्त में

पुलिस ने रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर से MBBS और MD डॉक्टर प्रियंका सोनी (37) को गिरफ्तार किया। वहीं, सोमवार को होमगार्ड रामकुमार पाटनवार (40) और रामेश्वर भास्कर (53) को भी गिरफ्तार किया गया। घटना के समय तीनों छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (CIMS), बिलासपुर में तैनात थे। जांच के मुताबिक, दोनों होमगार्ड अस्पताल में शव आने की सूचना गिरोह तक पहुंचाते थे। इसके बाद गिरोह से जुड़ा एक वकील मृतकों के परिजनों को सांप के काटने से मौत का झूठा दावा करने के लिए तैयार करता था और फर्जी प्रमाणपत्र बनवाता था।

बीमारियों से हुई मौत को सांप का काटा दिखाया

पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने बीमारी, कैंसर, आत्महत्या और अन्य कारणों से हुई पुरानी मौतों के मामलों को चुना और CIMS के डॉक्टरों के नाम से फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कर उनमें मौत का कारण सांप का काटना दिखाया। आरोप है कि गिरोह ने डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों, पटवारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों की फर्जी मुहरें और हस्ताक्षर भी तैयार किए, ताकि दस्तावेज असली लगें। इन्हीं फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी मुआवजे की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी। बाद में लाभार्थी को लगभग 50 हजार रुपये दिए जाते थे, जबकि बाकी रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।

16 फर्जी मामलों में उड़ा लिए 64 लाख रुपये

जांच में अब तक 16 फर्जी मुआवजा मामलों की पहचान हुई है, जिनमें करीब 64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में कथित सरगना और वकील हीरा प्रसाद खांडेकर, बैंक कर्मचारी कुश कुमार गुप्ता, दिहाड़ी कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा तथा सरकारी कर्मचारी गरीब राम बिजवाड़, नरेंद्र कौशिक और हरिशंकर राठौर सहित अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, तहसील कार्यालय से जुड़े दिहाड़ी कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा ने सरकारी कर्मचारियों की मदद से फाइलों को आगे बढ़ाने और मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

शवों पर बनाए सांप काटने के निशान

जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में शवों के साथ छेड़छाड़ कर सांप के काटने जैसे निशान तक बनाए गए और फिर पंचनामा व पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी सरकारी मुहरें, नकली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, पंचनामा दस्तावेज, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बैंक खाता फॉर्म, कंप्यूटर, प्रिंटर, नकदी और अन्य महत्वपूर्ण सामान बरामद किया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

ये भी पढ़ें: बरेली में फर्जी महिला IAS अधिकारी गिरफ्तार, शादी के बाद हुआ खुलासा