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'खतरा अभी टला नहीं, जंगलों से नक्सली मिट गए, दिमागी नक्सली मौजूद', बस्तर में जवानों के बीच बोले पीएम मोदी

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Nov 08, 2026 12:32 pm IST,  Updated : Nov 08, 2026 12:56 pm IST

पीएम मोदी ने कहा कि जब आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है तो बाहरी दुश्मन कुछ नहीं कर पाता है। जब आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है तभी बाहरी दुश्मन हावी होता है। वे जवानों के बीच दिवाली समारोह मनाने पहुंचे हैं।

PM Modi- India TV Hindi
पीएम मोदी Image Source : X@NARENDRAMODI

बस्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में जवानों के बीच अपने संबोधन में कहा कि नक्सलवाद पर जीत हासिल करने के बाद ये पहली दिवाली है। मैं सभी जवानों को शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा कि जब आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है तो बाहरी दुश्मन कुछ नहीं कर पाता है। जब आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है तभी बाहरी दुश्मन हावी होता है। उन्होंने नक्सलवाद पर जीत के लिए जवानों के शौर्य की तारीफ की बलिदान को नमन किया।

पीएम मोदी ने कहा कि एक समय था कि जितने नक्सली मारे जाते थे उससे ज्यादा संख्या में हमारे वीर जवान शहीद होते थे। नक्सली संगठनों के मुखिया जश्न मनाते थे। दुर्भाग्य से तब की सरकारों द्वारा नक्सलवाद को लाइलाज बीमारी बताकर छोड़ दिया गया था। इसे स्वीकार कर लिया गया था कि ये तो ऐसे ही चलता रहेगा। 

साथियों कोई भी देश अपने दुश्मनों के लिए 'ऐसे ही चलता रहेगा' के अप्रोच से नहीं चलता है। देश को आगे बढ़ाने के लिए दुश्मनों को बुलंद हौसलों के साथ कुचलना ही होती है। इसके लिए जिस राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी थी वह कमी 2014 में दूर हुई। आपने इस प्रधान सेवक को मां भारती की सेवा का मौका दिया। 2014 के बाद हालात और आंकड़े बदलने लगे। हमारे यहां नक्सलियों से ज्यादा संख्या में जवानों के माने जाने की चर्चा रही थी। पिछले 47 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि एक साल में सीआरपीएफ के एक भी जवान को जान नहीं गंवानी पड़ी। यह आपके (जवानों) शौर्य साहस और संयम की जीत है। सफलता के लिए सही नीयत और सही नीतियां जरूरी है।

पीएम मोदी ने कहा, 'पहले की सरकारों ने सुरक्षा बलों के हाथ बांध रखे थे। हमने हर निर्णय लेने की आजादी दी। वामपंथी उग्रवाद को जो सपोर्ट मिलता था हमने उसे रोकने का भी काम किया। हम एक बड़े लक्ष्य को लेकर चल रहे है। हमारा लक्ष्य था कि किसी मां की गोद सूनी न हो। किसी युवा का भविष्य बर्बाद न हो। इसलिए जबतक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो गया। हम संकल्प के साथ लगातार लगे रहे। कोई प्रचार-प्रसार नहीं। कोई दिखावा नहीं। हमने संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी।'

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