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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, मात्र 34 हजार रुपये में बिक गए थे आरोपी, विदेश में नौकरी का मिला था लालच

टाइगर श्रॉफ शूटिंग केस में आरोपियों को कथित तौर पर 34 हजार रुपये और विदेश में नौकरी का लालच दिया गया। जांच में कैलिफोर्निया कनेक्शन, जांगी ऐप, क्यूआर कोड पेमेंट और हथियारों की सप्लाई के सुराग सामने आए हैं।

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Image Source : ANI आरोपी और टाइगर श्रॉफ।

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े कथित शूटिंग मामले की जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अभिनेता को निशाना बनाने के लिए तीन आरोपियों को कथित तौर पर 34 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। इसके अलावा उन्हें विदेश में नौकरी दिलाने का लालच भी दिया गया था। इस पूरे मामले में अनिल पंडित नाम के एक व्यक्ति की भूमिका संदेह के घेरे में है, जिसके कैलिफोर्निया में बैठकर इस नेटवर्क को संचालित करने का शक जताया जा रहा है। हालांकि, मामले में सामने आई इन जानकारियों की पुष्टि जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

तीनों आरोपियों से रातभर हुई पूछताछ

मामले में पकड़े गए तीनों आरोपी फिलहाल कोटा के रेलवे कॉलोनी पुलिस स्टेशन में मुंबई पुलिस की हिरासत में हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने रातभर तीन चरणों में उनसे पूछताछ की, जिसमें जांच से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की बात कही जा रही है। मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह करीब आठ बजे तीनों आरोपियों को सड़क मार्ग से मुंबई ले जाने की तैयारी थी, ताकि वहां मामले की आगे की जांच की जा सके। पुलिस की जांच का प्रमुख बिंदु यह पता लगाना है कि कथित साजिश किसने तैयार की, आरोपियों को हथियार किसने उपलब्ध कराए और इस पूरी योजना को किस तरह अंजाम देने की कोशिश की गई।

34 हजार रुपये का कथित ऑफर और विदेश में नौकरी का लालच

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के बदले कथित तौर पर 34 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। अनिल पंडित पर विदेश से निर्देश देने, पैसों का इंतजाम करने और हथियारों की व्यवस्था कराने का संदेह है। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपियों ने उससे कभी आमने-सामने मुलाकात नहीं की थी। वे कथित तौर पर जांगी ऐप के जरिए संपर्क में रहते थे। आरोप है कि मुंबई में रहने के दौरान आरोपियों को प्रतिदिन पांच हजार से दस हजार रुपये तक ऑनलाइन भेजे जाते थे। पैसों के लेन-देन का सीधा संबंध छिपाने के लिए कथित तौर पर स्थानीय दुकानदारों या अन्य लोगों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों की ओर से ये क्यूआर कोड भेजे जाने के बाद उनके खर्च के लिए रकम ट्रांसफर की जाती थी। पुलिस अब इन लेन-देन और संबंधित खातों की कड़ियों की जांच कर सकती है।

शूटिंग के बाद कपड़े बदले, बाल कटवाकर छिपाई पहचान

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार कथित घटना के बाद आरोपी अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे और लोकल ट्रेन में सवार हुए। दो या तीन स्टेशनों के बाद उतरकर उन्होंने ऑनलाइन टैक्सी बुक की और सूरत की ओर रवाना हुए। इसके बाद वे पुणे-जयपुर ट्रेन में सवार हुए। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान उन्होंने अपने बाल कटवाए और कपड़े भी बदल लिए, ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो सके। कोटा में पकड़े जाने के समय उनका हुलिया बदला हुआ था। पुलिस को उनके बैग से केवल कपड़े मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के पास से कोई हथियार बरामद नहीं होने की बात कही गई है। जांचकर्ता इस संभावना की भी पड़ताल कर रहे हैं कि हथियार रास्ते में कहीं फेंक दिए गए हों। इसके अलावा ऋतिक नाम के एक आरोपी द्वारा चोरी की मोटरसाइकिल का इंतजाम किए जाने की बात भी सामने आई है।

कचरे के ढेर के पास छिपाकर रखे जाते थे हथियार

सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को इंदौर और मुंबई में मौजूद संपर्कों के जरिए हथियार उपलब्ध कराए जाने का संदेह है। कथित तौर पर हथियार सीधे हाथों में देने के बजाय उन्हें किसी सुनसान जगह पर छिपाकर रखा जाता था। इसके बाद आरोपियों को लोकेशन और वीडियो भेजे जाते थे, जिनकी मदद से वे कचरे के ढेर के पास एक बॉक्स में रखे हथियारों तक पहुंचते थे। जांगी ऐप के इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जा रही है। बताया जाता है कि इस ऐप पर अकाउंट बनाने के लिए फोन नंबर या व्यक्तिगत जानकारी देना जरूरी नहीं होता। आरोप है कि बातचीत के बाद आरोपी सिम कार्ड भी फेंक देते थे, ताकि उनकी पहचान और लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो।

अमृतसर के कारोबारी पर हमले से भी जुड़ सकते हैं तार

जांच में एक अन्य पहलू भी सामने आया है। आरोप है कि रेहान और फूल सिंह नाम के दो आरोपियों ने पहले अमृतसर में एक कारोबारी पर हमला किया था। पुलिस इस कथित घटना और मौजूदा मामले के बीच किसी संभावित संबंध की जांच कर सकती है। फिलहाल जांच का दायरा कथित हैंडलर की भूमिका, हथियारों की आपूर्ति, पैसों के स्रोत और आरोपियों की गतिविधियों तक फैला हुआ है। मुंबई पहुंचने के बाद आरोपियों से होने वाली पूछताछ में इन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकेगा कि टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने की कथित योजना के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।

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