'रामायण' में राम की हल्दी रस्म देख कन्फ्यूज हुए लोग, सीता की मौजूदगी ने बढ़ाया सस्पेंस, जानें चुमान और ताजपोशी का कनेक्शन
नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के गाने ‘मंगल रंग’ में भगवान राम पर पीला लेप लगाने वाले दृश्य ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। दर्शक इसे हल्दी, चुमान या राज्याभिषेक की रस्म मान रहे हैं।

नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण: पार्ट 1' रिलीज से पहले ही लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म के गाने और उससे जुड़ी झलकियां दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा रही हैं। हाल ही में मेकर्स ने नया गाना 'मंगल रंग' रिलीज किया, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आ रहे हैं। गाने में राम-सीता के विवाह समारोह के साथ उनके वनवास से पहले के जीवन की कुछ झलकियां भी दिखाई गई हैं। खूबसूरत दृश्यों और पारंपरिक माहौल ने दर्शकों का ध्यान खींचा है, लेकिन इसी बीच एक खास सीन सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया है। इस दृश्य में भगवान राम के शरीर पर पीले रंग का लेप लगाया जाता है और उनके आसपास परिवार की महिलाएं मौजूद दिखाई देती हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह हल्दी की रस्म है या फिर मिथिला की किसी पारंपरिक धार्मिक परंपरा को दिखाया गया है।
राम के हल्दी वाले सीन पर क्यों उठे सवाल?
'मंगल रंग' के एक दृश्य में भगवान राम को एक भव्य पारिवारिक समारोह के बीच बैठे देखा जा सकता है। इस दौरान परिवार की महिलाएं उनके शरीर पर पीले रंग का लेप लगाती हैं और माहौल में उत्सव की खुशी नजर आती है। पहली नजर में कई दर्शकों ने इसे शादी से पहले होने वाली हल्दी की रस्म समझ लिया। हिंदू विवाह परंपराओं में हल्दी समारोह का खास महत्व होता है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन को शुभकामनाएं देने के लिए हल्दी लगाई जाती है। हालांकि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दृश्य में माता सीता की मौजूदगी पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर यह विवाह से पहले की पारंपरिक हल्दी रस्म है, तो इस दृश्य में सीता की उपस्थिति को किस तरह समझा जाए? इसी चर्चा के बीच कुछ लोगों ने दावा किया कि यह दृश्य हल्दी का नहीं, बल्कि मिथिला क्षेत्र में प्रचलित चुमान या चुमावन नाम की परंपरा का हो सकता है। हालांकि फिल्म के निर्माताओं ने अभी तक इस दृश्य में दिखाई गई रस्म की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्या है मिथिला की चुमान या चुमावन रस्म?
चुमान, जिसे चुमावन भी कहा जाता है, मिथिला की पारंपरिक सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल एक रस्म है। इसका आयोजन विवाह जैसे शुभ अवसरों पर किया जाता है। इस रस्म का उद्देश्य दूल्हा-दुल्हन या संबंधित व्यक्ति को बड़ों का आशीर्वाद देना और उनके सुखी जीवन, समृद्धि, दीर्घायु तथा मंगलमय भविष्य की कामना करना होता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार इस अनुष्ठान में सुपारी, हल्दी, दूर्वा घास और लाल धान जैसे शुभ पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें पारंपरिक थाली या पात्र में सजाकर रस्म निभाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों में इस परंपरा को निभाने का तरीका अलग हो सकता है। यही वजह है कि कुछ दर्शक 'मंगल रंग' के दृश्य को चुमान की परंपरा से जोड़कर देख रहे हैं।
क्या राम के राज्याभिषेक से जुड़ा है यह दृश्य?
सोशल मीडिया पर चर्चा का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। कुछ लोगों का मानना है कि गाने में दिखाया गया समारोह राम और सीता के विवाह से संबंधित न होकर भगवान राम के प्रस्तावित राज्याभिषेक की तैयारियों से जुड़ा हो सकता है। रामायण की कथा में राज्याभिषेक का प्रसंग भी महत्वपूर्ण है, जिसमें परिवार और राजपरिवार की परंपराओं का विशेष स्थान है। हालांकि फिलहाल ये सभी व्याख्याएं दर्शकों की अटकलों पर आधारित हैं। फिल्म के मेकर्स ने न तो इस रस्म को हल्दी बताया है और न ही चुमान या राज्याभिषेक से जुड़ा अनुष्ठान होने की पुष्टि की है। इसके अलावा अवध में परंपरा रही है कि राजा की ताजपोशी से पहले उसे उबटन लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। गाने में इनमें से ही किसी एक दृश्य का जिक्र किया गया है जिसे लोग शादी से पहले हल्दी की रस्म समझ रहे हैं। अब फिल्म रिलीज के बाद ही सही कारण पता चलेगा। बता दें, इस गाने के म्यूजिक को लेकर भी सवाल उठे हैं।
रिलीज से पहले चर्चा में 'रामायण'
रणबीर कपूर और साई पल्लवी की मुख्य भूमिकाओं वाली 'रामायण: पार्ट 1' को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता है। 'मंगल रंग' ने फिल्म के पारिवारिक और सांस्कृतिक पक्ष की झलक दिखाई है। अब इस एक दृश्य को लेकर छिड़ी बहस ने गाने को नई चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में यदि निर्माता इस रस्म के बारे में कोई स्पष्टीकरण देते हैं, तो यह साफ हो सकेगा कि पर्दे पर दिखाई गई परंपरा का संबंध राम-सीता के विवाह से है, मिथिला की चुमान रस्म से या फिर किसी अन्य प्रसंग से। फिलहाल, दर्शक अपने-अपने नजरिए से इस दृश्य का अर्थ निकाल रहे हैं।