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दिल्ली से बदरीनाथ धाम जाने का प्लान बना रहे हैं? कपाट बंद होने की तारीख हो गई घोषित, यात्रा से पहले जान लें अपडेट

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख घोषित हो गई है। ऐसे में अगर आप दिल्ली से बदरीनाथ धाम जाने का प्लान बना रहे हैं तो लेटेस्ट अपडेट जरूर जान लें।

Badrinath Dham- India TV Hindi
Image Source : ANI बदरीनाथ धाम

नई दिल्ली: 'भू-वैकुंठ' के रूप में पूजनीय बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तारीख घोषित कर दी गई है। भगवान बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए 16 नवंबर को रात 9:37 बजे बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे में अगर आप दिल्ली या देश के किसी भी कोने से बदरीनाथ धाम जाने का प्लान बना रहे हैं तो 16 नवंबर से पहले जाएं। हालांकि ये बात ध्यान रखें कि कपाट बंद होने की आखिरी तारीख से पहले भीड़ ज्यादा हो जाता है। ऐसे में परेशानी न हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा प्लान करें।

बदरीनाथ धाम के बारे में जानिए

बदरीनाथ धाम 4 धामों में से एक है और काफी प्रसिद्ध है। यह भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे वैष्णवों के लिए काफी पूजनीय माना जाता है।

बदरीनाथ धाम के मुख्य देवता भगवान बदरीनारायण के रूप में विराजमान विष्णु हैं। यहां उनकी 1 मीटर ऊंची शालीग्राम की काले पत्थर की मूर्ति पद्मासन मुद्रा में स्थापित है।

सर्दियों में बंद हो जाते हैं बदरीनाथ के कपाट

सर्दियां शुरू होते ही बदरीनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं। इसके पीछे का कारण ये है कि यहां अत्यधिक ठंड और बर्फबारी होती है। इस दौरान मंदिर में दर्शन नहीं किए जाते। सुरक्षा कारणों से इसे नवंबर के महीने में बंद कर दिया जाता है और ये मंदिर हर साल अप्रैल से नवंबर की शुरुआत तक ही खुला रहता है।

भगवान बदरी की उत्सव डोली का शीतकालीन प्रवास 

जब बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं तो भगवान बदरी की उत्सव डोली को पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ लाया जाता है। अगले 6 महीने तक इनकी पूजा यहां की जाती है।

क्यों पड़ा बदरी नाम?

बता दें कि पौराणिक कथाएं कहती हैं कि माता लक्ष्मी ने 'बद्री' (बेर) के पेड़ का रूप धारण कर भगवान विष्णु को तीव्र हिमपात से बचाया था। इसी वजह से इस जगह का नाम बदरीनाथ पड़ा।

इसे धरती का वैकुंठ भी कहते हैं। मान्यता है कि यहां पूजा और दर्शन करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गौरतलब है कि लोगों का रुझान अयोध्या से लेकर उज्जैन और बदरीनाथ तक बढ़ रहा है।

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