नई दिल्ली। दिसंबर 2018 में 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में NOTA वोटों में जोरदार बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भी NOTA वोटों में इजाफा हो सकता है, अगर ऐसा हुआ तो कई राजनितिक दलों के समीकरण बिगड़ सकते हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में भी कुछेक लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की जीत का अंतर NOTA के तहत पड़े वोटों से कम था। एक नजर डालते हैं 2014 के लोकसभा चुनावों में NOTA वोटों के गणित पर।
चुनाव आयोग के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में 60 लाख से ज्यादा वोट NOTA के तहत डाले गए थे जो कुल मतदान का 1.08 प्रतिशत था, यानि 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने किसी भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को वोट ने देकर अपना वोट NOTA को दिया था।
2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा NOTA वोट वाले राज्यों में 4 राज्य यानि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडू, बिहार और पश्चिम बंगाल ऐसे हैं जहां पर 5 लाख से ज्यादा वोट NOTA के तहत गए हैं। इनके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपना वोट NOTA के तहत डाला था। मौजूदा समय में इन 10 राज्यों में से 5 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों की सरकार है, एक राज्य में कांग्रेस और बाकी में क्षेत्रीय दलों की सरकार है।
Top 10 States with highest NOTA votes during 2014 Lok Sabha Elections
अगर NOTA वोट वाली टॉप 10 लोकसभा सीटों को देखें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की नीलगिरी, ओडीशा की नबरंगपुर, छत्तीसगढ़ की बस्तर और राजस्थान की बांसबाड़ा लोकसभा सीट सबसे आगे रही। इनके अलावा कोरापुट (ओडिशा), राजनांदगांव (छत्तीसगढ़), दाहोद (गुजरात), कांकेर (छत्तीसगढ़), सरगुजा (छत्तीसगढ़) और रतलाम (मध्य प्रदेश) लोकसभा सीट भी टॉप 10 में शामिल है। इन 10 सीटों में कोरापुट और नबरंगपुर सीट ऐसी थीं जहां पर जीतने वाले उम्मीदवार और दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार के वोटों का अंतर NOTA के तहत पड़े वोटों से भी कम था। दोनो ही सीटों पर बीजू जनता दल के उम्मीदवार की जीत हुई थी और कांग्रेस का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा था।
Top 10 Lok Sabha Seats with highest NOTA votes during 2014 Lok Sabha Elections
अब दिसंबर 2018 में 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो वहां भी NOTA वोटों में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पांचों राज्यों में कुल मिलाकर 15 लाख से ज्यादा वोट NOTA के तहत गए हैं। सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 5 लाख से ज्यादा वोट NOTA के तहत गए थे, प्रतिशत के हिसाब से सबसे अधिक 2 प्रतिशत वोट छत्तीसगढ़ में NOTA के तहत डाले गए। NOTA वोटों की वजह से मध्य प्रदेश और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और हार का सामना करना पड़ा।