बस्तर ने बंदूक की जगह चुना विकास, लेकिन कैसे पूरा हुआ नक्सलवाद के रेड कॉरिडोर से विकास के गलियारे तक का सफर
बस्तर आज विकास की राह पर आगे निकल चुका है। पीएम मोदी ने भी बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाई। हालांकि आज से कुछ साल पहले बस्तर में नक्सलवाद अपने चरम पर था। यहां पर लोगों का निकलना तक मुश्किल था। हालांकि अब बस्तर नक्सलवाद के रेड कॉरिडोर से निकलकर विकास को अपना रहा है।

दीपावली के खास पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार बस्तर का दौरा किया। वैसे तो पीएम मोदी हर बार अपनी दिवाली देश के जवानों के साथ मनाते हैं, लेकिन पीएम मोदी का ये बस्तर दौरा कई मायनों में खास है। इसकी वजह ये है कि कभी ये पूरा इलाका नक्सल प्रभावित था, लेकिन अब 31 मार्च 2026 को इस पूरे एरिया को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। यही वजह है कि गृह मंत्री अमित शाह भी 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के बाद यहां पर पहुंचे थे और उन्होंने जवानों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया था। बस्तर के इस इलाके में जहां पहले कई सारी चुनौतियां थीं, तो वहीं अब यह इलाका विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। ये पूरा रेड कॉरिडोर यानी नक्सल प्रभावित एरिया देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा चैलेंज था, इसलिए सरकार ने इसे नक्सल मुक्त बनाने कि लिए बाकायदा मिशन मोड पर काम किया। सरकार ने 24 अगस्त 2024 से लेकर 31 मार्च 2026 तक बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाया। इसके तहत नक्सलियों को ढूंढा गया और उनको एलिमिनेट किया गया।
नक्सली हमलों में हजारों जवानों की गई जान
दरअसल, साल 2010 में करीबन 1936 बड़े केसेस दर्ज हुए, जिसमें कई वायलेंट इंसिडेंट थे। नक्सलियों ने बेहद शातिर तरीके से सिक्योरिटी फोर्सेस को निशाना बनाया। 720 सिविलियंस की इसमें डेथ हुई थी। 2014 तक करीबन 17542 ऐसे इंसिडेंट्स हुए जो कि काफी अग्रेसिव थे, वायलेंट थे। 1913 सिक्योरिटी फोर्सेस के जवान इसमें वीरगति को प्राप्त हुए और करीबन 5000 के लगभग इसमें सिविलियन की मौत हुई। नक्सलियों के पास जो हथियार थे, उनमें करीब 92 परसेंट हथियार पुलिस और सीएपीएफ से लूटे गए थे। इसके अलावा कई इधर-उधर से स्मगलिंग करके लाए हुए थे।
केंद्र ने नक्सलवाद को खत्म करने की ठानी
साल 2015 में ये पॉलिसी लगभग पूरी तरीके से शिफ्ट हुई। ये तय हो गया कि अब नक्सलियों को पूरी तरह से उखाड़ फेंका जाएगा। एक तरफ सिक्योरिटी चैलेंज था, डेवलपमेंट चैलेंज था और नक्सलियों से बातचीत और कोऑर्डिनेशन करना भी बेहद जरूरी था। सरकार का फोकस बिल्कुल क्लियर था, इसलिए फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट भी एंटी नक्सल ऑपरेशन में देखा गया और फिर उसके बाद करीबन 4289 करोड़ रुपये का स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस दिया गया। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करने के लिए करीबन 1761 करोड़ रुपये सैंक्शन किए गए। सिक्योरिटी के लिए 2014-15 में करीबन 3805 करोड़ रुपये के लगभग फंड रिलीज किया गया।
ग्राउंड पर कैसे की गई तैयारी?
इसके साथ-साथ चारों तरफ सिक्योरिटी ग्रिड तैयार किया गया, जिसमें 663 नए पुलिस स्टेशन तैयार किए गए। पहले 2014 से पहले ये करीबन 66 की संख्या में थे। इसके अलावा करीबन सीएपीएफ के 408 नए सिक्योरिटी कैंप्स को एस्टैब्लिश किया गया। 68 के लगभग ऐसे हेलिपैड तैयार किए गए, जहां पर नाइट लैंडिंग भी हो सके। वहीं 400 से ज़्यादा बुलेटप्रूफ गाड़ियां और ब्लास्ट प्रूफ व्हीकल मुहैया करवाए गए। बड़े हॉस्पिटल जो कि वहां के स्थानीय लोगों के लिए और साथ में सिक्योरिटी फोर्सेस के इलाज के लिए काम आ सके, उसकी भी तैयारी की गई। मूवमेंट साधारण तौर पर अच्छी हो, मोबिलिटी हो, इंटेलिजेंस गैदर किया गया और फिर उसके बाद सभी सिक्योरिटी फोर्स और इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज के बीच में कोऑर्डिनेशन सेट अप किया गया।
सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन्स को दिया अंजाम
सिक्योरिटी फोर्स जिसमें कोबरा, सीआरपीएफ, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड जो कि डीआरजी छत्तीसगढ़ पुलिस की है, स्पेशल टास्क फोर्स इन सब को मेन फोकस तरीके से और इक्विप्ट किया गया। इसमें यूएवीज, ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, एआई बेस्ड डेटा एनालिसिस का भी बड़ा इंपोर्टेंट रोल है। लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, साइंटिफिक कॉल लॉग एनालिसिस और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग करते हुए ऑपरेशन की शुरुआत की गई। पहले ऑपरेशन चक्रबंधा था। उसके बाद हुआ ऑपरेशन भीमबर्ग हुआ। लेकिन शुरुआत अग्रेसिव ऑपरेशन लॉन्च किया गया, ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म के बाद ऑपरेशन डबल बुल और फिर बारी आई ऑपरेशन ऑक्टोपस की।
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने तोड़ी नक्सलवाद की कमर
नक्सली इस समय बहुत प्रभावी तरीके से सिक्योरिटी फोर्सेस के साथ अटैक कर रहे थे, उनका पीछा कर रहे थे। लेकिन ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने इस पूरे रीजन में अग्रेसिवली नक्सलियों की कमर तोड़ दी। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत न केवल 30 नक्सली मार गिराए गए बल्कि 3000 के लगभग नक्सलियों ने सरेंडर भी किए और ये लगातार बढ़ता रहा। इनको जो फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रहे थे उसको एनआईए ने तोड़ा। नक्सलियों के करीबन 40 करोड़ के लगभग एसेट को दिसंबर 2025 तक सीज किया। ईडी ने भी करीबन 12 करोड़ तक की संपत्ति सीज की। स्टेट एजेंसीज और स्टेट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज ने करीबन 40 करोड़ के लगभग अलग-अलग संपत्तियां सीज कीं। इस दौरान 111 लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्ट या एलडब्ल्यूई नक्सली केसेस को इन्वेस्टिगेट किया गया।
इस समय एनआईए के पास खुद करीबन 112 केसेस हैं और 100 चार्जशीट फाइल हो चुकी हैं। इस दौरान चुनौती सिर्फ इस बात की नहीं थी कि नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म करना है, बल्कि जो नक्सली मेनस्ट्रीम में जुड़ना चाहते हैं, उनको मेन धारा से जोड़ना भी एक बहुत इंपोर्टेंट काम था। इसलिए गृह मंत्रालय के द्वारा ग्रांट हायर रैंक कैडर को 5 लाख रुपये इमीडिएट दिए जाने की घोषणा हुई। इसके अलावा अदर कैडर के नक्सलियों को 2.5 लाख रुपये के मंथली स्टाइपेंड और करीबन 26 महीने तक 10 हजार रुपये, सरेंडर के इंसेंटिव के तौर पर एडिशनल 50 हजार देने की घोषणा की गई। इसके जरिए जो नक्सली या फिर उनके डर से जो लोग छुपे हुए थे, वो सामने आए और उन्होंने संपर्क करना शुरू किया।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को किया गया सपोर्ट
इसके अलावा सरेंडर कैडर्स को स्किल डेवलपमेंट, एजुकेशन, हाउसिंग, लाइवलीहुड इन सब में सपोर्ट किया गया। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में करीबन 2337 नक्सलियों ने सरेंडर किया। 2024 में करीबन 3977 नक्सली कैडर ने सरेंडर किया। इस तरह 2024 से लेकर 31 मार्च 2026 तक नक्सलियों ने सरेंडर किया। इस दौरान बस्तर रीजन में 3 हजार सरेंडर करने वालों को रिहैबिलिटेट भी किया गया। इनमें सरेंडर करने की सबसे बड़ी घटना 28 जुलाई 2026 को हुई जब सोलह नक्सलियों ने राची में सरेंडर किया। उसके अलावा अलग-अलग जगहों से भी सरेंडर की बड़ी खबरें आईं। यहां तक कि अपने हथियारों को भी उन्होंने एजेंसीज को सौंप दिया। 39 जुलाई 2026 में आठ बड़े नक्सलियों ने बीजापुर पुलिस स्टेशन में सरेंडर किया, जिनके ऊपर लाखों के इनाम थे।
सरकार ने इलाके में बढ़ाई कनेक्टिविटी
अब सरकार के लिए इसके साथ सबसे बड़ी चुनौती थी रोड कनेक्टिविटी और साथ में विकास करने की। इसके लिए सबसे बड़ा खतरा IED था। जब भी पहले हाइवे बनता था, तो नक्सली 100KG या उससे ज़्यादा की IED रोड के अंदर लगा देते थे। इसके बाद वह सिक्योरिटी फोर्सेस को इसी IED के जरिए निशाना बनाते थे। लेकिन सरकार ने करीबन 15189 किलोमीटर का रोड कंस्ट्रक्शन का प्लान तैयार किया। आज बस्तर में जहां पीएम मोदी पहुंचे, उसी जगह पर करीबन 3240 किलोमीटर का पूरा रोड कंस्ट्रक्ट करके यहां पर मार्केट, स्कूल, हॉस्पिटल, गवर्नमेंट सर्विसेज के लिए तैयारी की गई। इसमें मोबाइल टावर्स लगाए गए, जिससे हर जगह मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई गई। इसके साथ ही डिजिटल एजुकेशन के साथ इस बात पर फोकस रखा गया कि वहां पर लोगों को डिजिटल एजुकेशन भी मिले। साथ में टेक्नोलॉजी के जरिए बैंक और बैंक के एटीएम से लेकर बैंकिंग सुविधाएं मुहैया हो सकें।
विकास की राह पर निकल पड़ा बस्तर का इलाका
इलाके को नक्सल फ्री करने के साथ-साथ सरकार का दूसरा कदम था वहां पर विकास करना, लोगों को पढ़ाई- लिखाई, एजुकेशन और साथ में स्पोर्ट्स के लिए मोटिवेट करना, और अब वह सफल हो पाया है। हम आपको ये भी बता दें कि वहीं के सन ऑफ द सॉयल जैसे डीआरजी हैं। 2017 में बस्तरिया बटालियन भी तैयार की गई थी, जिसमें करीबन 1143 लोग थे। 400 लोकल यूथ रिक्रूट किए गए जो कि बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा एरिया से थे। इन लोगों ने भी काफी स्ट्रेंथन किया और आगे बढ़ने में मजबूती प्रदान की। साधारण शब्दों में हम ये कह सकते हैं कि 60 सालों से चल रहा नक्सली बस्तर रीजन से पूरी तरह से समाप्त हो चुका है, खत्म हो चुका है। अब उनके विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। पहले 136 डिस्ट्रिक्ट नक्सल प्रभावित थे, लेकिन अब इनकी संख्या ज़ीरो हो चुकी है। बस्तर रीजन में गन कल्चर से खत्म हो गया है और अब यह इलाका विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
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