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जंतर-मंतर के हंगामे से किसका कितना नुकसान? दुकानें बंद, ग्राहक गायब, व्यापारी बोले-'डर लगता था'

जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शनों से आसपास के परिवारों और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। सुरक्षा के डर से दुकानें बंद थीं, ग्राहक नहीं पहुंच रहे थे और व्यापारियों को रोजाना काफी नुकसान हो रहा था।

Highlights

  • जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन से खान मार्केट से जनपथ तक कारोबार प्रभावित।
  • जब भीड़ बढ़ जाती है और हालात बिगड़ने का डर रहता है, तो दुकानें बंद करनी पड़ती हैं।
  • भीड़ और लूटपाट का डर, दुकानों से ग्राहक गायब; कई बाजारों में 15 दिन से व्यापार ठप।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों और हंगामे का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। यहां के आसपास रहने वाले परिवारों और कारोबार करने वाले लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों से उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई थी। कई दुकानदारों को दुकानें बंद करनी पड़ रही थीं, ग्राहकों की आवाजाही घट गई थी और कारोबार ठप हो गया था। जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने के सरकार के फैसले के बाद प्रभावित लोगों ने राहत की सांस ली और प्रदर्शनों के चलते होने वाली अपनी परेशानियां सामने रखीं। उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ और संभावित लूटपाट के डर से वे घरों और दुकानों तक सीमित हो गए थे।

जंतर-मंतर के पीछे रहने वाले परिवार परेशान

जंतर-मंतर के ठीक पीछे बने रिहायशी इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे सालों से यहां रह रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी थीं। लोगों के मुताबिक, वे अपने घरों में बंद रहने को मजबूर हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने उनकी सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग लगाई है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इस इलाके से होकर आ-जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भीड़ के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। हालांकि जंतर-मंतर के डिनोटिफाई होने के बाद इन्होंने राहत की सांस ली है।

'प्रदर्शन से डर, दुकानें बंद करने को मजबूर'

जंतर-मंतर के आसपास कारोबार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ सुरक्षा की चिंता भी सता रही थी। उनका कहना है कि प्रदर्शन करना गलत नहीं है, लेकिन जब भीड़ बढ़ जाती है और हालात बिगड़ने का डर रहता है, तो दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। इससे नियमित ग्राहक भी बाजार आने से बचते हैं और कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। एक व्यापारी ने कहा,

'नुकसान का कोई एग्जैक्ट अंदाजा तो नहीं लगाया जा सकता, पर सभी दुकानदारों को बड़ा लॉस हुआ है। दुकानें जो 2 से 3 दिन बंद रहीं वह तो अलग बात है, इसके अलावा कस्टमर भी जिस तरह का प्रदर्शन हुआ है, उससे थोड़ा डरा हुआ है। प्रदर्शन करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन इस प्रदर्शन में भीड़ में बहुत ज्यादा अवांछित लोग भी शामिल थे। हम लोग बहुत डरे हुए थे और इसी के चलते हमने दुकानें बंद की हुई थीं। सबसे ज्यादा डर लूटपाट का ही था, इसीलिए दुकानें बंद कर दी थीं।'

'ग्राहक न आने से रोजाना हजारों का नुकसान'

प्रदर्शनों का असर रेस्टोरेंट और खाने-पीने के कारोबार पर भी पड़ रहा था। कारोबारियों का कहना है कि रास्ते बंद होने और ग्राहकों के नहीं पहुंच पाने के कारण उनकी कमाई घट गई है। रेस्टोरेंट चलाने वाले एक शख्स ने कहा,

'बिजनेस पर तो फर्क पड़ता ही है। ग्राहक आते ही नहीं हैं, सारे रास्ते बंद हैं। जो नियमित ग्राहक हैं, या नौकरी करने वाले ग्राहक हैं, वे आ ही नहीं पा रहे हैं। बहुत नुकसान हो रहा है। रोज ही 2 से 4 हजार रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।'

'प्रदर्शन हो, लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो'

प्रदर्शन के कारण आम लोगों को हो रही परेशानियों पर स्थानीय निवासियों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लगातार भीड़ और रास्तों में रुकावट के कारण बाजार जाना और जरूरी सामान खरीदना मुश्किल हो रहा है। एक महिला ने कहा,

'बैठ कर आराम से संसद में जाकर बातचीत करो। इस तरह की भीड़भाड़ से जनता परेशान हो रही है। न कोई बाजार जा पा रहा है, न कोई सामान ले पा रहे हैं।'

खान मार्केट में 15 दिनों से कारोबार ठप

नई दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों के व्यापारियों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एक व्यापारी ने कहा,

'ईमानदारी से कहूं तो सबसे पहले जान-माल का ही डर होता है कि कहीं किसी का कोई नुकसान न हो जाए। सभी व्यापारी भाई ही हैं। भीड़ का कोई पता नहीं होता कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। व्यापार पिछले लगभग 15 दिनों से पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।'

व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों का सीजन होने के बावजूद बाजार में 4 से 5 लोग भी नजर नहीं आ रहे हैं। नई दिल्ली इलाके में आने से लोग डर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे प्रदर्शनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन लगातार हो रहे प्रदर्शनों से उनके कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है। बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रोटेस्ट नहीं किए जा सकेंगे और इसके लिए 3 नए स्थान तय किए गए हैं।

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