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सूरजपुर हत्याकांड में 3 को सजा-ए-मौत, 1 को उम्रकैद; मां और बेटी की हुई थी हत्या, शरीर पर मिले थे 61 चोटों के निशान

सूरजपुर में पुलिस प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया है। मुख्य आरोपी कुलदीप साहू समेत तीन आरोपियों को सजा-ए-मौत, जबकि एक आरोपी को उम्रकैद दी गई है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
Image Source : PEXELS.COM प्रतीकात्मक फोटो

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की त्वरित अदालत ने पुलिस प्रधान आरक्षक की पत्नी और उसकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने मामले के चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन को मौत की सजा और एक आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

तीन आरोपियों को मौत की सजा

सरकारी वकील सुरेश शर्मा के मुताबिक, अदालत ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू (32), चंद्रकांत चौधरी (28) और फूल सिंह उर्फ रिंकू (28) को मौत की सजा सुनाई है। वहीं, चौथे आरोपी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी (20) को उम्रकैद की सजा दी गई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 अक्टूबर 2024 को सूरजपुर शहर में प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस वारदात में कुलदीप साहू को मुख्य आरोपी बताया था।

मां-बेटी के शरीर पर मिले थे 61 चोट के निशान

सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बर्बर तरीके से मारपीट की गई थी। महिला के शरीर पर चोट के 33 और बच्ची के शरीर पर 28 निशान मिले थे। अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों के कपड़ों पर भी खून के निशान मिले थे।

अदालत में इन सबूतों को आरोपियों की ओर से चुनौती नहीं दी गई। इसके अलावा मुख्य आरोपी कुलदीप साहू से जुड़े फिंगरप्रिंट साक्ष्य को भी चुनौती नहीं दी गई।

यौन उत्पीड़न ने बढ़ाई अपराध की गंभीरता

अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि पुलिसकर्मी की पत्नी के साथ यौन उत्पीड़न किया गया था। सरकारी वकील के मुताबिक, इस तथ्य ने अपराध की गंभीरता को और बढ़ा दिया। अभियोजन ने अदालत के समक्ष मामले को अत्यंत गंभीर और जघन्य अपराध बताते हुए कड़ी सजा की मांग की थी।

पुलिस के अनुसार, घटना वाली रात कुलदीप साहू ने सबसे पहले दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के रास्ते पर तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर गर्म तेल फेंका था। उस समय तत्कालीन एनएसयूआई जिला अध्यक्ष चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा और फूल सिंह भी कथित तौर पर मौके पर मौजूद थे।

घटना के बाद प्रधान आरक्षक और थाने के अन्य पुलिसकर्मियों ने साहू की तलाश शुरू की। पुलिस का दावा है कि जब टीम ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो उसने पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने का प्रयास किया और मौके से फरार हो गया।

प्रधान आरक्षक के घर में घुसकर वारदात

पुलिस के मुताबिक, फरार होने के बाद साहू प्रधान आरक्षक के घर में घुस गया। वहां उसने उनकी पत्नी और बेटी पर हमला किया। आरोप है कि अपने साथियों की मदद से उसने महिला का यौन उत्पीड़न किया और फिर मां-बेटी की हत्या कर दी। बाद में दोनों के शवों को घर से करीब चार किलोमीटर दूर पिढ़ा गांव में फेंक दिया गया था।

परिवार ने फैसले पर जताई संतुष्टि

प्रधान आरक्षक के बड़े भाई अमित (बदला हुआ नाम) ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि परिवार को ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी और यह फैसला उन्हें इस दुख से उबरने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उनका भाई पूरी तरह टूट गया था। मुश्किल समय में पुलिस विभाग ने परिवार का साथ दिया और उसका हौसला बढ़ाया।

कोर्ट के बाहर आरोपी के मुस्कुराने पर भी उठे सवाल

अमित ने पिछले महीने अदालत के बाहर कुलदीप साहू के मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाने के वीडियो पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर अपराध के बावजूद आरोपी के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नजर नहीं आया। उनके मुताबिक, यह आरोपी की सोच और परवरिश पर सवाल खड़े करता है। बताया गया कि पुलिसकर्मियों पर कार चढ़ाने की कोशिश के एक अलग मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद साहू को सूरजपुर जिला अदालत से बाहर निकलते समय मुस्कुराते हुए देखा गया था। उसने मीडियाकर्मियों से उस तस्वीर का इस्तेमाल करने के लिए भी कहा था।

(इनपुट- PTI)

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