‘राहुल’ कोड वर्ड, डेविड हेडली से पहली मुलाकात, गहराती दोस्ती और 30 घंटे की पूछताछ, राहुल भट्ट ने खोले 26/11 के बड़े राज
26/11 हमले से जुड़े डेविड हेडली कनेक्शन पर राहुल भट्ट ने पुराने घटनाक्रम को याद किया। उन्होंने मुलाकात, 30 घंटे की पूछताछ, ‘राहुल’ कोड वर्ड और मीडिया ट्रायल से जुड़े अनुभव साझा किए।

मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले की जांच आगे बढ़ी तो पाकिस्तान-अमेरिकी आतंकवादी डेविड हेडली की भूमिका भी सामने आई। हेडली ने मुंबई में हमले से पहले रेकी की थी और बाद की जांच में उसके कई संपर्कों को खंगाला गया। इसी दौरान फिल्ममेकर महेश भट्ट के बेटे और फिटनेस ट्रेनर राहुल भट्ट का नाम भी सामने आया, क्योंकि उनकी हेडली से मुलाकात हो चुकी थी। उस समय राहुल को लेकर मीडिया में कई तरह की चर्चाएं हुईं और उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। अब करीब 18 साल बाद राहुल ने उस पूरे दौर को याद करते हुए बताया है कि हेडली से उनकी मुलाकात कैसे हुई, उन्हें कब शक हुआ और जांच एजेंसियों ने उनसे किस तरह पूछताछ की। राहुल ने ये सभी दावे, अनुभव और 26/11 से जुड़े पुराने घटनाक्रम को सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत के दौरान साझा किया है।
टीवी पर हेडली का चेहरा देखकर समझ आया मामला
सिद्धार्थ कनन के इंटरव्यू में राहुल ने बताया कि 26/11 हमलों के बाद जब पहली बार उन्होंने न्यूज चैनलों पर डेविड हेडली का चेहरा एक आतंकवादी के तौर पर देखा तो उन्हें अपनी पुरानी मुलाकात तुरंत याद आ गई। उन्होंने कहा कि उस वक्त उनके दिमाग में यही बात आई कि शायद हेडली के साथ उनका पुराना कनेक्शन ही अब जांच का हिस्सा बनने वाला है। राहुल के मुताबिक एफबीआई के एक हलफनामे में यह बात सामने आई थी कि हेडली ने कथित तौर पर मुंबई के लिए ‘राहुल’ नाम का इस्तेमाल कोड वर्ड के तौर पर किया था। उन्होंने कहा, 'जैसे ही मैंने उसे टीवी पर देखा, मुझे लगा- ये वही है। ‘राहुल’ मैं हूं, इट्स मी। क्योंकि उसने एफबीआई के एक एफिडेविट में मुंबई के लिए मेरे नाम ‘राहुल’ का इस्तेमाल किया था।'
2007 में दादर की बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में हुई थी मुलाकात
राहुल ने स्पष्ट किया कि उनकी डेविड हेडली से पहली मुलाकात किसी जिम में नहीं, बल्कि 2007 में दादर में आयोजित एक बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता के दौरान हुई थी। एक कॉमन ट्रेनिंग पार्टनर के जरिए उनकी हेडली से पहचान हुई थी। राहुल ने बताया कि उस समय हेडली उन्हें एक अमेरिकी नागरिक के तौर पर ही जानते थे। उन्होंने हेडली की एक खास शारीरिक पहचान का भी जिक्र किया। राहुल के मुताबिक हेडली की एक आंख भूरी और दूसरी नीली थी। उन्होंने दावा किया कि पूछताछ के दौरान उन्होंने जांच अधिकारियों को भी इस बात की जानकारी दी थी। राहुल ने यह भी कहा कि हेडली के साथ उनकी दोस्ती किसी गहरी या व्यावसायिक साझेदारी जैसी नहीं थी। वे कभी-कभार मिलते थे, फिल्म देखते, खाना खाते या हेल्थ क्लब जाते थे। राहुल के शब्दों में, 'हम हर अल्टरनेटिव शनिवार को मिलते थे। मेरे सामने कभी कोई आपराधिक काम नहीं हुआ।'
हेडली ने ‘बैकयार्ड’ में हमले की बात कही थी
राहुल ने 26/11 से पहले हुई एक बातचीत को भी याद किया। उनके मुताबिक वह हेडली के साथ साउथ मुंबई में कैम्प्स कॉर्नर फ्लाईओवर के नीचे ट्रैफिक में फंसे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने इस्लामाबाद के मैरियट होटल में हुए बम धमाके का जिक्र किया। राहुल के अनुसार, इसी दौरान हेडली ने उनसे कहा था कि वह अपने “बैकयार्ड” में भी इस तरह की घटना होते देख सकते हैं। राहुल ने कहा कि उस समय उन्होंने हेडली की इस टिप्पणी को किसी गंभीर चेतावनी के तौर पर नहीं लिया। उन्हें लगा कि यह एक विदेशी नागरिक की सामान्य टिप्पणी है। लेकिन 26/11 हमले के बाद जब हेडली का नाम सामने आया तो उन्हें उस बातचीत का मतलब अलग नजर आया।
खुद क्राइम ब्रांच पहुंचे थे राहुल
राहुल ने बताया कि हेडली का नाम सामने आने के बाद वह अपनी मां की सलाह पर खुद मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे। उनके मुताबिक, उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी और हेडली की पहचान से जुड़ी पूरी जानकारी रखी। राहुल ने कहा, 'मैं खुद क्राइम ब्रांच में राकेश मारिया के पास गया और कहा कि राहुल मैं हूं, इट्स मी।' इसके बाद जांच एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की। राहुल का दावा है कि एनआईए, आईबी और रॉ से जुड़े अधिकारियों ने उनसे करीब 30 घंटे तक सवाल-जवाब किए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आरोपी के तौर पर नहीं बल्कि गवाह के रूप में पूछताछ का हिस्सा थे।
‘30 घंटे पूछताछ हुई, लेकिन कोई थर्ड डिग्री नहीं’
राहुल ने 30 घंटे की पूछताछ को लेकर कहा कि यह प्रक्रिया उनके लिए लंबी जरूर थी, लेकिन उन्होंने इसे किसी तरह की प्रताड़ना के रूप में पेश नहीं किया। उन्होंने कहा, '30 घंटे पूछताछ हुई, लेकिन एक गवाह के रूप में, न कि आरोपी के रूप में। कोई थर्ड डिग्री नहीं दी गई।' उन्होंने आगे दावा किया कि एनआईए के तत्कालीन आईजी संजीव कुमार सिंह ने उनसे कहा था कि उनसे एक गवाह के तौर पर पूछताछ की जा रही है और उन्हें सिर्फ सच बताना है। राहुल ने कहा कि उन्होंने जांच के दौरान वही बताया जो उन्हें याद था और उनके मुताबिक उनके खिलाफ कोई ईमेल, इंटरसेप्ट या अन्य आपराधिक सबूत नहीं मिला।
मीडिया ट्रायल को लेकर भी छलका राहुल का दर्द
26/11 के बाद अपने बारे में हुई मीडिया रिपोर्टिंग को याद करते हुए राहुल ने कहा कि उन्हें काफी नफरत और आलोचना झेलनी पड़ी। उनके मुताबिक मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें 'आतंकवादी का दोस्त' तक कहा। राहुल ने दावा किया कि बिना किसी अपराध में शामिल हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, 'मुझे बिना कुछ किए लोगों की बहुत नफरत झेलनी पड़ी। मुझे आतंकवादी कहा गया, लेकिन मैं एक पल के लिए भी नहीं टूटा, क्योंकि मैं निर्दोष था।'
घटना के दौरान पिता महेश भट्ट से बढ़ी थी नजदीकी
राहुल ने इस पूरे विवाद के दौरान अपने पिता महेश भट्ट के साथ रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस मुश्किल दौर में उनके पिता उनके आसपास थे और स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे। राहुल के मुताबिक इस घटना के दौरान करीब तीन से छह सप्ताह तक दोनों के बीच पहले की तुलना में ज्यादा नजदीकी आई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि यह बदलाव लंबे समय तक कायम नहीं रहा और बाद में दोनों के बीच फिर से संवाद की दूरी बढ़ गई। इसी इंटरव्यू में राहुल ने महेश भट्ट से अपने रिश्ते के बारे में भी बात की है और बताया कि उनसे रिश्ते कुछ खास नहीं थे।
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