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'रॉकस्टार' की वो कव्वाली जिसने रणबीर को बनाया 'जॉर्डन', क्या है 'कुन फया कुन' का रूहानी मतलब, जिसे सुनते ही ठहर जाती है दुनिया

क्या आपको रणबीर कपूर को 'जॉर्डन' बनाने वाली गहरी कव्वाली 'कुन फया कुन' का अर्थ पता है? इस गाने में सिर्फ तुकबंदी नहीं है, बल्कि गहरा भाव भी है, जो जानने के बाद आप समझेंगे कि ये गाना कितना स्पेशल और अलग है।

kun faya kun- India TV Hindi
Image Source : T SERIES/YOUTUBE कुन फया कुन गाने में रणबीर कपूर।

इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी कल्ट क्लासिक फिल्म 'रॉकस्टार' ने रणबीर कपूर को रातों-रात सुपरस्टार का दर्जा दिला दिया। इस फिल्म ने साबित कर दिया था कि रणबीर अव्वल दर्जे के एक्टर हैं। साल 2011 में रिलीज हुई इस फिल्म को लोग 15 साल बाद देखना पसंद करते हैं। ये फिल्म सिनेमाघरों में आते ही छा गई थी और तगड़ी कमाई के दम पर सुपरहिट कहलाई। आज भी ये फिल्म रणबीर कपूर के करियर की सबसे शानदार फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में एआर रहमान ने संगीत दिया था और उनके सभी गाने भी फिल्म की तरह ही हिट साबित हुए। ये गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में टॉप पर होते हैं। इनमें से एक सूफी कव्वाली गाना है 'कुन फाया कुन', जिसे एआर रहमान, जावेद अली और मोहित चौहान, तीनों ने मिलकर गाया। ये गाना सबसे ज्यादा पॉपुलर हुआ और इसे बार-बार सुना जाता है, लेकिन क्या आप इस गाने के सबसे अहम बोल का अर्थ जानते हैं?

फिल्म में किस तरह से पेश किया गया है 'कुन फया कुन'

इस गाने के लिरिक्स इरशाद कामिल ने लिखे थे। यह गाना टी-सीरीज के यूट्यूब चैनल पर मौजूद है और इसे 8.7 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले हैं। इस गाने ने रणबीर कपूर के किरदार को 'जॉर्डन' बनाया और इसे गुनगुनाने के बाद ही उनके किरदार में गहराई आई। फिल्म में दिखाया गया कि जब रणबीर कपूर का किरदार मुश्किल दौर में होता है तो ये गाना उनके लिए सुकून का काम करता है और उन्हें राहत देता है। ठीक रणबीर की तरह ही ये गाना कई लोगों के लिए राहत के पल लेकर आया, चलिए आपको इसका अर्थ बताते हैं।

क्या है ‘कुन फाया कुन’ का मतलब?

'रॉकस्टार' फिल्म की कव्वाली में ‘कुन फाया कुन’ कई बार रिपीट पर गाया गया है। ये तीन शब्द कोई ऐसी ही तुकबंदी नहीं है, बल्कि इनका खास मतलब है। ये शब्द अरबी भाषा से लिए गए हैं और इसका शाब्दिक अर्थ है 'हो… और हो गया'। अब आपको इसका पूरा फलसफा बताते हैं कि ये किस कॉन्टेक्स्ट में कहा गया है। दरअसल इसके जरिए कहा जा रहा है कि जब धरती पर कुछ नहीं था तो अल्लाह ने कहा 'हो' और फिर उनके कहने पर सब कुछ हो गया। इसका सीधा इशारा दुनिया के निर्माण की ओर है, जो ईश्वर के इशारे पर बनी। इसका ये अभिप्राय है कि जब कुछ नहीं था तब भी ऊपर वाला था और जब कुछ नहीं होगा तो भी सुप्रीम पावर ही होगी। इन शब्दों को कुरान शरीफ की आयत से लिया गया है और इसे शुद्ध तरीके से 'कुन फ़याकुन' लिखा जाता है।

क्या हैं गानें के बोल?

कदम बढ़ा ले
हदों को मिटा ले
आजा खाली पल में
पी का घर तेरा
तेरे बिन खाली
आजा खालीपन में
रंगरेज़ा
कुन फायाकुन कुन
फायाकुन फायाकुन
फायाकुन फायाकुन फायाकुन
जब कहीं पे कुछ नहीं, भी नहीं था
वही था, वही था
वही था, वही था
वो जो मुझमें समाया
वो जो तुझमें समाया
मौला वही-वही माया
कुन फायाकुन

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