"मोदी कहीं नहीं जायेगा", बैनर लेकर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए क्यों पहुंचे पशुपालक? 25 साल की कहानी जानेंगे तो करेंगे तारीफ
गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' (BBBRC) के पशु फार्म के दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के एक समूह से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान वहां "मोदी नहीं जाएंगे" के नारे सुनाई दिए।

शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बनासकांठा के भीलड़ी में भारत बोवाइन ब्रीडोंग एन्ड रिसर्च सेंटर पहुंचे तो पुरे बनासकांठा से पशुपालक महिलायें हाथों में बैनर लेकर उनके स्वागत के लिए पहुंची, जिन पर लिखा था "मोदी कहीं नहीं जायेगा"। "मोदी तब तक नहीं जायेगा, जब तक भारत विश्व की टॉप इकोनॉमी नहीं बन जाता"। क्या प्रधानमंत्री मोदी के विरोधी ये समझ पाएंगे कि ऐसा तो मोदी ने क्या कर दिया बनासकांठा के लिए जो इस जिले के पशुपालकों में उनके लिए इतनी दिवानगी पैदा हो गयी। इसे समझने के लिए 25 साल पीछे जाना होगा। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने तब तमाम प्रकार की विपत्तियों से घिरा हुआ बांसकांठा गुजरात के सबसे पिछड़े जिलों में से एक था लेकिन आज 25 साल बाद बनासकांठा की प्रगति की यात्रा से सम्बंधित आंकड़े ये गवाही देते हैं कि यदि राज्य और देश में एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व और पशुपालकों का संगठन मिलकर चाहें तो विकास की नयी कहानी लिख सकते हैं। मोदी ने इसके लिए बनास डेरी को जरिया बनाया, जिसके विकास का सीधा सीधा लाभ पशुपालको को क्या मिला ये खुद ही पढ़ें-
पीएम मोदी ने बदल दी बनासकांठा के लोगों की जिंदगी
पहले 35 सालों में बनास डेयरी के साथ जुड़े पशुपालकों की प्रति माह आय 22.88 करोड़ थी लेकिन नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए 12 वर्षों में प्रति माह आय बढ़ कर 288 करोड़ हुई। नरेंन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 12 वर्षों में प्रति माह आय 1400 करोड़ तक पहुंच गयी है। ये आंकड़े विकास की मैक्रो-लेवल पर तस्वीर तो प्रस्तुत करते हैं लेकिन यदि माइक्रो-लेवल पर देखें तो पता चलेगा कि सिर्फ एक डेयरी कैसे एक वीरान और लगातार प्राकृतिक आपदाओं को झेलने वाले इलाके की तस्वीर बदल सकती है बस इसके लिए चाहिए सही दिशा दिखाने वाला सबल नेतृत्व जो कोऑपरेटिव मूवमेंट को एक क्रांति में बदल दे।
ऐसा अकसर देखा गया है की माँ का ध्यान उस बच्चे पर सबसे ज्यादा होता है जो सबसे कमजोर होता है.. इसलिए हमने नोटिस किया की मुख्यमंत्री रहते हुए भी मोदी ने "ज्योतिग्राम योजना" और "कृषि महोत्सव" सहित कई रिवोल्यूशनरी प्रोजेक्ट्स की शुरुवात भी बनासकांठा से ही की, इसके जरिये आपदा से जूझते किसानो को मोदी ने जहाँ नए अवसर दिए वहीँ उन्हें नयी सोच भी दी जिसका प्रभाव ये देखा गया की लोगों में वो इनोवेटिव आइडियाज़ पॉपुलर भी हुए जैसे, ड्रिप इरिगेशन सिंचाई पद्धति, आज बनासकांठा में 80 प्रतिशत से ज्यादा किसान ड्रिप इरिगेश या स्प्रिंकलर टेक्निक्स का प्रयोग खेती के लिए कर रहे हैं।
बनासकांठा में उगाए जा रहे हैं ड्रैगन फ्रूट
अब इसका क्या परिणाम हुआ उसका उदाहरण देख लीजिये 2005 में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र मे उन्नति के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने कृषि महोत्स. प्रमोट की गयी ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई पद्धति का सबसे ज्यादा फायदा उठाने से इस सूखा प्रभावित क्षेत्र में अनार और ड्रैगन फ्रूट जैसे फल भी आज भरपूर उगाये जा रहे हैं। मोदी के इस प्रयास को सफल बनाने का श्रेय जाता है बनास डेयरी को क्योकि जिले के तमाम किसान डेयरी के सभासद हैं जिन्हें डेयरी के माध्य्म ड्रिप इरिगेशन के फायदे समझाना बहुत ही आसान हो गया।
पशुओं के वैक्सीनेशन से हआ बड़ा अंतर
इसी तरह नरेंद्र मोदी ने कृषि महोत्सवों के दौरान पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्हें स्वस्थ रखने पर बहुत जोर दिया, पशुओं के लिए वैक्सीनेशन अभियान शुरू किये गए। शुरुआत में वैक्सीनेशन का विरोध ग्रामीण इलाकों में देखा गया था उस समय शुरुआत में लोग अपने पशुओं को टीका लगवाने को तैयार नहीं थे। तब गुजरात में कोऑपरेटिव डेरियों का संगठन विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों को दूर करने में काम आया और पशुओं को नियमित वैक्सीन लगने लगी जिससे गुजरात में दूध का उत्पादन कई गुना बढ़ गया। बनास डेयरी में आज हर रोज औसतन 90 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
पूरे देश में फैल चुका है ‘मिशन हनी’
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से गांव के डिजिटलाइजेशन के लिए कदम उठाये, e-dairy के कॉन्सेप्ट को लांच किया, खेती और पशुपालन के क्षेत्र में मॉर्डन टेक्निक को इम्प्लीमेंट करने और डाइवर्सिफिकेशन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया, उसका फायदा भी सबसे बड़ी संगठित डेयरी के रूप में बनास डेयरी के सभासदों ने उठाया। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आह्वान पर देश में ‘वाइट रिवोल्यूशन’ के बाद ‘स्वीट रिलोल्यूशन’ शुरुआत भी गुजरात के बनासकांठा से ही हुई। स्वीट रिवोल्यूशन का काफी बड़ा श्रेय बनास डेयरी को भी जाता है, जो सबसे पहले खादी और ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) की पार्टनर बनी और आज मिशन हनी पूरे देश में फैल चुका है।
मोदी के गोबर धन के आइडिया से बनासकांठा बना BIO CNG का हब
ये PM MODI का ही सुझाव था की जिस जिले में इतनी बड़ी मात्रा में पशुधन उपलब्ध है वहां जो गोबर प्रड्यूस होता है उसे ऊर्जा के स्रोत में बदल कर गोबर को भी आय का जरिया बनाया जा सकता है... बायो गैस के साथ साथ उन्होंने सुझाया की इसे BIO CNG में कैसे कन्वर्ट किया जाये इस पर काम होना चाहिए... बनास डेरी ने प्रयोग किये जो सफल रहे और जब पहले BIO CNG पम्प के रिज़ल्ट्स सामने आये तो उन्होंने डेरी से कहा की वो इस प्लान को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी कम्पनीज़ को एप्रोच करे.. जिसके बाद SUZUKI ने इस प्रोजेक्ट में रूचि दिखाई और पहली बार कोऑपरेटिव तथा कॉर्पोरेट क्षेत्र एक साथ मिल कर बनासकांठा में CBG यानि कम्प्रेस्ड बायो गैस के प्लांट्स लगा रहे हैं। अब तक 5 प्लांट्स कार्यरत भी हो चुके हैं। जब मोदी ने कहा था कि गोबर को वेस्ट मत समझी ये भी धन है तब शायद ये किसी ने नहीं सोचा था कि CBG यानि कम्प्रेस्ड बायो गैस एक मूवमेंट बन जायेगा और बनासकांठा इसे लीड करेगा।
एक विज़िटिंग कार्ड का हुआ एक्सचेंज और बन कर हो गया BBBRC
ये गज़ब का जुड़ाव है --अब तो ऐसा हो गया है की मोदी सोचते हैं और बनास डेरी करके दिखाती है करीब तीन साल पहले दिल्ली में एक समारोह में PM MODI ने बनास डेरी के चेयरमैन शंकर चौधरी से ब्राज़ील के टॉप लीडर के विज़िटिंग कार्ड एक्सचेंज करवाए और कहा की ब्राज़ील में डेरी रिवोल्यूशन का आधार भी तो हमारे देश की कांकरेजी और गिर गाये बनी हैं तो क्यों हम देश में इनकी स्ट्रांग ब्रीड डेवलप नहीं कर सकते। इसके बाद काम शुरू हुआ भारत बोवाइन ब्रीडिंग एन्ड रिसर्च सेंटर BBBRC पर जो की तीन साल में पुरे प्रोटोकॉल्स के टेस्ट के साथ हर साल 25000 एम्ब्रियोज़ बनाने के लक्ष्य के साथ बन कर तैयार हो गया है। इस केंद्र में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), ओवम पिक-अप (OPU) और भ्रूण स्थानांतरण (Embryo Transfer) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की स्वदेशी गाय और भैंस की नस्लों की आनुवंशिक (Genetic) गुणवत्ता में सुधार करना है। इससे पशुओं की बीमारियों से लड़ने की क्षमता और जलवायु अनुकूलता बढ़ेगी।
अब जो काम ब्राज़ील तथा अन्य देश हमारी गायों की मदद से 80-100 सालों में कर पाए वो हमने 3 सालों के भीतर कर दिखाया। एक लीडर का यही विज़न और मोटिवेशन आम लोगों को भी प्रेरित करता है, जो उन्हें और ज्यादा सक्षम बनाता है। तभी तो आज बनासकांठा में ब्रीडर क्लब की शुरुआत हुई है। बनासकांठा के दूध उत्पादक अब पशु संवर्धक भी बन रहे हैं।
आपदा से लड़ने में आगे रही है बनास डेयरी
बनासकांठा में डेयरी के साथ जुड़े कई किसान मधुमक्खी पालन से सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। अब यहाँ आलू वेस्ट नहीं होता है बड़ी मल्टिनैशनल के अलावा बनास डेयरी ने भी अल्ट्रा मॉर्डन प्लांट लगा दिया है... परिणाम क्या आया कभी आपदाओं और विपत्तियों से घिरे रहने वाले जिले के किसान आज खुद आपदाओं में मदद के लिए आगे आ रहे हैं... बनास डेरी के सभासदों द्वारा पालनपुर में 100 करोड़ के खर्च से मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 200 सीट का मेडिकल कॉलेज बनाया गया है। इस के निर्माण के लिए बनास डेयरी के सभासदों ने कई सालों तक रोजाना अपने दूध की इनकम में से प्रति लीटर 2 पैसे का दान दिया। इतना ही नहीं, कोविड की सेकेंड वेव में इन सभासदों ने महज 4 दिनों में ऑक्सीजन प्लांट खड़ा कर दिया (ये अपने आप में एक मिसाल है)। कोविड की पहली वेव के दौरान यहां की महिला सभासदों ने महज 3 दिन के भीतर 7 करोड़ रुपये इकट्ठे करके PM CARE फंड में जमा करवाए। विपत्ति कैसी भी डेयरी का अपना नेटवर्क हमेशा बनासकांठा के किसानो के काम आता है।
2300 करोड़ रुपये को प्रॉफिट बोनस के रूप में बांटा
बनासकांठा जिला, बनास डेयरी और उसके सभासद एक साथ विकास कर रहे हैं। कैसे? एक तरफ जहां आज बनास डेयरी खुद को विस्तारित करते हुए हरियाणा, उत्तरप्रदेश तथा मध्यप्रदेश तक पहुंच रही है, बनासकांठा जिले के सनादरा गांव में 50 लाख लीटर की कैपेसिटी वाला देश का सबसे बड़ा ग्रीन फिल्ड मिल्क प्लांट कार्यरत हो चूका है है, वहीं इसने पिछले साल अपने 3 लाख से ज्यादा सभासदों में 2300 करोड़ रुपये को प्रॉफिट बोनस के रूप में बांटा है। लखपति दीदी का कॉन्सेप्ट तो मोदी जी बाद में लाये उससे पहले ही उन्होंने बनासकांठा में करोड़पति दीदी तैयार कर दीं थी... डेयरी के साथ जुडी कई महिला सभासद साल भर 1 करोड़ से भी ज्यादा रुपये के दूध का उत्पादन करती हैं (इसकी चर्चा आज पूरे विश्व में हो रही है)।
बचपन में पढ़ा था की स्व. लालबहादुर शास्त्री जी ने आनंद में अपनी विज़िट के दौरान कहा था कि उन्हें देश के हर राज्य में एक आनंद चाहिए .. सालों बाद मोदी सत्ता पर आये और उन्होंने आनंद से भी बेहतर और मजबूत बनासकांठा बना दिया। फर्क सिर्फ इतना है की वो कल्पना नहीं कर रहे हैं कि देश के हर राज्य में एक बनासकांठा हो बल्कि बनास डेरी के जरिये खुद ही हर राज्य में उसे बनाने का प्रयास भी कर रहे हैं।
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