Explainer: क्या 2032 तक चांद पर होगा इंसानों का बसेरा? आसान भाषा में समझें NASA का नया प्लान
NASA ने चांद पर स्थायी मून बेस बनाने के लिए 20 अरब डॉलर की 3 फेज का प्लान शुरू किया है। आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2028 तक इंसानों को चांद पर भेजने और 2032 के बाद वहां लगातार इंसान की मौजूदगी कायम करने का लक्ष्य रखा गया है।

NASA Moon Base: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चांद पर स्थायी बेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने तीन चरणों वाला एक विशाल कार्यक्रम घोषित किया है, जिसके तहत आने वाले वर्षों में चांद पर इंसानों की लगातार मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी की जाएगी। NASA ने बताया कि इस साल ही चांद से जुड़े तीन बड़े मिशन भेजे जाएंगे। इन मिशनों का मकसद ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे इंसान चांद जैसे खतरनाक वातावरण में लंबे समय तक रह और काम कर सकें।
क्या है NASA की बड़ी योजना?
NASA के प्रशासक जारेड इसाकमैन ने वॉशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान करीब 20 अरब डॉलर की योजना पेश की। इस योजना के तहत चांद पर एक स्थायी 'मून बेस' बनाया जाएगा। इस बेस में कई आधुनिक सुविधाएं होंगी, जैसे:
- चांद पर चलने वाले रोवर
- ड्रोन
- वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं
- ऊर्जा व्यवस्था
- इंसानों के रहने और काम करने की सुविधाएं
NASA का कहना है कि यह सिर्फ अमेरिका का नहीं, बल्कि मानवता का दूसरे ग्रह या खगोलीय दुनिया पर पहला स्थायी ठिकाना होगा। जारेड इसाकमैन ने कहा, 'अमेरिका फिर से चांद पर लौट रहा है। मून बेस मानव इतिहास में किसी दूसरी दुनिया पर पहला स्थायी आउटपोस्ट होगा।'
NASA का लक्ष्य 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद पर उतारना है। इसके लिए एजेंसी 'आर्टेमिस कार्यक्रम' पर काम कर रही है।
पहला मिशन: मून बेस-I
इस मिशन के लिए NASA ने ब्लू ओरिजिन के 'ब्लू मून मार्क 1 एंड्योरेंस' लैंडर को चुना है। यह मिशन सितंबर 2026 के बाद लॉन्च किया जा सकता है। इस मिशन में चांद पर कई वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- स्टीरियो कैमरे, जो यह अध्ययन करेंगे कि लैंडर के थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं
- लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टिव एरे, जिसकी मदद से अंतरिक्ष यान चांद पर अपनी सही स्थिति पता कर सकेंगे
यह मिशन चांद के 'शैकलटन कनेक्टिंग रिज' क्षेत्र में उतरेगा। इसका उद्देश्य भविष्य के मानव मिशनों के खतरे कम करना है।
दूसरा मिशन: मून बेस-II
इस साल के अंत में होने वाले दूसरे मिशन में 1100 पाउंड (करीब 500 किलोग्राम) से ज्यादा सामान चांद पर भेजा जाएगा। यह मिशन ऐस्ट्रोबॉटिक के 'ग्रिफिन' लैंडर के जरिए होगा। इसमें 'FLIP रोवर' भी भेजा जाएगा, जिसे ऐस्ट्रोलैब ने बनाया है। इस रोवर का काम चांद की सतह पर चलने-फिरने वाली तकनीक का परीक्षण करना होगा, ताकि भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बेहतर वाहन तैयार किए जा सकें।
तीसरा मिशन: मून बेस-III
तीसरा मिशन भी इसी साल भेजने की योजना है। इसमें NASA का 'लूनर वर्टेक्स' विज्ञान मिशन शामिल होगा। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चांद पर मौजूद रहस्यमयी चमकीले निशानों यानी 'लूनर स्वर्ल्स' का अध्ययन करना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये चांद की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से जुड़े हो सकते हैं। इस मिशन में यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी के उपकरण भी शामिल होंगे।
पहला फेज: 2026 से 2028
इस दौरान नई तकनीकों का परीक्षण होगा और चांद की सतह पर काम करने की तैयारी की जाएगी। इसी दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चंद्र वाहन भी तैयार किए जाएंगे।
दूसरा फेज: 2029 से 2032
इस चरण में चांद पर स्थायी ढांचा तैयार किया जाएगा। इसमें बिजली व्यवस्था और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया जाएगा।
तीसरा फेज: 2032 के बाद
इस चरण में चांद पर लगातार मानव मौजूदगी कायम करने की कोशिश होगी। नियमित अंतरिक्ष यात्री दल वहां जाएंगे और लगातार वैज्ञानिक गतिविधियां चलेंगी। NASA के मून बेस कार्यक्रम के अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गैलन ने कहा, 'उस समय हम कह सकेंगे कि अब हम यहां स्थायी रूप से मौजूद हैं और इसे छोड़ने वाले नहीं हैं।'
आर्टेमिस-II मिशन क्यों खास रहा?
हाल ही में अप्रैल में 'आर्टेमिस-II' मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चांद का चक्कर लगाकर लौटे थे। यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था, जो पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे गया। बता दें कि जीन कर्नन और हैरिसन श्मिट 1972 में चांद पर चलने वाले आखिरी अंतरिक्ष यात्री थे।
यह मिशन दुनिया के लिए क्यों जरूरी है?
NASA का मानना है कि चांद पर स्थायी बेस बनाना भविष्य में मंगल ग्रह और उससे आगे के अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी का सबसे बड़ा कदम होगा। अगर यह योजना सफल होती है, तो पहली बार इंसान पृथ्वी के बाहर किसी दूसरी दुनिया पर लगातार रहना और काम करना शुरू कर देगा।