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देश भर में पहली बार स्कूल शिक्षकों की संख्या हुई 1 करोड़ के पार, शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट

देश में स्कूली शिक्षकों की संख्या पहली बार किसी भी शैक्षणिक वर्ष में एक करोड़ के पार पहुंच गई है। वहीं, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट आई है।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
Image Source : PEXELS.COM प्रतीकात्मक फोटो

देश भर में स्कूल शिक्षकों की संख्या एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल शिक्षकों की संख्या 2024-25 सत्र में पहली बार एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। वहीं, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट आई है। इसके अलावा, सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio- GER) में भी 2024-25 के दौरान उछाल आया है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी 2024-25 के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल स्कूली शिक्षकों की संख्या पहली बार किसी भी शैक्षणिक वर्ष में एक करोड़ के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, "2024-25 में कुल शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1,01,22,420 हो गई है, जबकि 2023-24 में यह 98,07,600 और 2022-23 में 94,83,294 थी।" मंत्रालय ने कहा कि शिक्षकों की संख्या में यह बढ़ोतरी छात्र-शिक्षक अनुपात को बेहतर बनाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षकों की उपलब्धता में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ड्रॉपआउट दरों में गिरावट

रिपोर्ट में अलग-अलग स्तरों पर छात्रों के बीच ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोड़ने) की दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

  1. तैयारी स्तर पर: यह दर पिछले साल के 3.7% से घटकर 2.3% हो गई है।
  2. मध्य स्तर पर: यह 5.2% से घटकर 3.5% हो गई है।
  3. माध्यमिक स्तर पर: यह 10.9% से घटकर 8.2% हो गई है।

छात्रों के स्कूल में टिके रहने की दरों में भी सुधार

  1. फाउंडेशनल स्तर: 98.9% (पहले 98%)
  2. तैयारी स्तर: 92.4% (पहले 85.4%)
  3. मध्य स्तर: 82.8% (पहले 78%)
  4. माध्यमिक स्तर: 47.2% (पहले 45.6%)

सकल नामांकन अनुपात (GER) भी बढ़ा

  1. मध्य स्तर पर: 89.5% से 90.3%
  2.  माध्यमिक स्तर पर: 66.5% से 68.5%

ट्रांजिशन दर: छात्रों का एक स्तर से दूसरे स्तर में जाने की दर में भी सुधार

  1. फाउंडेशनल से तैयारी स्तर: 98.6%
  2. तैयारी से मध्य स्तर: 92.2%
  3. मध्य से माध्यमिक स्तर: 86.6%

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