कहीं जटायू का बलिदान आंखें नम करेगा, तो कहीं दशरथ की आखिरी पुकार रुला देगी, ‘रामायण’ के 7 सीन सीधे दिल में उतर जाएंगे
‘रामायण’ के सात दृश्य दर्शकों को भावनाओं से भर देते हैं। जटायू और दशरथ की मृत्यु आंखें नम करती है, जबकि रावण के दस सिर, राम-परशुराम मिलन और खर-दूषण युद्ध रोमांच पैदा करते हैं।

नितेश तिवारी की ‘रामायण’ आज रिलीज हो गई है, जो सिर्फ भव्य विजुअल्स, विशाल सेट और दमदार एक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि फिल्म में कई ऐसे दृश्य भी हैं जो कहानी के भावनात्मक पक्ष को बेहद खूबसूरती से सामने लाते हैं। कहीं रावण के दस सिरों के जरिए उसके भीतर चल रहे अलग-अलग विचारों और अहंकार की झलक मिलती है, तो कहीं जटायू का बलिदान आंखें नम कर देता है। राम और परशुराम का आमना-सामना हो या वनवास के दौरान अयोध्या से विदाई, फिल्म के कुछ दृश्य ऐसे हैं जो दर्शकों को भीतर तक छूते हैं। आइए जानते हैं ‘रामायण’ के ऐसे ही सात खास सीन, जो आपको कभी भावुक करेंगे तो कभी रोमांच से भर देंगे।
1. रावण के दस सिरों की अलग-अलग सलाह, एक ही मन में कई विचारों का तूफान
फिल्म में रावण के दस सिरों को दिखाने वाला दृश्य बेहद दिलचस्प और प्रभावशाली है। इस सीन में रावण बीच में बैठा नजर आता है और उसके दस सिर एक के बाद एक अलग-अलग रूपों में सामने आते हैं। हर सिर की अपनी आवाज और अपनी सोच है। कोई उसे एक तरह की सलाह देता है, तो कोई दूसरी दिशा में उकसाता है। ये सभी आवाजें मिलकर रावण के भीतर चल रहे विचारों के टकराव और उसके अहंकार को दर्शाती हैं। दृश्य की तेज रफ्तार और हर सिर के अलग अंदाज की वजह से यह सीक्वेंस खास बन जाता है। रावण के दस सिर यहां केवल उसकी शक्ति नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को भी सामने लाते हैं।
2. जटायू की आखिरी सांसें और राम का पिता समान पक्षी को मुखाग्नि देना
जटायू की मृत्यु का दृश्य फिल्म के सबसे भावुक पलों में से एक है। रावण से युद्ध करते हुए जटायू बुरी तरह घायल होकर जंगल में गिर जाता है। कुछ देर बाद राम उसके पास पहुंचते हैं। जटायू उन्हें सीता के अपहरण की पूरी घटना बताता है और फिर अंतिम सांस लेता है। इसके बाद दृश्य और भी भावुक हो जाता है, जब कई पक्षी लकड़ियां लेकर वहां पहुंचते हैं। राम जटायू को पिता समान मानते हुए स्वयं उसका अंतिम संस्कार करते हैं और मुखाग्नि देते हैं। यह दृश्य त्याग, निष्ठा और रिश्तों की उस भावना को दिखाता है, जो खून के रिश्तों से भी आगे जा सकती है।
3. मां सीता को बचाने के लिए जटायू का आखिरी दम तक संघर्ष
जटायू और रावण के बीच युद्ध का दृश्य भी दिल जीत लेता है। जब रावण सीता का हरण कर पुष्पक विमान से जा रहा होता है, तब जटायू उसे रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देता है। वह मां सीता को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। एक दृश्य में जटायू पुष्पक विमान पर पहुंचकर बैठ जाता है और अपना पंजा सीता की ओर बढ़ाता है, मानो उन्हें रावण के चंगुल से छुड़ाना चाहता हो। लेकिन इससे पहले कि वह अपने प्रयास में सफल हो पाता, रावण उस पर हमला कर देता है। जटायू का यह संघर्ष उसके साहस और सीता के प्रति सम्मान को प्रभावी ढंग से दिखाता है।
4. राम और परशुराम का आमना-सामना, बवंडर के बीच हुई विष्णु अवतार की पहचान
राम और परशुराम के मिलन का दृश्य भव्यता और रोमांच से भरपूर है। एक ओर राम की बारात सीता को लेकर अयोध्या लौट रही होती है, वहीं दूसरी ओर तेज बवंडर के बीच परशुराम की एंट्री होती है। इसके बाद दोनों के बीच संवाद शुरू होता है, जो दृश्य को और प्रभावशाली बनाता है। इसी दौरान परशुराम राम की ओर अपना भाला फेंकते हैं, लेकिन राम उसे एक झटके में पकड़ लेते हैं। यह देखकर परशुराम को एहसास होता है कि सामने खड़े राम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वयं विष्णु के अवतार हैं। इस पूरे दृश्य में टकराव, संवाद और पहचान का क्षण दर्शकों को बांधे रखता है।
5. खर-दूषण की सेना के सामने राम का पराक्रम, एक तीर से खत्म हुआ राक्षसों का हमला
शूर्पणखा की नाक कटने के बाद खर और दूषण अपनी विशाल सेना के साथ राम से युद्ध करने पहुंचते हैं। इस युद्ध के दौरान एक ऐसा मोड़ आता है, जब राम, सीता और लक्ष्मण पीछे हटते हुए उस जगह पहुंच जाते हैं जहां पहाड़ी खत्म होती है और आगे गहरी खाई है। ऐसे में राम सीता और लक्ष्मण को सुरक्षित छोड़कर कुछ कदम पीछे जाते हैं। फिर मंत्र के साथ धनुष से एक ऐसा तीर छोड़ते हैं, जिसके साथ उठता बवंडर राक्षसों की पूरी सेना का अंत कर देता है। इसी दौरान राम का संदेश भी सामने आता है कि जब तक राम जीवित हैं, तब तक सीता और लक्ष्मण का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह दृश्य राम के पराक्रम और अपने प्रियजनों की रक्षा के संकल्प को दिखाता है।
6. वनवास के वक्त राम की विदाई, कैकेयी से किया वादा और दशरथ का टूटना
राम के वनवास पर जाने का दृश्य भावनाओं से भरा हुआ है। महल छोड़ने से पहले राम कैकेयी से वादा लेते हैं कि जब वह लौटकर आएंगे, तो पहला निवाला उन्हीं के हाथों से खाएंगे। इसके बाद जब राम अयोध्या से निकलते हैं, तो जनता उन्हें रोकने के लिए रास्ते में खड़ी हो जाती है। तब सीता आगे आकर लोगों को समझाती हैं कि वह पत्नी धर्म निभाने के लिए राम के साथ जा रही हैं और लक्ष्मण भाई धर्म के कारण उनके साथ हैं। बाकी लोगों से वह अयोध्या में रुककर उसकी जिम्मेदारी संभालने की अपील करती हैं। धीरे-धीरे लोग रास्ते से हटते हैं और राम का रथ आगे बढ़ता है। तभी पीछे से आते दशरथ अपने बेटे को जाते देख भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते और बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। यह पल पिता-पुत्र के रिश्ते की पीड़ा को गहराई से सामने लाता है।
7. दशरथ की आखिरी पुकार और नदी पार करते राम का अचानक पीछे मुड़ना
दशरथ की मृत्यु का दृश्य भी दर्शकों को भीतर तक झकझोरने वाला है। एक ओर दशरथ इस पीड़ा में डूबे हैं कि उनके किए पापों की सजा राम को भुगतनी पड़ रही है। उन्हें लगातार यह चिंता सताती है कि वन में उनका बेटा किस हाल में होगा। दूसरी ओर राम नदी पार कर रहे होते हैं। इसी बीच दशरथ अपनी आखिरी सांसें लेते हुए राम का नाम पुकारते हैं। जैसे ही उनकी आवाज गूंजती है, अगले ही दृश्य में राम अचानक पीछे मुड़कर देखते हैं। ऐसा लगता है मानो उन्हें दूर अयोध्या से पिता की पुकार सुनाई दे गई हो। यह दृश्य पिता के अंतिम क्षणों और बेटे से उनके बिछोह को बेहद मार्मिक तरीके से जोड़ता है।
ये भी पढ़ें: 'रामायण' के मेघनाद बने राघव जुयाल, रावण के बेटे बनकर दिखाया रौद्र रूप, पहली झलक में चुराई लाइमलाइट