1. Hindi News
  2. मनोरंजन
  3. बॉलीवुड
  4. एक ही दिन दिखेंगे दो बिल्कुल उल्ट रूप, बॉक्स ऑफिस पर खुद से ही टकराएंगी शबाना आजमी, 40 साल बाद बना दिलचस्प संयोग

एक ही दिन दिखेंगे दो बिल्कुल उल्ट रूप, बॉक्स ऑफिस पर खुद से ही टकराएंगी शबाना आजमी, 40 साल बाद बना दिलचस्प संयोग

दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी की दो फिल्में 'बंटवारा 1947' और 'आवारापन 2' एक ही दिन 14 अगस्त को रिलीज हो रही हैं। 75 की उम्र में वे दो बिल्कुल अलग और दमदार किरदारों में नजर आएंगी।

awarapan and batwara 1947- India TV Hindi
Image Source : STILL FROM AWARAPAN BATWARA 1947 TRAILER शबाना आजमी के दो अलग अवतार।

14 अगस्त को सिनेमाघरों में दो बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं और इन दोनों ही फिल्मों में एक खास चेहरा दर्शकों को नजर आने वाला है। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी इस शुक्रवार को 'बंटवारा 1947' और 'आवारापन 2' के जरिए एक ही दिन दो अलग-अलग अवतारों में पर्दे पर दिखाई देंगी। दोनों फिल्मों के बीच बॉक्स ऑफिस क्लैश देखने को मिलने वाला है। शुरुआती रुझानों के अनुसार 'आवारापन', सनी देओल की 'बंटवारा 1947' से काफी आगे चल रही है। 75 वर्ष की उम्र में अपनी अभिनय यात्रा के इस पड़ाव पर एक ही दिन दो बड़ी फिल्मों का हिस्सा बनने को उन्होंने अपने लिए एक दुर्लभ और सुखद अनुभव बताया है। एक्ट्रेस की जिंदगी में पहले भी ऐसा मौका आया है जब एक ही दिन पर उनकी दो फिल्में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर बड़ा क्लैश देखने को मिला।

40 साल बाद बना ऐसा संयोग

शबाना आजमी के अनुसार करियर के इस दौर में इतनी विविधतापूर्ण भूमिकाएं मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने याद किया कि इससे पहले 1983 में लगभग 40 साल पहले उनके करियर में ऐसा मौका आया था, जब 15 दिनों के भीतर 'अवतार', 'मासूम', 'कामरूप' और 'ये नजदीकियां' जैसी फिल्में रिलीज हुई थीं। उस दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि तब कलाकार एक साथ 8 से 10 फिल्मों में काम करते थे और एक ही दिन में दो-दो शिफ्ट करना बेहद आम बात थी। उन्होंने बताया कि उस जमाने में शशि कपूर की व्यस्तता को देखते हुए उन्हें 'टैक्सी' तक कहा जाता था, क्योंकि वे दिन में चार-पांच शिफ्ट करते थे और उनकी कार ही उनका अस्थाई घर बन गई थी।

'आवारापन 2' में नकारात्मक और प्रभावशाली अवतार

नितिन कक्कड़ के निर्देशन में बनी एक्शन थ्रिलर 'आवारापन 2' में शबाना आजमी एक विशेष भूमिका में दिखाई देंगी। इस फिल्म में वे नफीसा नामक खलनायक का किरदार निभा रही हैं। इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, सुविंदर विक्की और अनिरुद्ध रावल के साथ काम करते हुए उन्होंने अपने किरदार को शांत और प्रभावशाली अंदाज में पेश करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि ताकत और प्रभाव हमेशा शांत रहकर अधिक मजबूती से सामने आते हैं। इस फिल्म के जरिए वे 1982 की सुपरहिट फिल्म 'अर्थ' के 44 साल बाद निर्देशक विशेष भट्ट के पारिवारिक बैनर से दोबारा जुड़ी हैं।

'बंटवारा 1947' में मजबूत और संवेदनशील मां का रूप

राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित नाटक 'बंटवारा 1947' में शबाना आजमी एक मुख्य किरदार निभा रही हैं। इस फिल्म में वे पहली बार सनी देओल के साथ स्क्रीन साझा करती नजर आएंगी। फिल्म में उनका किरदार 'माई' एक ऐसी बुजुर्ग महिला का है जो बेहद स्नेही, मजबूत और संवेदनशील है। असगर वजाहत के नाटक 'जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ही नई' पर आधारित इस कहानी में वे लाहौर स्थित अपनी पुश्तैनी हवेली को विभाजन के बाद भी छोड़ने से इनकार कर देती हैं, भले ही वह मकान भारत से आए एक मुस्लिम परिवार को आवंटित कर दिया गया हो।

विभाजन के दर्द और ऐतिहासिक खामोशी पर विचार

फिल्म के विषय पर बात करते हुए शबाना आजमी ने रेडक्लिफ रेखा खींचे जाने को हमारे इतिहास की सबसे दर्दनाक और भयानक घटनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय जिस तरह की खामोशी की चादर ओढ़ ली गई थी, उसने भले ही उस दौर की पीढ़ी को जीवित रहने और आगे बढ़ने में मदद की हो, लेकिन उसी खामोशी की वजह से आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक त्रासदी के सही प्रभाव और कड़वे सच को पूरी तरह समझ नहीं पाईं।

ये भी पढ़ें: 'बैन लगाने वालों का शुक्रिया', भारत में लगे 10 साल के बैन पर आतिफ असलम ने तोड़ी चुप्पी, बोले- लोग VPN पर सुनते हैं

Latest Bollywood News