राजपाल यादव भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं, जिन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और बेमिसाल अभिनय से दर्शकों को दशकों तक हंसाया है। हालांकि, फरवरी 2026 की शुरुआत उनके लिए कानूनी मुश्किलों भरी रही, जब चेक बाउंस के एक पुराने मामले में उन्हें तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। लेकिन संकट की इस घड़ी में फिल्म जगत के दिग्गज जैसे सलमान खान, सोनू सूद और अजय देवगन उनके साथ खड़े नजर आए। 17 फरवरी को भतीजी की शादी के लिए मिली अस्थायी जमानत के बाद, राजपाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे एक सच्चे कर्मयोगी हैं; रिहाई के तुरंत बाद उन्होंने मुंबई में अपनी आगामी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' की शूटिंग शुरू कर दी।
दूरदर्शन का वो दौर और राजपाल का उदय
राजपाल यादव की सफलता की नींव 90 के दशक के आखिर में पड़ी थी। साल 1999 में प्रकाश झा के निर्देशन में बना शो 'मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। यह शो क्लासिक 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' का सीक्वल था, जिसमें राजपाल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। आईएमडीबी (IMDb) पर 8.8 की शानदार रेटिंग रखने वाले इस शो में उन्होंने मुंगेरीलाल के छोटे भाई का किरदार निभाया, जो अपने भाई की ही तरह हसीन और मजेदार सपने देखने का शौकीन था। इस शो की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रघुबीर यादव और राजू श्रीवास्तव जैसे दिग्गजों के बीच भी राजपाल ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।
जब भीड़ ने मनोज बाजपेयी से ज्यादा नौरंगी को सराहा
टेलीविजन की लोकप्रियता का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए राजपाल ने बताया था कि 1999 में जब वे फिल्म 'शूल' की शूटिंग कर रहे थे, तब मनोज बाजपेयी और रवीना टंडन जैसे बड़े सितारे वहां मौजूद थे। लेकिन वहां जुटी भीड़ ने मुख्य सितारों के बजाय राजपाल को देखकर 'नौरंगी! नौरंगी!' चिल्लाना शुरू कर दिया था। उस दौर में उनका जादू ऐसा था कि लोग उन्हें उनके फिल्मी नाम से ज्यादा टीवी के किरदार से जानते थे। इसी शो के एक एपिसोड में उन्होंने 'चाची 420' की तर्ज पर महिला का भेष भी धरा था, जो दर्शकों के बीच आज भी चर्चा का विषय रहता है।
मां की ममता और पर्दे की पिटाई का किस्सा
अभिनय की दुनिया कितनी भी बनावटी क्यों न हो, एक मां के लिए अपने बेटे को तकलीफ में देखना हमेशा मुश्किल होता है। राजपाल ने एक भावुक किस्सा साझा किया था कि 'मुंगेरी के भाई नौरंगीलाल' के एक सीन की शूटिंग के दौरान उन्हें स्क्रिप्ट की मांग पर कई बार थप्पड़ खाने पड़े थे। जब यह सीन टीवी पर प्रसारित हुआ, तो उनकी मां इतनी विचलित हो गईं कि वे कमरा छोड़कर चली गईं और रोने लगीं। राजपाल को उन्हें काफी समझाना पड़ा कि यह सब सिर्फ कैमरे का कमाल है और उन्हें असल में चोट नहीं लगी है।
विवादों के बीच काम का जुनून
9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले के चलते राजपाल यादव की कानूनी लड़ाई फिलहाल जारी है और उनकी अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होनी है। भले ही जेल की सलाखों ने कुछ समय के लिए उन्हें काम से दूर किया, लेकिन उनके भीतर का कलाकार कभी शांत नहीं बैठा। जमानत मिलते ही उन्होंने शाहजहांपुर में पारिवारिक दायित्व निभाया और तुरंत सेट पर लौट आए। 'वेलकम टू द जंगल' जैसी बड़ी फिल्म की शूटिंग शुरू करना यह दर्शाता है कि विवादों के शोर के बीच भी राजपाल अपनी कला के जरिए प्रशंसकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।
ये भी पढ़ें: 'वादिना, इला उनारू', क्या है रश्मिका मंदाना के देवर के वेलकम पोस्ट में कही गई बात का मतलब
महाभारत का 'अभिमन्यु' याद है, कहलाता था छोटा अमिताभ, कभी था सबसे महंगा चाइल्ड आर्टिस्ट, अब जी रहा गुमनाम जिंदगी