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Jailer 2 Review: रजनीकांत का स्वैग बरकरार, म्यूजिक, एक्शन और सरप्राइज कैमियो ने कहानी में फूंकी जान
रजनीकांत की 'जेलर 2' रिलीज हो चुकी है, जिसमें धमाकेदार एक्शन देखने को मिलेगा। नेल्सन दिलीपकुमार की सुपरहिट फिल्म 'जेलर' का सीक्वल 5 कैमियो, शानदार म्यूजिक और दमदार क्लाइमैक्स की वजह से खास बनता है।
'जेलर' का चार्टबस्टर गाना 'हुकुम' रजनीकांत के लार्जर-दैन-लाइफ ऑरा, उनके स्वैग और स्टाइल पर फिट बैठता है। सुपरस्टार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बड़े पर्दे पर क्यों राज करते हैं। उन्होंने दमदार एक्शन, ह्यूमर और मास अपील का एक मनोरंजक मिक्स पेश किया है। किसी हिट फिल्म का सीक्वल बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब पहली फिल्म इतनी शानदार हो कि उसकी कहानी सालों तक याद रहे। हालांकि, डायरेक्टर नेल्सन दिलीपकुमार ने 'जेलर 2' के साथ यह रिस्क उठाया और काफी हद तक अपनी पिछली फिल्म का जादू फिर से बनाने में सफल रहे। फिल्म में मेगास्टार रजनीकांत की सिग्नेचर स्टाइल, मजेदार ह्यूमर और लार्जर-दैन-लाइफ मोमेंट्स को आगे बढ़ाया गया है, जिसने पहली किस्त को हिट बनाया था। साथ ही कहानी में नए ट्विस्ट और रोमांचक सरप्राइज भी जोड़े गए हैं। रजनीकांत की 'जेलर 2' 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सीक्वल में 2023 की ब्लॉकबस्टर के कई जाने-पहचाने चेहरों की वापसी हुई है। साथ ही नए किरदार भी हैं, जो कहानी में नयापन लाते हैं। रजनीकांत की जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस, हाई-एनर्जी एक्शन सीक्वेंस, दमदार डायलॉग्स, कैची म्यूजिक और सरप्राइज कैमियो के साथ यह फिल्म एक मास एंटरटेनर फिल्म है।
जेलर 2 की कहानी
'परिवार के लिए त्याग भी कर सकता हूं और उनके लिए गला भी काट सकता हूं।' ये धांसू डायलॉग फिल्म के अंत में है, जो पूरी कहानी का मतलब एक लाइन में समझा देता है। 'जेलर 2' वहीं से शुरू होती है, जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। टाइगर मुथुवेल पांडियन (रजनीकांत) और उनका परिवार अभी भी अपने बेटे अर्जुन (वसंत रवि) को खोने के सदमे से उबर रहे हैं, लेकिन मूर्तियों की तस्करी करने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने में टाइगर का शामिल होना उसे एक और खतरनाक खेल में खींच लेता है। वर्मन (विनायकन) का दोस्त दिलीप (सूरज वेंजरामूडू) वर्मन की मौत के लिए जिम्मेदार आदमी को ढूंढ रहा है, एक निशान जो उसे टाइगर तक ले जाता है और पुराने जेलर के परिवार को सिंडिकेट के निशाने पर और खींच लेता है।
अपने परिवार पर खतरे के साथ टाइगर हाई अलर्ट पर रहता है। इस बार उसका सामना बोधि कल्पक (एसजे सूर्या), कांथा कल्पक (विद्या बालन) और उनके पिता कल्पक (मिथुन चक्रवर्ती) के लीडरशिप वाले एक खतरनाक सिंडिकेट से होता है। जैसे ही टाइगर अपने परिवार को बचाने और नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश करता है। कहानी नया मोड़ ले लेती है। डायरेक्टर नेल्सन दिलीपकुमार की 'जेलर 2' आने वाले तूफान के पहले की शांति से शुरू होती है। पहला और दूसरा हाफ कहानी से बांधे रखता है। कहानी में कुछ अजीब किरदार है, जिसमें बेरहम और काफी हद तक बेवकूफ गैंगस्टर मूर्ति (नमो नारायण) और मलयाली तस्कर दिलीप (सूरज वेंजरामूडू) शामिल हैं। उनकी अजीब हरकतें और मजाकिया वन-लाइनर्स 'जेलर 2' को एक मनोरंजक राइड बनाता है। नेल्सन ने फिल्म में कमर्शियल कहानी कहने का अपना हुनर दिखाया है। वह टाइगर मूर्ति और योगी बाबू के किरदारों का इस्तेमाल कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए करते हैं। टाइगर के बेटे की मौत किसने और क्यों की, फिल्म का असली विलेन कौन है, टाइगर अपने दुश्मनों को कैसे खत्म करता है और पांचों कैमियो का कहानी में क्या रोल है, इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आपको पूरी फिल्म देखनी होगी।
कैसा है नेल्सन दिलीपकुमार का डायरेक्शन
रजनीकांत फिल्म की सबसे बड़ी हाइलाइट हैं, लेकिन सही जगह पर रखे गए कैमियो इस अनुभव को और भी मजेदार बनाते हैं। हर कैमियो कहानी में नैचुरली फिट बैठता है, न कि सिर्फ स्टार पावर बढ़ाने के लिए जोड़ा गया है। पहली फिल्म की तरह सीक्वल में भी रजनीकांत को ऐसे रोल में दिखाया गया है, जो उनकी उम्र और पर्सनैलिटी के हिसाब से है, जिससे यह पूरी तरह से थिएटर में एंटरटेनर बन जाती है। पिक्चर में बेहद कम ही ऐसे मौके होंगे, जहां आप बोर फील करने लगें। पहला और दूसरा हाफ मजेदार लगता है। 'जेलर' के दोनों भाग के साथ डायरेक्टर नेल्सन ने रजनीकांत के किरदार को बहुत अच्छे से पेश किया। नेल्सन ने साइड कैरेक्टर्स और कैमियो रोल्स के साथ भी न्याय किया है। कहानी के अनुसार नेल्सन का डायरेक्शन तारीफ के काबिल है।
जेलर 2 में क्या अच्छा है
'जेलर 2' बेशक एक्शन-थ्रिलर पसंद करने वालों और रजनीकांत के फैंस के लिए एक जबरदस्त फिल्म है। डायरेक्टर नेल्सन दिलीपकुमार ने इस सीक्वल के साथ एक बार फिर साबित कर दिया है कि कमर्शियल एंटरटेनर के मामले में वह तमिल सिनेमा के सबसे अच्छे कंटेंपररी फिल्ममेकर्स में से एक क्यों हैं। लिखने के नजरिए से 'जेलर 2' में कई ऐसे पल हैं, जो सीटी बजाने लायक हैं और दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। किरदारों को अच्छी तरह से डेवलप किया गया है और हर सीन को इस तरह से दिखाया गया है कि वह आम दर्शकों से जुड़ता है। फिल्म इन पलों को सही समय पर बनाती भी है, जिससे वे और भी असरदार बन जाते हैं। डायरेक्टर ने एक्शन के साथ म्यूजिक को अच्छे से बैलेंस किया है। रजनीकांत की स्टार पावर को समझते हुए, कहानी को इतना दमदार बनाने की कोशिश की है कि दर्शक कहानी को भूल न पाए। सबसे खास बात यह है कि कहानी अपने मकसद पर पूरी तरह टिकी रहती है और दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म में तमन्ना भाटिया के हिट गाने 'कावाला' की भी झलक देखने को मिलती है।
जेलर 2 में कहां चूक हुई
'जेलर 2' की सबसे बड़ी कमी फिल्म के कुछ हिस्सों में इसकी धीमी रफ्तार है। पहले हाफ में कहानी को बनाने और मुथुवेल पांडियन के प्लान को समझाने में समय लगता है। कॉमेडी इन सीन को एंटरटेनिंग बनाती है, लेकिन कुछ हिस्से धीमे लगते हैं और फिल्म की रफ्तार पर असर डालते हैं। हालांकि, कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।
दूसरे हाफ का इमोशनल ड्रामा ट्रैक को धीमा कर देता है। यह हिस्सा खिंचा हुआ लगता है और कहानी के फ्लो पर असर डालता है। शुक्र है फिल्म अपनी रफ्तार वापस पा लेती है और आखिर तक दिलचस्प बनी रहती है।
कुछ सीन में VFX और CGI भी कमजोर हैं और शायद भरोसेमंद न लगें। फिल्म पहले पार्ट की तरह ही कलर टोन और विजुअल स्टाइल को फॉलो करती है, जो इसके ओवरऑल लुक को सूट करता है। हालांकि, कलर ग्रेडिंग कभी-कभी बहुत ज्यादा सैचुरेटेड और रिपिटिटिव लगती है।
रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' के 'बिंदास' गाने में नोरा फतेही है। अनिरुद्ध रविचंदर के कंपोज किए इस गाने में अनिरुद्ध और दीप्ति सुरेश ने अपनी आवाज दी है और इसके लिरिक्स सुपर सुबू के हैं। यह ट्रैक एक डांस नंबर है, जिसमें नोरा हैं, लेकिन उनका डांस परफॉर्मेंस शायद दर्शकों की उम्मीदों पर खरा न उतरे।
जेलर 2 का दूसरा हाफ भी रहा शानदार
इंटरवल ब्लॉक दिलीप के एक सोच से परे ट्विस्ट के साथ हाई नोट पर खत्म होता है, जो दूसरे हाफ के लिए एक्साइटमेंट बढ़ाता है। एसजे सूर्या का बोधि कल्पक टाइगर मुथुवेल पांडियन के लिए एक मजबूत खतरा बनकर उभरता है, जिससे कुछ रोमांचक फेस-ऑफ होते हैं। ये जबरदस्त मुकाबले दर्शकों को बांधे रखते हैं और फिल्म के एक्शन और एक्साइटमेंट को बढ़ाते हैं। हालांकि, कुछ पल दर्शकों को जेलर की याद दिलाते हैं, फिर भी फिल्म भरपूर एंटरटेनमेंट देने में कामयाब रहती है। नेल्सन की सबसे बड़ी खूबियों में से एक यह है कि वह जाने-पहचाने चेहरों को वापस लाते हैं और नए कैमियो लाते हैं। इनमें से ज्दायातर अपीयरेंस सही समय पर होते हैं और इंटरवल के बाद भी मेन प्लॉट से ध्यान हटाए बिना कहानी में मजा और एक्साइटमेंट जोड़ते हैं।
जेलर 2 का म्यूजिक
टेक्निकल फ्रंट पर अनिरुद्ध रविचंदर एक बार फिर अपने म्यूजिक से इम्प्रेस करते हैं। गाने और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म में एनर्जी जोड़ते हैं और रजनीकांत के हीरो वाले पलों को और भी दमदार बनाते हैं। विजुअल्स भी उतने ही इम्प्रेसिव हैं, जो एक्शन और बड़े-से-बड़े पलों को खूबसूरती से कैप्चर करते हैं। कुल मिलाकर ये एलिमेंट्स फिल्म को फैंस के लिए एक ट्रीट और बड़े पर्दे का एक एंटरटेनिंग अनुभव बनाते हैं।
जेलर 2 के एक्टर्स की परफॉर्मेंस
ऋतिक रोशन के आने का शायद उतना असर न हो जितना उम्मीद थी, लेकिन यह फिल्म फिर भी एक एंटरटेनिंग कमर्शियल एंटरटेनर के तौर पर काम करती है। सूरज वेंजरामूडू और एसजे सूर्या अपनी परफॉर्मेंस से इम्प्रेस करते हैं। विद्या बालन भी कम स्क्रीन टाइम के बावजूद अपनी मौजूदगी का एहसास कराती हैं। नमो नारायण अपने करियर के सबसे एंटरटेनिंग रोल में से एक के साथ सबसे अलग दिखते हैं। सूरज वेंजरामूडू के साथ उनके सीन फिल्म के सबसे मजेदार पलों में से हैं, क्योंकि उनकी अलग-अलग पर्सनैलिटी खूब ह्यूमर पैदा करती हैं। राम्या कृष्णन, मिरना, मास्टर ऋत्विक और योगी बाबू फिल्म की कास्ट में शामिल हैं। कुल मिलाकर दमदार परफॉर्मेंस, ह्यूमर और कमर्शियल एंटरटेनमेंट फिल्म को देखने में मजेदार बनाती है। मोहनलाल, शिवा राजकुमार, जैकी श्रॉफ, ऋतिक रोशन और विजय सेतुपति के कैमियो ने अपनी भूमिकाओं को यादगार बना दिया।
जेलर 2 की सिनेमैटोग्राफी
विजय कार्तिक कन्नन की सिनेमैटोग्राफी ने कोयंबटूर और गोवा को उनके सभी विजुअल अपील के साथ कैप्चर किया है, जिससे फिल्म को एक पॉलिश्ड, बड़ा लुक मिला है। हालांकि, दो घंटे और 45 मिनट की 'जेलर 2' को और टाइट एडिटिंग से फायदा हो सकता था खासकर इसके आखिरी हिस्सों में।
जेलर 2 कैसी है
'जेलर 2' एक एंटरटेनिंग कमर्शियल फिल्म है, जिसमें नेल्सन की जबरदस्त राइटिंग, अजीब ह्यूमर और रजनीकांत की जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस है। कुछ प्रेडिक्टेबल मोमेंट्स और कहानी में कुछ छोटी-मोटी कमियों के बावजूद फिल्म अपने रोमांचक सीन और एंटरटेनिंग पलों से दर्शकों को बांधे रखती है। भले ही यह पहली फिल्म जितनी फ्रेश न लगे, लेकिन 'जेलर 2' आपको अंत तक बांधे रखती है। टाइगर मुथुवेल पांडियन के रूप में रजनीकांत एक बार फिर छा गए हैं और एंडिंग तीसरे इंस्टॉलमेंट की संभावना का इशारा देती। कुल मिलाकर फिल्म शानदार है और इसे 5 में से 3.5 स्टार की हकदार है।
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