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दिल्ली दंगा मामले में आया कोर्ट का बड़ा फैसला, ताहिर हुसैन को 2 साल की जेल, 10 हजार रुपये का जुर्माना भी

दिल्ली दंगा मामले में शुक्रवार को कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने ताहिर हुसैन को 2 साल की जेल और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि लोगों के चुने हुए प्रतिनिधि होने के नाते ताहिर की जिम्मेदारी शांति बनाए रखने की थी, लेकिन उसे दंगाइयों की मदद करने का दोषी पाया गया।

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Image Source : ANI ताहिर हुसैन को मिली सजा।

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दो साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर उन्हें 10 दिन की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने दिया। यह मामला दयालपुर थाने में दर्ज FIR नंबर 120/2020 से जुड़ा है। कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2026 को ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 के साथ धारा 109 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद कोर्ट ने सजा की अवधि तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।

'प्रतिनिधि के नाते शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी थी'

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फरवरी 2020 में जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए, उस समय ताहिर हुसैन जनता के चुने हुए प्रतिनिधि थे। ऐसे में उनसे उम्मीद थी कि वे लोगों को हिंसा से रोकने और इलाके में शांति बनाए रखने में मदद करेंगे। कोर्ट के मुताबिक, इसके उलट ताहिर हुसैन पर दंगाइयों को अपना घर इस्तेमाल करने देने का दोष साबित हुआ। कोर्ट ने कहा कि उनका घर इलाके की ऊंची जगह पर था, जहां से दंगाई लोगों पर हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे थे।कोर्ट ने कहा कि जिस पद का इस्तेमाल हिंसा रोकने के लिए होना चाहिए था, उसका इस्तेमाल हिंसा में मदद करने के लिए किया गया। कोर्ट ने इसे गंभीर बात माना।

सरकारी पक्ष ने मांगी थी ज्यादा से ज्यादा सजा

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने ताहिर हुसैन के लिए कानून के तहत ज्यादा से ज्यादा सजा देने की मांग की। सरकारी पक्ष ने कहा कि दंगों से जुड़े एक दूसरे मामले में भी ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया जा चुका है। इसलिए यह उनकी दूसरी सजा है। सरकारी पक्ष ने यह भी कहा कि ताहिर हुसैन की जिम्मेदारी हिंसा रोकने की थी, लेकिन उन्होंने दंगाइयों की मदद की। इसी आधार पर कड़ी सजा देने की मांग की गई। बता दें कि इससे पहले IB अधिकारी अंकित शर्मा मर्डर केस में भी ताहिर हुसैन सहित 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

बचाव पक्ष ने दी थी ये दलील

ताहिर हुसैन के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल दंगाइयों की भीड़ का हिस्सा नहीं थे और उनके खिलाफ दंगे के दौरान खुद हमला करने का आरोप साबित नहीं हुआ है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ताहिर हुसैन का कहना था कि दंगाइयों ने उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया था और उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) को फोन भी किया था। वकील ने कोर्ट से कम सजा देने की मांग की। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ताहिर हुसैन की ओर से PCR कॉल और अपने बचाव में पेश की गई बातों को साबित करने के लिए जरूरी सबूत नहीं दिए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि घर पर जबरन कब्जे की शिकायत किए जाने का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।

कोर्ट ने क्यों नहीं मानी कम सजा देने की मांग?

कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का खुद दंगाइयों की भीड़ में शामिल नहीं होना अपने आप में उसकी गलती की गंभीरता को कम नहीं करता। कोर्ट के मुताबिक, इस मामले में ताहिर हुसैन को दंगाइयों को अपना घर इस्तेमाल करने देने के लिए दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने माना कि इस मामले में सजा कम करने के लिए बचाव पक्ष की ओर से कोई ऐसी ठोस वजह सामने नहीं आई, जिसे पर्याप्त माना जा सके। इसके बाद कोर्ट ने ताहिर हुसैन को दो साल की सख्त कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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