दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में हुई डरावनी घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए 174 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बचाई। इसके बाद से सोशल मीडिया पर कैप्टन स्मित मच्छर काफी ट्रेंड कर रहे हैं। साथ ही उनके सरनेम (उपनाम) को लेकर भी एक अलग ही चर्चा छिड़ गई है। इंटरनेट यूजर्स पूछ रहे हैं कि आखिर इस जांबाज पायलट का सरनेम 'मच्छर' (Machchhar) क्यों है और वे किस जाति या समाज से आते हैं?
गूगल सर्च में छाया सरनेम
आपको बता दें कि कैप्टन स्मित का सरनेम मच्छार और मच्छर दोनों लिखा जा रहा है लेकिन पिछले साल एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपना सरनेम 'मच्छर' बताया था। उनका यह सरनेम 'मच्छर' आमतौर पर गुजराती नागर ब्राह्मणों से जुड़ा है। इसके अलावा, मनकड और कुछ अन्य सरनेम भी इस प्रतिष्ठित और बेहद सफल समुदाय से जुड़े हैं- जैसे हाथी, घोड़ा, मंकोडी आदि।
गुजराती नागर ब्राह्मणों के रहस्यमय उपनामों की अनसुनी कहानी
एक पायलट के तौर पर स्मित मच्छार की बहादुरी के साथ-साथ उनके सरनेम ने भी देश के लोगों में जिज्ञासा पैदा की है। गुजरात में अलग-अलग जातियों के बीच कुछ सरनेम ऐसे भी हैं जो हैरान करने वाले हैं। गुजरात में 'मच्छार' सरनेम मुख्य रूप से 2 समुदायों लोहाना और नागर ब्राह्मण में मिलता है। लोहाना समुदाय मूल रूप से कच्छ और पाकिस्तान के सिंध से जुड़ा कारोबारी तबका है। 19वीं सदी में ये मुंबई में व्यापार के सिलसिले में आकर बसे।
Image Source : ptiसैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर कैप्टन स्मित मच्छर की सैंड आर्ट बनाई।
वहीं,नागर ब्राह्मण सौराष्ट्र का यह समुदाय कलम और कागजात का धनी रहा है। मुगलों और अंग्रेजों के दौर में इस समाज के लोग मुंशी, लेखक और शिक्षक रहे। गुजराती साहित्य और आजादी के आंदोलन में नागरों का दबदबा रहा। यह समाज खुद को प्रशासनिक कार्यों और पढ़ाई-लिखाई से ही जोड़कर देखता आया है। यानी 174 यात्रियों की जानें बचाने वाले कैप्टन स्मित की बहादुरी जितनी अनोखी है, उनके सरनेम की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है।
क्या है 'मच्छर' सरनेम का असली मतलब?
- इस गुजराती सरनेम के इतिहास पर लिखी किताबों की मानें तो इसकी 3 मुख्य वजह सामने आती हैं। गुजराती शब्द 'मत्सर' से यह बिगड़कर 'मच्छार' और 'मच्छर' बना, जिसका मतलब ईर्ष्या या जलन होता है। माना जाता है कि जो परिवार मच्छरों की बहुतायत वाले इलाके में रहते थे, उन्हें पहचान के लिए यह सरनेम मिला।
- इसके अलावा किसी दुबले-पतले या छोटे कद के इंसान को मजाकिया लहजे में यह नाम मिला हो।
- वहीं, 1960 के दशक का एक किस्सा भी मशहूर है, जब पूर्व सांसद जयसुखलाल हाथी का सम्मान 'मच्छार' सरनेम वाले एक व्यक्ति ने किया था। उस दौर में मजाकिया लहजे में खूब चुटकी ली गई थी कि 'क्या जमाना आ गया है, हाथी का सम्मान एक मच्छर कर रहा है।
- इसके अलावा 'मच्छर' शब्द के कई अर्थों में से एक अर्थ 'जोश' या 'जुनून' भी है। इसके लिए 'भगवद गोमंडल कोश' के वॉल्यूम 7, पेज नंबर 6873 का संदर्भ लिया जा सकता है। यह गुजराती भाषा का एक प्रामाणिक विश्वकोश (encyclopaedia) है।
- कैप्टन स्मित मच्छर ने यह साबित कर दिया है कि उनका सरनेम काफी अर्थपूर्ण है और उन्होंने इसे पूरी तरह से आत्मसात किया है।
Image Source : ptiमुंबई में कैप्टन स्मित के घर के बाहर स्थानीय लोग और शुभचिंतक राष्ट्रीय झंडे और उनकी तस्वीरें लिए हुए नारे लगा रहे हैं।
गुजराती सरनेम इतने अनोखे क्यों होते हैं?
गुजराती नागर ब्राह्मणों, खासकर सौराष्ट्र के वडनगर नागरों के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि उनके सरनेम बहुत ही अनोखे और अलग तरह के होते हैं। ज्यादातर ब्राह्मण सरनेम काफी गंभीर लगते हैं, जैसे शर्मा, मिश्रा, त्रिपाठी, त्रिवेदी, भट्ट, दवे, व्यास, पांड्या वगैरह। लेकिन नागर सरनेम की लिस्ट अचानक बिल्कुल अलग मोड़ ले लेती है। आप ऐसे नागर लोगों से मिल सकते हैं जिनके सरनेम हाथी, घोड़ा, मच्छर, मंकड़, मंकौड़ी या जुआ हैं।
वहीं, आज पीएम मोदी ने भारत के बहादुर पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने स्मित की हिम्मत की तारीफ की और उन्होंने उनके जल्द ठीक होने की कामना की।
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