कौन थे आरएन काओ? रॉ के फाउंडर की कहानी बड़े पर्दे पर लाएंगे करण जौहर, 2028 में रिलीज होगी फिल्म
करण जौहर ने रॉ के संस्थापक आरएन काओ पर फिल्म का ऐलान किया है। नितिन गोखले की किताब पर आधारित यह फिल्म काओ के जीवन और रॉ के पहले मिशन पर केंद्रित होगी, 2028 में रिलीज होगी।

बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर ने एक नई फिल्म का ऐलान कर दिया है। यह फिल्म किसी काल्पनिक जासूस की कहानी नहीं, बल्कि भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ के संस्थापक आरएन काओ की जिंदगी और उनके काम पर आधारित होगी। करण जौहर ने 21 सितंबर को सोशल मीडिया के जरिए इस प्रोजेक्ट की घोषणा की। खास बात यह है कि इसी दिन रॉ की स्थापना के 58 साल पूरे हुए हैं। फिल्म में आरएन काओ के साथ-साथ रॉ के शुरुआती दौर और एजेंसी के पहले मिशन की कहानी को भी दिखाया जाएगा। मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट 11 अगस्त 2028 तय की है।
कौन थे आरएन काओ?
रमेश्वर नाथ काओ को भारत की खुफिया व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण नाम माना जाता है। वह रॉ के पहले प्रमुख और एजेंसी को स्थापित करने वाले अधिकारियों में शामिल थे। रॉ की स्थापना 1968 में हुई थी और काओ ने करीब एक दशक तक इसकी कमान संभाली। 1968 से 1977 तक वह इस एजेंसी के प्रमुख रहे। उनके नेतृत्व में रॉ ने शुरुआती वर्षों में अपनी कार्यप्रणाली और खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने पर काम किया। काओ का करियर रॉ की स्थापना से काफी पहले शुरू हो चुका था। उन्होंने भारत की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया। वह तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सुरक्षा व्यवस्था का भी हिस्सा रहे थे। इसके बाद वह एविएशन रिसर्च सेंटर से जुड़े और इसे स्थापित करने में उनकी भूमिका रही। इसके अलावा वह ज्वाइंट इंटेलिजेंस कमेटी से भी जुड़े रहे।
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1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौर में निभाई भूमिका
आरएन काओ के कार्यकाल में रॉ के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां आईं। 1970 के दशक की शुरुआत में भारत की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम हुए। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी रॉ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। काओ के नेतृत्व में एजेंसी ने उस दौर में अपने शुरुआती वर्षों की जिम्मेदारियों को निभाया। हालांकि काओ की पहचान सिर्फ उनके पद की वजह से नहीं बनी। वह अपनी लो-प्रोफाइल शैली के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी और अपने काम को पर्दे के पीछे रहकर अंजाम दिया। यही वजह है कि उनके बारे में आम लोगों के बीच दूसरे चर्चित खुफिया अधिकारियों की तुलना में काफी कम जानकारी उपलब्ध रही।
पत्रकार नितिन गोखले की किताब पर आधारित होगी फिल्म
करण जौहर की यह फिल्म पत्रकार और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक नितिन गोखले की किताब ‘आरएन काओ: जेंटलमैन स्पाईमास्टर’ पर आधारित होगी। किताब में काओ के करियर, उनके व्यक्तित्व और रॉ के शुरुआती वर्षों के बारे में विस्तार से बताया गया है। फिल्म में इसी सामग्री के आधार पर काओ की कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने की कोशिश की जाएगी। नितिन गोखले ने काओ पर रिसर्च के दौरान यह भी बताया था कि उनके बारे में सार्वजनिक तौर पर बहुत कम सामग्री उपलब्ध थी। काओ ऐसे अधिकारी थे, जिन्होंने लंबे समय तक सुर्खियों से दूर रहकर काम किया। उनकी इसी रहस्यमय और शांत छवि की वजह से उनकी कहानी सिनेमा के लिए भी दिलचस्प विषय बनती है।
रॉ के पहले मिशन पर भी होगी नजर
करण जौहर ने फिल्म की घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि कहानी सिर्फ आरएन काओ की जिंदगी तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें रॉ के गठन के बाद उसके पहले मिशन को भी कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा। यानी दर्शकों को एजेंसी के शुरुआती दौर, उसके सामने मौजूद चुनौतियों और काओ की भूमिका को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से अपूर्व मेहता, अमृतपाल बिंद्रा, आनंद तिवारी और मारीके डी सूजा समेत कई नाम जुड़े हैं। धर्मा प्रोडक्शंस भी इस फिल्म से जुड़ा है। हालांकि अभी फिल्म की स्टारकास्ट और निर्देशन से जुड़ी अन्य जानकारियों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
11 अगस्त 2028 को रिलीज होगी फिल्म
करण जौहर ने फिल्म की रिलीज डेट भी घोषित कर दी है। यह फिल्म 11 अगस्त 2028 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिलहाल फिल्म का टाइटल, कलाकारों की कास्ट और शूटिंग से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन आरएन काओ जैसे ऐतिहासिक किरदार और रॉ के शुरुआती मिशन पर आधारित कहानी ने इस प्रोजेक्ट को घोषणा के साथ ही चर्चा में ला दिया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि करण जौहर और उनकी टीम भारत के इस चर्चित लेकिन लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहे खुफिया अधिकारी की कहानी को किस अंदाज में बड़े पर्दे पर पेश करती है।