दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर अब पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में महिला स्वतंत्र पत्रकार, गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों पर जातिसूचक टिप्पणी करने, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने और सोशल मीडिया पर कथित तौर पर छवि खराब करने के आरोप लगाए गए हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, ये FIR 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में दर्ज की गई है।
विवेक भगत ने अपनी शिकायत में क्या आरोप लगाए?
शिकायत के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान बुटा सिंह गोलचक्कर के पास स्वतंत्र महिला पत्रकार ने कथित तौर पर उनकी जाति (मेघ/मेघवाल) को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की और उनके एसीपी पद पर नियुक्त होने पर सवाल उठाए। एसीपी का आरोप है कि उन्होंने इन टिप्पणियों को नजरअंदाज किया और अपनी ड्यूटी जारी रखी।
शिकायत में कहा गया है कि दोपहर करीब 3 बजे प्रदर्शनकारियों को संभालने और हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान महिला पत्रकार ने एसीपी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। विवेक भगत का आरोप है कि स्वतंत्र महिला पत्रकार और उनके साथियों ने बार-बार उनका सामना किया, जिससे सरकारी ड्यूटी के निर्वहन में बाधा उत्पन्न हुई। शिकायत के अनुसार, उसी शाम स्वतंत्र महिला पत्रकार और अन्य लोगों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और एसीपी के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि इस दौरान उन्हें यौन दरिंदा और संभावित बलात्कारी तक कहा गया। बता दे कि हाल ही में ACP विवेक भगत का AI से आपत्तिजनक पोस्टर बनाने वाले शख्स को भी गिरफ्तार किया गया था।
सोशल मीडिया पर पोस्ट और रील प्रसारित करने का आरोप
विवेक भगत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि स्वतंत्र महिला पत्रकार, गजेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कुछ सदस्यों ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित पोस्ट और रील सोशल मीडिया पर प्रसारित कीं। शिकायत के मुताबिक, संबंधित पोस्ट और रील X तथा इंस्टाग्राम पर प्रसारित की गईं। एसीपी का आरोप है कि इन गतिविधियों से उन्हें मानसिक परेशानी हुई और उनकी सामाजिक तथा पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। शिकायत में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें:
- महिला स्वतंत्र पत्रकार
- गजेंद्र सिंह
- अभिजीत दीपके
- आशुतोष रांका
- सौरव दास
- रत्ना सिंह
FIR में क्या लिखा है?
शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उपलब्ध शिकायत-सार के मुताबिक, इनमें शामिल हैं-:
- एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम- कथित जातिसूचक टिप्पणी और अपमान से संबंधित आरोप।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 221- लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालने से संबंधित प्रावधान।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2)- मानहानि से संबंधित प्रावधान।
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5)- एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा साझा इरादे से किए गए अपराध से संबंधित प्रावधान।
एसीपी ने यह भी बताया है कि महिला पत्रकार की ओर से यौन उत्पीड़न को लेकर दर्ज कराई गई अलग शिकायत दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को भेजी गई थी और उसकी जांच चल रही थी। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। बता दें कि FIR में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता।
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