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Explainer: भारतीयों पर चढ़ा सोने का बुखार! महंगा होने के बावजूद नहीं रुकी खरीदारी, ETF और डिजिटल गोल्ड में झोंक दिया पैसा

भारत में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों की खरीदारी रुकने का नाम नहीं ले रही। सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी और सेस बढ़ा दिया, फिर भी ज्वेलरी शॉप्स, गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

गोल्ड में निवेश के लिए...- India TV Hindi
Image Source : CANVA गोल्ड में निवेश के लिए टूट पड़े भारतीय निवेशक

भारतीयों का सोने के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को लगभग दोगुना किए जाने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में आग लग गई है। इसके बावजूद, देश भर के सर्राफा बाजारों और ज्वेलरी शोरूम में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि लोगों ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) और डिजिटल गोल्ड में भी जमकर पैसा झोंका है।

दरअसल, सरकार ने 13 मई, 2026 से सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5% से बढ़ाकर 10% कर दिया है। इसके साथ ही एग्रीकल्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को भी 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया गया है। इस तरह कुल इंपोर्ट ड्यूटी अब बढ़कर 15% हो गई है। इस फैसले का असर यह हुआ कि भारतीय रुपये में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। जो 24 कैरेट सोना पहले ₹1,47,160 प्रति 10 ग्राम पर मिल रहा था, वह इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के तुरंत बाद 10% महंगा होकर सीधे ₹1,62,120 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। हैरान करने वाली बात यह है कि 13 मई को जो सोना बिका, वह देश के पुराने रिजर्व (भंडार) से था, इसके बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें तुरंत बढ़ा दी गईं।

पीएम की अपील का भी नहीं हुआ असर?

कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी। भारत अपनी जरूरत का 90% सोना विदेशों से आयात करता है। हर साल भारत 700-800 टन सोना आयात करता है, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 में देश के खजाने पर 72 अरब डॉलर का भारी बोझ पड़ा। यह कच्चे तेल के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा आयातित आइटम है। लेकिन, कीमतों के प्रति संवेदनशीलता और शादियों के सीजन के कारण भारतीय उपभोक्ताओं ने इस अपील और महंगे दामों की परवाह न करते हुए फिजिकल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों रूपों में रिकॉर्ड तोड़ सोने की खपत की। 

फिजिकल गोल्ड, ETF और डिजिटल गोल्ड: कहां क्या हुआ?

  1. फिजिकल गोल्ड: ग्राहकों को इंपोर्ट ड्यूटी अलग से नहीं देनी होती, क्योंकि ज्वेलर इसे सोने के भाव में ही जोड़ देते हैं। कीमतों में अचानक उछाल के बाद शोरूम पर शादियों की खरीदारी के लिए भारी भीड़ देखी गई।
  2. गोल्ड ETFs: म्यूचुअल फंड्स द्वारा ऑफर किए जाने वाले गोल्ड ईटीएफ की कीमतों में यह बदलाव थोड़ा रुककर रिफ्लेक्ट होगा, इसलिए निवेशकों ने तुरंत पोजीशन बनाने के लिए ईटीएफ में पैसा लगाया।
  3. डिजिटल गोल्ड: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और रिफाइनर्स के जरिए डिजिटल गोल्ड यूनिट्स की भी जमकर शॉर्ट-टर्म खरीदारी की गई।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, रुपये के अवमूल्यन और हाई इंपोर्ट ड्यूटी ने बाजार में अनिश्चितता जरूर बढ़ाई है, लेकिन सोना आज भी सबसे भरोसेमंद एसेट है। वहीं, मालाबार ग्रुप के चेयरमैन एम पी अहमद का मानना है कि इस ड्यूटी रिवीजन से पहली बार खरीदने वाले और निवेश के उद्देश्य से आने वाले ग्राहक कुछ समय के लिए रुककर रणनीति बदल रहे हैं।

लाइट वेट ज्वेलरी और पुराने सोने के एक्सचेंज का बढ़ा चलन

महंगे सोने की वजह से अब लोग भारी ज्वेलरी के बजाय हल्के वजन वाले गहने खरीद रहे हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहक बजट बचाने के लिए कम वजन की ज्वेलरी पसंद कर रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि खरीदारी करते समय हॉलमार्क और क्वालिटी का ध्यान जरूर रखें। ज्वेलर्स सलाह देते हैं कि लाइट वेट ज्वेलरी खरीदते समय उसकी मजबूती जैसे क्लैस्प, प्रोंग्स और लिंक्स की जांच कर लेनी चाहिए ताकि वह लंबे समय तक टिक सके। इसके अलावा, अब बाजार में पुराने सोने को बदलकर नई ज्वेलरी लेने का चलन सबसे प्रमुख मोड बन गया है। पुराना सोना एक्सचेंज करते समय आपके पास ओरिजिनल इनवॉइस (बिल) और सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है, अन्यथा मेकिंग चार्ज और मौजूदा मार्केट रेट्स के हिसाब से कटौती ज्यादा हो सकती है।

डायमंड ज्वेलरी पर भारी डिस्काउंट

इस शादी सीजन में ज्वेलर्स डायमंड ज्वेलरी पर भारी डिस्काउंट और जीरो मेकिंग चार्ज जैसे ऑफर दे रहे हैं। डायमंड ज्वेलरी की कीमत में डिजाइन और क्राफ्ट्समैनशिप शामिल होती है, जिससे डिस्काउंट की गुंजाइश बनती है, जबकि प्योर गोल्ड के दाम डेली रेट्स से बंधे होते हैं। हालांकि, ग्राहकों को सावधान रहना चाहिए क्योंकि देश के 280 से अधिक जिलों में प्योर गोल्ड का एक्सचेंज और बायबैक तो आसान है, लेकिन डायमंड ज्वेलरी के बायबैक नियम और वैल्यूएशन काफी अलग हो सकते हैं।

पुराना सोना बेचने पर टैक्स का बड़ा गणित

अगर आप पुराना सोना या ईटीएफ बेचकर नया सोना खरीदने जा रहे हैं, तो मुनाफे पर लगने वाले टैक्स को नजरअंदाज न करें। यदि सोना खरीद के 1 साल के भीतर बेचा जाता है, तो पूरा मुनाफा आपकी इनकम में जोड़कर आपके टैक्स स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स किया जाएगा। वहीं, फाइनेंस एक्ट 2024 के नए नियमों के मुताबिक, यदि फिजिकल गोल्ड 24 महीने (2 साल) से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचा जाता है, तो बिना इंडेक्सेशन के लाभ के 12.5% की दर से टैक्स लगेगा। 

टैक्स बचाने का क्या है रास्ता?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर आप सोने की बिक्री से हुए इस भारी मुनाफे पर टैक्स बचाना चाहते हैं, तो धारा 54F के तहत उस पैसे को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी (मकान) में निवेश कर सकते हैं। जिन लोगों के पास केवल एक ही आवासीय मकान है, वे सोने की बिक्री से मिली पूरी शुद्ध राशि को बिक्री के 2 साल के भीतर नया मकान खरीदने में या 3 साल के भीतर मकान बनवाने में निवेश कर सकते हैं। ऐसा करने पर पूरा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स फ्री हो जाएगा, हालांकि इसकी अधिकतम सीमा ₹10 करोड़ तय की गई है।