दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडर मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, आरोपी अंकित श्रीवास्तव को पूछताछ के लिए दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
अदालत ने सत्येंद्र जैन, उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को 3 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इन सभी को अगली बार 3 सितंबर को सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
उदित प्रकाश की जमानत पर कल सुनवाई
उदित प्रकाश की ओर से कोर्ट में खास तौर पर उनकी जमानत अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। उनके वकील ने कहा कि वह वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हैं और अगर हिरासत जारी रही तो उनके खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई का खतरा है। कोर्ट ने इस मांग को मान लिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को उदित की जमानत अर्जी पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जमानत पर 20 अगस्त को दोपहर 12 बजे सुनवाई होगी। उदित प्रकाश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में जुड़ेंगे।
अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस रिमांड
कोर्ट ने आरोपी अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की ACB की मांग मंजूर कर ली। जांच एजेंसी का कहना है कि उसके मोबाइल फोन की बरामदगी और मामले में कथित साजिश से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी हासिल करने के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अंकित श्रीवास्तव को 21 अगस्त को दोपहर 2 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा। कोर्ट ने पुलिस को उसकी मेडिकल जांच कराने और पूछताछ CCTV कैमरों की निगरानी वाले स्थान पर करने का निर्देश भी दिया है।
करीब 1,943 करोड़ रुपये के टेंडर का मामला
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को बेहतर बनाने और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए जारी किए गए करीब 1,943 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा है। केस दिल्ली सरकार के विजिलेंस विभाग की 10 मई 2024 की रिपोर्ट के बाद दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास कंपनी को फायदा मिल सके। एजेंसी ने टेंडर में तकनीकी शर्तों को सीमित करने, कुछ जरूरी पानी की गुणवत्ता से जुड़े मानकों को हटाने और रोहिणी STP की क्षमता 15 से बढ़ाकर 30 MGD करने जैसे आरोप लगाए हैं। एजेंसी के मुताबिक, इससे करीब 123 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि Euroteck से जुड़े लोगों और कुछ आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन और WhatsApp बातचीत के सबूत मिले हैं।
आरोपियों ने गिरफ्तारी का किया विरोध
आरोपियों की ओर से कहा गया कि FIR मई 2024 में दर्ज हुई थी, लेकिन गिरफ्तारी करीब 27 महीने बाद की गई। उनका कहना था कि वे लगातार जांच में शामिल होते रहे हैं और मामले से जुड़े ज्यादातर दस्तावेज जांच एजेंसी पहले ही अपने कब्जे में ले चुकी है। इसलिए हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी को गैर-कानूनी या गलत मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि जमानत अर्जियों पर अलग से सुनवाई होगी और अभी उन पर कोई अंतिम राय नहीं दी जा रही है।
सत्येंद्र जैन की जमानत पर 25 अगस्त को सुनवाई
सत्येंद्र जैन समेत बाकी चार आरोपियों की जमानत अर्जियों पर ACB से जवाब मांगा गया है। इन अर्जियों पर अगली सुनवाई 25 अगस्त को दोपहर 12 बजे होगी।
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