सोशल मीडिया पर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने खुद को 'दिमागी नक्सल' बताया है। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता की सोच और उनके रुख पर सवाल उठाए हैं। रिजिजू ने कहा कि वह पहले नसीरुद्दीन शाह को एक सामान्य अभिनेता मानते थे और उनका सम्मान भी करते थे, लेकिन अब उन्हें उनके बारे में कुछ ऐसी बातें पता चली हैं, जिनकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। मंत्री की इस टिप्पणी के बाद दोनों के बयानों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नसीरुद्दीन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि वह पहले अभिनेता को एक सामान्य कलाकार समझते थे और उनके प्रति सम्मान रखते थे। हालांकि, अब उन्हें लगता है कि शाह की छवि को लेकर उनकी धारणा अलग हो गई है। रिजिजू ने अपने पोस्ट में अभिनेता के लिए 'खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। मंत्री ने हिंदी में भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि उन्हें नसीरुद्दीन शाह के असली चरित्र के बारे में काफी देर से पता चला। उन्होंने अभिनेता को भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक बताया। रिजिजू की यह टिप्पणी शाह के उस वीडियो के बाद आई है, जिसमें अभिनेता ने सरकार की नीतियों और देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए थे। हालांकि मंत्री की टिप्पणी उनके निजी आकलन को दर्शाती है।
नसीरुद्दीन शाह ने खुद को बताया 'दिमागी नक्सल'
विवाद की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो से हुई। इसमें अभिनेता ने अपने विचारों को लेकर इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न राजनीतिक और वैचारिक लेबल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रविरोधी और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे नामों से भी संबोधित किया गया है। इसी संदर्भ में उन्होंने खुद को गर्व के साथ 'दिमागी नक्सल' बताया। अभिनेता ने अपने बयान में सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि उनके विचारों के लिए उनके खिलाफ जो भी कार्रवाई करनी है, वह कर सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सरकार देश के युवाओं का हौसला तोड़ने, शिक्षण संस्थानों को कमजोर करने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए और कितना आगे जाएगी।
छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का भी किया जिक्र
नसीरुद्दीन शाह इससे पहले भी छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके समर्थन का संबंध जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जुड़े प्रदर्शनों, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित सभाओं और मुंबई में हुए छात्र आंदोलनों से भी बताया गया है। इन मुद्दों पर उनके रुख को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। शाह के ताजा बयान में भी युवाओं, शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवाल प्रमुखता से दिखाई दिए। वहीं, किरण रिजिजू ने उनके शब्दों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और अभिनेता की विचारधारा पर निशाना साधा।
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